बिहार में बुलडोजर राज, नीतीश का मॉडल पलट गया; सम्राट पर निशाना साध दीपांकर भट्टाचार्य ने किया आंदोलन का ऐलान
पटना में दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और दमन के खिलाफ 24 मई को छात्र-युवा सड़कों पर उतरेंगे। भाकपा माले कॉरपोरेट भूमि अधिग्रहण और दमनकारी शासन के खिलाफ संघर्ष तेज करेगी।

भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि बिहार में अब बुलडोजर राज चल रहा है। मौजूदा सम्राट चौधरी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मॉडल को उलट दिया है। पटना में दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने न केवल नीतीश कुमार को सत्ता से हटाया बल्कि पूरे राजनीतिक विमर्श और शासन मॉडल को ही उलट दिया है। दमनकारी कार्रवाइयों को अपनाया जा रहा है। दीपंकर भट्टाचार्य शनिवार को आईएमए हाल सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और दमन के खिलाफ 24 मई को छात्र-युवा सड़कों पर उतरेंगे। भाकपा माले कॉरपोरेट भूमि अधिग्रहण और दमनकारी शासन के खिलाफ संघर्ष तेज करेगी। उन्होंने कहा कि आज देश के छात्र-युवा व खासकर जेन जी गहरे आक्रोश में है। यह आक्रोश कॉकरोच जनता पार्टी के रूप में सोशल मीडिया पर दिख रहा है। 16 से 18 मई तक दरभंगा में संपन्न भाकपा-माले के 12 वें राज्य सम्मेलन ने एक बार फिर कुणाल को राज्य सचिव चुना गया। साथ ही 107 सदस्यीय नई राज्य कमेटी का गठन किया गया। इनमें 27 नए चेहरे शामिल किए गए हैं ।
बिहार पुलिस द्वारा हाल के दिनों में अपराधियों के हाफ एनकाउंटर पर भी दीपांकर भट्टाचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिना किसी पारदर्शी जांच के पिछले चार दिनों में पांच लोगों को गोली मार दी गई। पुलिस खुलेआम कह रही है कि गोली पैर में नहीं बल्कि छाती में मारी जाएगी। नीट पेपर लीक पर भी दीपांकर ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नीट जैसी परीक्षाओ में पेपर लीक होना प्रशासन की विफलता ही नहीं बल्कि संगठित अपराध तंत्र और राजनीतिक संरक्षण का परिणाम है।
बुलडोजर मशीन नहीं अब भाजपा शासन की राजनीतिक पहचान - दीपांकर
इससे पहले शुक्रवार को समस्तीपुर में भी दीपांकर भट्टाचार्य ने सम्राट चौधरी सरकार को निशाने पर लिया था। दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा था कि आज देश में बुलडोजर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि भाजपा शासन की राजनीतिक पहचान और दमन का प्रतीक बन चुका है। इस दिन भाकपा माले की ओर से कर्पूरी सभागार में बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज विषय पर आयोजित सेमिनार को वो संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वरिष्ठ वाम नेता रामदेव वर्मा को याद करते हुए कहा था कि वे बीच के पांच वर्षों को छोड़कर 1980 से 2010 तक विधायक रहे। हर दौर में गरीबों, दलितों, वंचितों और मेहनतकश जनता की आवाज बनकर संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े राजनीतिक बदलावों के बावजूद रामदेव वर्मा ने कभी जनता का साथ नहीं छोड़ा और आज उनके संघर्षों की विरासत बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई को दिशा दे रही है।




साइन इन