LPG किल्लत से चाय, समोसा, रसगुल्ला सब हुआ महंगा, रेस्टोरेंट के मेन्यू में 70 फीसदी तक कटौती
बढ़े हुए दाम को लेकर चाय दुकानदारों और ग्राहकों के बीच नोंक-झोंक हो रहा है। चाय दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें चाय की कीमत बढ़ानी पड़ी है। चाय के शौकीनों का कहना है कि गैस का बहाना बना दाम बढ़ाया जा रहा है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत से महंगाई में बेतहाशा बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इसका असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा। जानकारी के अनुसार खाने-पीने की सामग्री से लेकर प्लास्टिक दाना, रसायन आदि की कीमतों में 10 से 20 फीसदी का इजाफा हो गया है। दूसरी तरफ, एलपीजी गैस की किल्लत के कारण मिठाई से लेकर चाय और नाश्ता की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। गैस का नंबर लगने के बाद एलपीजी सिलेंडर प्राप्त करने का प्रतीक्षा समय तीन-पांच दिन से बढ़कर सात से 10 दिन हो गई है।
प्लास्टिक का दाना हुआ महंगा
पेट्रोलियम के अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इजाफा होने के कारण और आपूर्ति में कमी के कारण प्लास्टिक दाना की आपूर्ति में तेज गिरावट और कीमत में बढ़ोतरी हुई है। एक सप्ताह में प्लास्टिक दानों की कीमत में 30 से 40 फीसदी बढ़ी है। कारोबारी प्रदीप सिंह यादव का कहना है कि पहले प्लास्टिक दाना 125 रुपए किलो मिलता था जो बढ़कर दो सौ रुपये किलोग्राम हो गया है। इधर, प्लास्टिक दानों की कमी के कारण प्लास्टिक की कुर्सी, बाल्टी, मग, कंघी, ऐनक, डब्बा, कैरी बैग आदि के कारखानों में उत्पादन ठप होने का खतरा मंडराने से चिंता बढ़ने लगी है।
गैस पर बनने वाली चाय हुई महंगी
शहर में गैस पर बनने वाली चाय की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का इजाफा बीते एक सप्ताह में हुआ है। 10 रुपये प्रति कप बिकने वाली चाय की कीमत सोमवार को 12 रुपये हो गई। पटना हाई कोर्ट परिसर में बिकने वाली कुल्हड़ में मिलने वाली चाय की कीमत दस रुपये से बढ़कर 12 रुपये हो गई है। बढ़े हुए दाम को लेकर चाय दुकानदारों और ग्राहकों के बीच नोंक-झोंक हो रहा है। चाय दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें चाय की कीमत बढ़ानी पड़ी है। चाय के शौकीनों का कहना है कि गैस का बहाना बना दाम बढ़ाया जा रहा है।
स्टील और लोहे की कीमत में इजाफा
वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में स्टील और इससे जुड़ी सामग्री की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। स्टील कारोबारी कमल नोपानी ने बताया कि बीते दो दिनों में स्टील बजार में सौ रुपये प्रति मैट्रिक टन का इजाफा हो गया है। 14 मार्च को बिलेट और इंगोट 44,100 प्रति मैट्रिक टन थी जो 16 मार्च को बढ़कर 44,200 रुपये प्रति मैट्रिक टन हो गई। इसी तरह स्क्रैप और ब्रांडेंड छड़ की कीमत में भी प्रतिदिन एक-दो रुपये किलो का बदलाव हो रहा है।
सूखे मेवे और मसाले की कीमत में उछाल
सूखे मेवे और मसालों के दाम में तेजी आ गई है। मारुफगंज मंडी में सूखा मेवा के कारोबारी मनोज गुप्ता बताते हैं कि विदेशों से आने वाले मसालों और सूखे मेवे में दौ से ढाई सौ रुपए प्रतिकिलो की तेजी आयी है। नमकीन पिस्ता, अंजीर, खजूर, सहजीरा के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि पैसा भुगतान करने के बाद भी माल की आपूर्ति समय से नहीं हो रही है।
समोसा 15 तो रसगुल्ला के दाम 20 रुपए हुए
गैस की किल्लत के कारण पटेलनगर, विजयनगर, राजाबाजार, कंकड़बाग सहित शहर के विभिन्न मोहल्लों में मिठाइयों और नाश्ता की कीमतों में इजाफा हुआ है। 15 से 17 रुपये प्रति पीस बिकने वाला रसगुल्ले की कीमत 20 रुपये हो गयी है। वहीं, 17 रुपए में मिलनेवाला गुलाबजामुन 20 रुपये प्रति पीस हो गया है। 10 से 12 रुपये में बिकने वाला समोसा 15 रुपये प्रति पीस बिक रहा है। दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण मिठाई बनाने की लागत में इजाफा हुआ है।
ग्लिसरीन के बाद साबुन महंगा होने की आशंका
साबुन, क्रीम आदि में उपयोग होने वाला ग्लिसरीन में सौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। नब्बे रुपए प्रति लीटर मिलने वाला ग्लिसरीन की कीमत बढ़कर 180 रुपए प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोलियम जेली, फिनाइल तेल, बोरिक पाउडर समेत कई केमिकल की आपूर्ति नहीं होने से इनकी मौजूदा कीमत में 20 से 25 प्रतिशत तक की तेजी आयी है। कारोबारियों का कहना है कि कई केमिकल का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। ऐसे में दवा समेत कई उद्योग प्रभावित होंगे।
रेस्टोरेंट-होटल पर असर मेन्यू में 70% तक कटौती
पटना में रसोई गैस की किल्लत का असर रेस्टोरेंट और होटलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट संचालकों को अपने मेन्यू में भारी कटौती करनी पड़ रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कई जगहों पर मेन्यू में लिखे लगभग 70 प्रतिशत व्यंजन फिलहाल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। केवल सीमित संख्या में ही खाना परोसा जा रहा है।
गांधी मैदान स्थित राज रसोई के जीएम भास्कर रॉय ने बताया कि गैस सिलिंडर की कमी के कारण रेस्टोरेंट संचालन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट के मेन्यू में कई प्रकार के व्यंजन दर्ज हैं। लेकिन गैस की उपलब्धता नहीं होने के कारण फिलहाल सभी व्यंजन तैयार कर पाना संभव नहीं है। इसी वजह से मेन्यू में कटौती करनी पड़ी है।
एनआईटी मोड़ स्थित इंडियन फूड कोर्ट रेस्टोरेंट के संचालक भरत भूषण ने बताया कि गैस सिलिंडर की कमी के कारण वेंडर मनमाने दाम मांग रहे हैं। सामान्य कीमत से कहीं अधिक पैसे देने की मांग की जा रही है। इससे रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए रेस्टोरेंट में कई कोयले के चूल्हे लगाए गए हैं और अब अधिकतर व्यंजन उसी पर तैयार किए जा रहे।
भरत भूषण ने बताया कि उनके रेस्टोरेंट के आसपास लॉज और हॉस्टलों की संख्या अधिक है जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई छात्रों को भी अपने कमरे में खाना बनाने में परेशानी हो रही है। ऐसे में छात्रों की समस्या को देखते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि उन्होंने कम खर्च में खाना मिल सके। शहर के आधे से अधिक रेस्टोरेंटों में अब कोयले के चूल्हे का सहारा लिया जा रहा है। वहीं कई जगहों पर पारंपरिक तरीके से खाना पकाया जा रहा है।




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