बिहार में अब गन्ने से घरेलू गैस और CNG का उत्पादन, यहां पहली फैक्ट्री का प्लान
इसका प्रयोग प्रारंभिक तौर पर तो सफल रहा। अब आपूर्ति का मॉडल कामयाब रहा तो भविष्य में बिहार घरेलू गैस की जरूरत के बड़े हिस्से का उत्पादन खुद करने लगेगा। यही नहीं बाहरी स्रोत पर उसकी निर्भरता भी खत्म होगी।

अब बिहार में गन्ने से घरेलू गैस का भी उत्पादन होगा। वह भी ईख के रस के शेष बचे कचरे से। यही नहीं इससे सीएनजी का उत्पादन भी होगा। नयी तकनीक से जहां घरों को गैस मिलेगी, वहीं वाहनों के लिए ईंधन की उपलब्धता सहज हो सकेगी। बेतिया से इसकी शुरुआत हो रही है। भविष्य में इसका विस्तार अन्य जिलों में भी किया जाएगा।
इसका प्रयोग प्रारंभिक तौर पर तो सफल रहा। अब आपूर्ति का मॉडल कामयाब रहा तो भविष्य में बिहार घरेलू गैस की जरूरत के बड़े हिस्से का उत्पादन खुद करने लगेगा। यही नहीं बाहरी स्रोत पर उसकी निर्भरता भी खत्म होगी। गन्ना उद्योग विभाग खुद इस योजना की निगरानी कर रहा है।
इस समय भारत पेट्रोलियम की ओर से बेतिया में एक हजार घरों में पाइपलाइन से गैस आपूर्ति का इन्फ्रास्ट्रक्टर तैयार किया गया है। भविष्य में इसे और विस्तारित किया जाएगा। योजना को मूर्त रूप वर्द्धन सीबीजी की ओर से दिया जा रहा है। उसने 6 हजार किलो प्रतिदिन क्षमता का प्लांट लगाया है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 20 हजार किलो प्रतिदिन किया जाएगा। इसके लिए गेल और भारत पेट्रोलियम के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया गया है।
वर्द्धन सीबीजी के अमित सिंह बताते हैं कि उनका उत्पाद गेल लेगा और वहां से भारत पेट्रोलियम। इस समय लगभग 12 हजार घरों में गैस की आपूर्ति होगी, भविष्य में हमारे प्रोजेक्ट से 30-32 हजार घरों को गैस उपलब्ध हो सकेगी। उनके प्लांट से पहले चरण में बेतिया, मोतिहारी के घरों में गैस की आपूर्ति होगी, भविष्य में गोपालगंज और पश्चिमी व पूर्वी चंपारण के भी सभी घरों तक गन्ने से तैयार घरेलू गैस की आपूर्ति होगी। इसके अलावा छह पेट्रोल पंप को सीएनजी की भी आपूर्ति की जाएगी।
बिहार में यह पहला प्लांट होगा
इस समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 12 जिलों में जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के पांच जिले में ईख से घरेलू गैस का उत्पादन हो रहा है। वहां 16 प्लांट काम कर रहे हैं और सफलतापूर्वक घरेलू गैस का उत्पादन कर रहे हैं। बिहार में पहली बार ऐसा प्लांट लगाया गया है। भविष्य में इसका विस्तार होगा।
लौरिया और सुगौली चीनी मिल में भी लगेगा प्लांट
इस तरह का प्लांट शीघ्र ही लौरिया और सुगौली चीनी मिल में भी लगेगा। गन्ना उद्योग विभाग ने इसके लिए एनओसी दिया है। वहां एचपीसीएल इस प्लांट को लगाएगा। वहां भी गन्ना रस के बचे कचरे से घरेलू गैस का उत्पादन किया जाएगा। ईखायुक्त अनिल कुमार झा के अनुसार भविष्य में अन्य चीनी मिलों से भी घरेलू गैस व सीएनजी का उत्पादन की योजना पर काम होगा। इस तकनीक से भविष्य में ईंधन की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकेगी।
बिहार में 25 नयी चीनी मिल खोलने की योजना है। इसके अलावा बंद पड़ी 9 पुरानी चीनी मिलों को भी खोलने की योजना पर काम हो रहा है। ये लगभग हर जिले को कवर करेंगी। इनमें गन्ने रस के अवशेष से गैस उत्पादन की योजना पर काम हो सकता है। इससे व्यापक पैमाने पर घरेलू गैस व ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इससे जिला स्तर पर घरेलू गैस की मांग के बड़े हिस्से की पूर्ति हो सकती है।




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