उत्तर बिहार में भीषण गर्मी का अलर्ट, 40-42°C तक पहुंच सकता है तापमानस, किसानों के लिए विशेष सलाह जारी
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी बुलेटिन में उत्तर बिहार में 22 से 26 अप्रैल के बीच भीषण गर्मी और शुष्क मौसम की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 38-42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है। किसानों को फसल प्रबंधन के लिए विशेष सलाह दी गई है, जिसमें खेत की तैयारी और कीट नियंत्रण शामिल है।

हाजीपुर, संवाद सूत्र डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र द्वारा जारी ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के बुलेटिन संख्या-31 के अनुसार उत्तर बिहार में आगामी दिनों में भीषण गर्मी और शुष्क मौसम बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 22 से 26 अप्रैल तक के लिए मध्यमावधि पूर्वानुमान जारी करते हुए किसानों को सतर्क रहने और फसल प्रबंधन के लिए विशेष सलाह दी है। बीते मौसम का हाल पिछले तीन दिनों में अधिकतम तापमान औसतन 34.9 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह में औसत सापेक्ष आर्द्रता 88 प्रतिशत जबकि दोपहर में 61 प्रतिशत रही।
हवा की गति लगभग 9.3 किमी प्रति घंटा रही और प्रतिदिन 4.7 मिमी वाष्पीकरण दर्ज किया गया। इस दौरान सूर्य प्रकाश की अवधि 8.6 घंटे प्रतिदिन रही। 15 अप्रैल को अधिकतम तापमान 38.3°C तक पहुंच गया था। पूरे समय मौसम शुष्क बना रहा। आगामी मौसम का पूर्वानुमान (22-26 अप्रैल) मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में उत्तर बिहार में आसमान साफ रहेगा और वर्षा की संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर यह 42 डिग्री तक पहुंच सकता है। न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हवा की गति सामान्यतः 8 से 10 किमी प्रति घंटा रहेगी, हालांकि 22-23 अप्रैल को पछुआ हवा चलने के बाद पूर्वी हवा का प्रभाव देखने को मिल सकता है। सुबह में आर्द्रता 40-50 प्रतिशत और दोपहर में 10-20 प्रतिशत रहने की संभावना है। किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह 1. खेत की तैयारी और कीट नियंत्रण रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतों की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें। इससे तेज धूप मिट्टी में छिपे कीटों के अंडे, प्यूपा और खरपतवार के बीजों को नष्ट कर देगी। 2. मूंग और उरद की फसल प्रबंधन इन फसलों में समय पर निराई-गुड़ाई और छंटाई करें। रस चूसने वाले कीटों की नियमित निगरानी करें, क्योंकि ये पौधों का रस चूसकर पत्तियों को विकृत कर देते हैं और उत्पादन घटा देते हैं। नियंत्रण के लिए मिथाइल पेराथियान 50 ईसी (2 मि.ली./लीटर पानी) या क्लोरपाइरीफॉस 20 ईसी (2.5 मि.ली./लीटर पानी) का छिड़काव करें। 3. आलू की फसल की तैयारी आलू की रोपाई शीघ्र पूर्ण करें और उन्नत किस्मों का चयन करें। कटे हुए कंदों को थाइरम या मैंकोजेब दवा (5 ग्राम/लीटर पानी) के घोल में 20-25 मिनट डुबोकर छाया में सुखाएं। इसके बाद ही खेत में रोपाई करें, ताकि मिट्टी जनित रोगों से बचाव हो सके। 4. आम के बागों की देखभाल आम के पेड़ों में मिलीबग (डहिया कीट) की निगरानी करें। यह कीट सफेद पाउडर जैसा दिखाई देता है और नई पत्तियों व मंजरियों पर तेजी से फैलता है। नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 30 एससी (0.5 मि.ली./लीटर पानी) का छिड़काव करें। साथ ही बागों में नमी बनाए रखें। 5. पशुपालन के लिए सुझाव गर्मी को देखते हुए पशुओं को सूखा चारा कम और हरा चारा अधिक दें। आहार में दलहन अनाज शामिल करें। चारा सुबह 5 बजे और शाम को धूप कम होने पर ही दें। पशुओं को स्वच्छ और ठंडा पानी हर समय उपलब्ध कराएं। प्रत्येक वयस्क पशु को 50 ग्राम खनिज मिश्रण और 50 ग्राम नमक दें। किलनी और जूं से बचाव के लिए एंटीपैरासाइटिक दवाओं का उपयोग करें। आज का तापमान रिकॉर्ड अधिकतम तापमान 40.0°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.2°C अधिक है, जबकि न्यूनतम तापमान 21.6°C रहा, जो सामान्य से 0.7°C कम है। वर्तमान स्थिति के देखकर कहा जा सकता है कि उत्तर बिहार में आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल और पशुओं की देखभाल करनी होगी, ताकि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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