विपक्षी नेताओं पर चुनाव आयोग की फैक्ट चेक स्ट्राइक, वोटर लिस्ट रिवीजन पर खोज-खोजकर जवाब
राजद नेता तेजस्वी यादव, मनोज झा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य सभी नताओं की दलीलों को निर्वाचन आयोग ने भ्रामक करार दिया है। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।

बिहार में मतदाता पुनरीक्षण अभियान पर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों को लेकर निर्वाचन आयोग एक-एक करके नेताओं को जवाब दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव, मनोज झा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य सभी नताओं की दलीलों को निर्वाचन आयोग ने भ्रामक करार दिया है। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।
कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जु खरगे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग के सहयोग से बिहार में करोड़ों लोगों का वोटिंग का अधिकार छीनने का जो मास्टर प्लॉन बनाया था, उसमें अब खुद फँसती नज़र आ रही है। जब विपक्ष, जनता और सिविल सोसाइटी का दबाव बढ़ा, तब आनन-फ़ानन में चुनाव आयोग ने विज्ञापन फिर से प्रकाशित किया और कहा कि अब केवल फॉर्म भरना है, कागज़ दिखाना ज़रूरी नहीं है। इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि एसआईआर से संबंधित निर्देशों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरोप भ्रामक है।
चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव के आरोपों का भी ठोस जवाब दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि चुनाव आयोग खुद कन्फ्यूज्ड है। एक दिन में तीन अलग-अलग दिशा निर्देश जारी किए गए। इससे भ्रम पैदा होता है कि चुनाव आयोग की वास्तविक नीति क्या है। हर घंटे नियम बदल रहे हैं, कोई मजाक है क्या। आयोग द्वारा कोई आधिकारिक अधिसूचना या संशोधित आदेश जारी नहीं किए गए बल्कि विज्ञापन और सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। आम जनों में आशंका उत्पन्न हो रही है कि आयोग बिना दस्तावेज के फॉर्म ले लेगा और फिर राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर काम करेगा। 24 जून 2025 के दिशा निर्देशों को जुलाई में बदल दिया गया। इसका उत्तर देते हुए चुनाव आयोग की ओर से हा है कि दिशा निर्देशों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तमाम आरोप भ्रामक हैं।
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा के ट्वीट का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के नाम वोटर सत्यापन से संबंधित मीटिंग में पार्टी के भाग लेने के लिए भेजे गए पत्र का हवाला दिया है। कहा गया है कि लालू यादव यादव या पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि तेजस्वी यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गयी। मनोज झा निर्वाचन आयोग से संवाद के लिए अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं। उन्हें सिर्फ 2 जुलाई की मीटिंग अटेंड करने के लिए बुलाया गया था जिसमें वे आए थे। चुनाव आयोग ने मनोज झा के आरोपों को भी भ्रामक करार दिया है। मनोज झा ने निर्वाचन आयोग पर पार्टी विशेष के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था।
निर्वान आयोग ने सागरिका घोष के इस आरोप कि वोटर सत्यापन के नाम पर बिहार की गरीब और कमजोर तबके के मतदाताओं के वोटिंग अधिकार छीन लेने की साजिश की जा रही है, को भी भ्रामक बताया है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के ट्वीट का जवाब भी चुनाव आयोग ने दे दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा था कि 11 दस्तावेजों में वोटर कार्ड और आधार कार्ड का शामिल नहीं किया जाना बड़ी साजिश है। इसे पहले शुरू किया जाना चाहिए था। योगेंद्र यादव के इस आरोप कि करीब ढाई करोड़ मतदाताओं का नाम कट जाने की आशंका है, को भी निर्वाचन आयोग ने बेसलेस बताया है। कहा है कि किसी भी वैध नागरिक का नाम नहीं कटेगा अगर फॉर्म भर कर सौंप देंगे।
बुधवार को बिहार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में चुनाव आयोग के अफसर विपक्षी दलों का इंतजार करते रहे पर राहुल गांधी समेत कोई विपक्षी नेता नहीं पहुंचे।




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