बिहार में पहली बार जिंदा इंसान के लिवर के हिस्से का हुआ ट्रांसप्लांट, बड़े भाई ने दी छोटे को जिंदगी
सर्जरी के बाद मरीज शीघ्र होश में आ गया। उसे 14 दिनों के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया। लिवर दान करने वाले को भी ऑपरेशन के छठे दिन छुट्टी दे दी गई। चार से पांच महीने तक उन्हें संक्रमण से बचने की सलाह दी गई है।

बिहार में पहली बार किसी जिंदा इंसान के लिवर के हिस्से का ट्रांसप्लाट किया गया है। यह कमाल कर दिखाया है पटना में स्थित रूबन मेमोरियल अस्पताल के चिकित्सकों ने। इस अस्पताल के डॉक्टरों ने राज्य का पहला सफल लिविंग लिवर ट्रांसप्लांट कर मरीज को नया जीवन दिया है। इस जटिल सर्जरी में युवक ने बड़े भाई को लिवर का हिस्सा दान कर पारिवारिक समर्पण की मिसाल पेश की है। ट्रांसप्लाट के लिए करीब 9 घंटे तक सर्जरी चली। अब तक मृत व्यक्ति का लिवर का हिस्सा ले उसे ट्रांसप्लांट किया जाता था।
रूबन की ओर से बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रांसप्लांट की जानकारी दी गई। लिवर एंड किडनी कंसल्टेंट डॉ. मिलिंद मंडवार और उनकी टीम ने सफलतापूवर्क सर्जरी किया। सर्जरी के बाद मरीज शीघ्र होश में आ गया। उसे 14 दिनों के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया। लिवर दान करने वाले को भी ऑपरेशन के छठे दिन छुट्टी दे दी गई। चार से पांच महीने तक उन्हें संक्रमण से बचने की सलाह दी गई है।
रूबन मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा कि एक 23 वर्षीय युवक ने अपने 31 वर्षीय बड़े भाई के लिए लिवर दान किया। मरीज को गंभीर लीवर फेल्योर की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कहा कि यह सफलता बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में बड़ा कदम है। डॉ. मिलिंद ने बताया कि सफल ट्रांसप्लांट के लिए डोनर व रिसिपिएंट का सावधानीपूवर्क चयन अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक तकनीक के कारण लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता दर 95% से अधिक हो चुकी है। डॉ. राजू बाबू कुशवाहा भी उपस्थित थे।
अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह सफलता बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है। रूबन अस्पताल हमेशा से नई तकनीकों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बिहार में सबसे पहले शुरू करने में अग्रणी रहा है। अस्पताल में विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत पहल है।




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