पटना एयरपोर्ट से काठमांडू, गयाजी से सिंगापुर, बैंकॉक और कोलंबो; अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जल्द
पटना से काठमांडू के लिए 72 सीट वाली छोटे विमान का परिचालन होगा। इसके लिए राज्य सरकार प्रति फेरा 2.5 लाख तक अनुदान देगी। गया जी से पांच देशों के लिए बड़े विमान उड़ान भरेंगे, जिनमें 150 से अधिक यात्री बैठ सकेंगे।

पटना और गया जी से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा जल्द शुरू होगी। पटना से काठमांडू, जबकि गया जी से सिंगापुर, बैंकॉक, कोलंबो, काठमांडू और शारजाह के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी। विमानन कंपनी के चयन के लिए इसी सप्ताह टेंडर जारी होगा। अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक विमानन कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकेंगी। टेंडर में शामिल कंपनियों का चयन अप्रैल में होगा। इसके बाद गर्मी छुट्टी से पहले अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू हो सकती है।
पटना से काठमांडू के लिए 72 सीट वाली छोटे विमान का परिचालन होगा। इसके लिए राज्य सरकार प्रति फेरा 2.5 लाख तक अनुदान देगी। गया जी से पांच देशों के लिए बड़े विमान उड़ान भरेंगे, जिनमें 150 से अधिक यात्री बैठ सकेंगे। इस कारण संबंधित विमानन कंपनियों को प्रति फेरा 10 लाख तक अनुदान मिलेगा। पहले चरण में यह अनुदान छह महीने तक दिया जाएगा।
इसके बाद यात्रियों की संख्या और अन्य संभावनाओं को देखते हुए छह महीने तक और विस्तार किया जा सकेगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी से टेंडर निकालने की मंजूरी मिल गई है। इसी कारण जल्द ही टेंडर जारी होगी। इस टेंडर प्रक्रिया में भारतीय विमानन कंपनियां ही भाग ले सकती हैं। इनमें एयर इंडिया, आकाश, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल है।
विदेशी नागरिकों के भ्रमण के आधार पर पर्यटन स्थल विकसित होंगे
बिहार में कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। मगर आवागमन का साधन हवाई मार्ग से नहीं होने के कारण लोग बिहार आने से कतराते हैं। वहीं विमानन कंपनियों ने भी बिहार से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू नहीं की। इसी कारण राज्य सरकार विमानन कंपनियों को अनुदान दे रही है, ताकि बिहार से भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू हो और विदेशी पर्यटक घूमने आएं।
विमान सेवा शुरू होने के बाद सरकार को यह जानकारी मिलेगी कि किस देश से सबसे अधिक लोग आ रहे हैं और वह कहां-कहां घूमने जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बिहार में वह कितने दिन रुक रहे हैं। इन सभी का आकलन करते हुए राज्य सरकार संबंधित स्थलों को चिह्नित करेगी और उसे विकसित करने की योजना बनाएगी।




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