Ganges in Bhagalpur toxic Research by universities in Nepal Korea reveals alarming findings भागलपुर में गंगा जहरीली? नेपाल और कोरिया की यूनिवर्सिटी के रिसर्च में डराने वाली रिपोर्ट, Bihar Hindi News - Hindustan
More

भागलपुर में गंगा जहरीली? नेपाल और कोरिया की यूनिवर्सिटी के रिसर्च में डराने वाली रिपोर्ट

विदेशी विशेषज्ञों ने गंगा की उपधारा जमनिया से पानी का सैंपल लिया था। टीएमबीयू की पर्यावरण जीवविज्ञान प्रयोगशाला में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की सहायता से जल के नमूनों का विश्लेषण करके उनमें आर्सेनिक की उपस्थिति का पता लगाया गया।

Fri, 27 March 2026 08:23 AMSudhir Kumar हिन्दुस्तान, संजय कुमार भागलपुर
share
भागलपुर में गंगा जहरीली? नेपाल और कोरिया की यूनिवर्सिटी के रिसर्च में डराने वाली रिपोर्ट

बिहार के भागलपुर में गंगा की तलहटी में मानक से अधिक मात्रा में आर्सेनिक जमा है। पेयजल में आर्सेनिक की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.05 मिली ग्राम प्रति लीटर (50 पीपीबी) है। यह खुलासा त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, नेपाल और कांगवॉन नेशनल यूनिवर्सिटी, चूनचियोन, दक्षिण कोरिया के जल विशेषज्ञों की शोध रिपोर्ट में हुआ है।

विदेशी विशेषज्ञों ने गंगा की उपधारा जमनिया (इसे जमुनिया के नाम से स्थानीय लोग जानते हैं) से पानी का सैंपल लिया था। विशेषज्ञों ने शहर से सटे 17 इलाकों से पानी के सैंपल से यह जानने की कोशिश की थी कि आर्सेनिक का लेवल कहां-कितना है। रिपोर्ट में बताया गया कि छह स्थलों पर मानक से पार 55 पीपीबी तक है। चार जगहों पर डेंजर लेवल के करीब है। सात जगहों पर पानी बेहतर पाया गया। नेपाल-कोरिया के शोधार्थियों को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के बॉटनी एवं जियोग्राफी के शिक्षकों का साथ मिला।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:5 राउंड फायरिंग, 30 मिनट तक पत्थरबाजी, 4 जख्मी; बच्चों के झगड़े में बड़े भिड़े

इस सर्वेक्षण में टीएमबीयू के अलावा महेंद्र मोरंग आदर्श मल्टीपल कैंपस, विराटनगर (त्रिभुवन विश्वविद्यालय), नेपाल का बॉटनी विभाग, एनटीपीसी बाढ़ और दक्षिण कोरिया स्थित कांगवॉन नेशनल यूनिवर्सिटी, चूनचियोन का एप्लाइड प्लांट साइंस विभाग के विशेषज्ञ शामिल थे। विशेषज्ञों की टीम में रंजन कुमार मिश्रा, बिष्णु देव दास, प्रशांत चंद्र कुमार, जयंत चौधरी, संजय कुमार झा, रूबी कुमारी, डॉ. सुनील कुमार चौधरी और निरोज पौडेल शामिल रहे। डॉ. सुनील कुमार चौधरी टीएमबीयू के ख्यात शिक्षक हैं।

उन्होंने बताया कि टीएमबीयू की पर्यावरण जीवविज्ञान प्रयोगशाला में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की सहायता से जल के नमूनों का विश्लेषण करके उनमें आर्सेनिक की उपस्थिति का पता लगाया गया। यह संपूर्ण विश्लेषण मानक विधियों का पालन करते हुए किया गया। टीएमबीयू की पर्यावरण जीव विज्ञान प्रयोगशाला में स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की सहायता से जल के नमूनों का विश्लेषण करके उनमें आर्सेनिक की उपस्थिति का पता लगाया गया। यह संपूर्ण विश्लेषण मानक विधियों का पालन करते हुए किया गया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:गेमिंग एप से साइबर ठगी का भंडाफोड़, 5 धराए; दुबई, नेपाल, श्रीलंका तक नेटवर्क

प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग

डॉ. चौधरी ने बताया, प्रत्येक नमूना स्थल के भौगोलिक निर्देशांकों के साथ, नमूना जल में एफटीके परीक्षण और स्पेक्ट्रोफोटोमेट्रिक परीक्षण द्वारा आर्सेनिक का मान ज्ञात किया गया। इन 17 नमूना स्थलों में से 13 स्थल ऐसे हैं जिनका एफटीके और स्पेक्ट्रोफोटोमेट्रिक मान क्रमशः 20+ और 10+ पीपीबी है। 43.76 पीपीबी और 34.48 पीपीबी का कारण वार्ड संख्या 26 और 27 में प्रचलित रेशम धागे की रंगाई होती है, जिनसे होकर ये दोनों नहरें गुजरती हैं। चूंकि भागलपुर शहर रेशम के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए रंगाई-बुनाई यहां की प्रमुख गतिविधियां हैं। इसमें ऐसे रसायनों का उपयोग होता है जो उस देश में प्रतिबंधित हैं, जहां से वे आयात करते हैं।

चमरे की सफाई का केमिकल नदी में आ रहा

पशुओं की खालों को टैन करने से निकलने वाले अवशेष सीधे उस इलाके से गुजरने वाली नहर में बहा दिए जाते हैं। खालों को टैन करने में कई प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है। जमुनिया नाले के दक्षिणी किनारे पर स्थित दो जगहों पर ईंट निर्माण का कार्य भी होता है। ये सभी मानवीय गतिविधियां आर्सेनिक की सांद्रता को बढ़ाती हैं। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल का अपशिष्ट जमनिया धार में सीधे डाला जाता है। काली घाट पर दुर्गा पूजा और काली पूजा के दौरान मूर्तियों के विसर्जन का स्थान है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मुजफ्फरपुर झड़प में थानेदार समेत पूरी टीम सस्पेंड, गोलीबारी में हुई थी जगतवीर की

हनुमान घाट और नीलकंठ पुतलीधाम घाट के पास आर्सेनिक की उपस्थिति उर्वरकों, कीटनाशकों, घरेलू कचरे के निर्वहन के साथ-साथ जमुनिया नहर द्वारा ऊपरी क्षेत्रों से लाए गए आर्सेनिक की मात्रा के कारण है। विक्रमशिला पुल के पास गंगा का जमुनिया नहर से संगम होने के कारण नदी के ताजे पानी के मिश्रण से आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक नहीं है।

लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।