पति की मौत का सदमा नहीं झेल पाई पत्नी, जंगल जाकर ऐसा काम किया कि सबके दिल दहल गए
मृतका के परिजनों ने बताया कि वह शौच की बात बताकर जंगल में गई और साड़ी के पल्लू से खुद को लटका लिया। काफी देर नहीं लोटी तो लोग खोलने निकले।

बिहार के कैमूर में एक महिला अपने पति की मौत का सदमा नहीं झेल पाई। औधौरा थाना क्षेत्र के सुगनिया जंगल में महिला ने गले में काले रंग की साड़ी का फंदा लगा पेड़ से लटक खुदकुशी कर ली। मृतका 36 वर्षीया हेवंती देवी अधौरा थाना क्षेत्र के खामकला निवासी हीरा लाल सिंह की पत्नी थी। मृतका के पति की मौत 18 फरवरी 2026 की शाम सात बजे सड़क दुर्घटना में यूपी के खलियारी बाजार से लौटते वक्त सती माई स्थान के पास हो गई थी। मृतका के ससुर ने बताया कि पति की मौत के सदमा को बहू बर्दास्त नहीं कर सकी और उसने खुदकुशी कर ली।
इस घटना की सूचना मिलते ही अधौरा थाने की पुलिस सुगनिया जंगल में पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। थाने के पीएसआई वीरेंद्र कुमार उरांव ने पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए शनिवार को भभुआ के सदर अस्पताल में भिजवा दिया। चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम किया गया गया और उसके बाद पुलिस ने शव को परिजनों को सौंप दिया है। मृतका के ससुर शिवचरण सिंह ने बताया कि उनकी बहू शुक्रवार की सुबह 9:00 घर से यह कहकर निकली थी कि वह शौच करने जा रही है। लेकिन, उसे लौटने में देर हुई तो परिवार के सदस्य चिंतित हो उठे।
पेड़ के पास पड़ी थी चप्पल
परिवार के सदस्य और ग्रामीण उसकी तलाश में जुट गए। आसपास में गए। ग्रामीणों से भी जानकारी ली। लेकिन, उसके बारे में कुछ पता नहीं चला। जंगल की ओर से आ रहे गांव के कुछ लोगों की नजर महुआ के पेड़ से लटकती लाश पर पड़ी। ग्रामीण शिवचरण के घर पहुंचे और बहू के पेड़ में लटके होने की सूचना दी। यह सुन परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जो जिस हाल में थे सुगनिया जंगल की ओर दौड़ लगा दिए। घर-गांव की महिलाएं भी पहुंचीं। उसकी चप्पल पेड़ के नीचे पड़ी थी और पेड़ की टहनी पर हरे रंग की शाल पड़ी थी।
दो शादी हुई थी, पहले पति ने की थी खुदकुशी
हेवंती की दो शादियां हुई थी। पहली शादी आठ साल पहले खामकला के रामचंद्र खरवार से हुई थी। इसने एक बेटी को भी जन्म दिया। किसी बात को लेकर रामचंद्र ने चार साल पहले पिपरा जंगल में गले में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पति की मौत के दो साल बाद खाम कला के ही हीरा लाल खरवार से शादी कर ली। तब से उसकी बेटी अपने दादा दशरथ खरवार के साथ रहने लगी।




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