crisis on uniforms books bicycles for 64 lakh school children in Bihar Apaar cards not made बिहार में 64 लाख स्कूली बच्चों के पोषाक, पुस्तक, साइकिल पर संकट, क्यों नहीं बने अपार कार्ड?, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में 64 लाख स्कूली बच्चों के पोषाक, पुस्तक, साइकिल पर संकट, क्यों नहीं बने अपार कार्ड?

अपार आईडी नहीं बनने से छात्र-छात्राओं को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी होगी। स्कूलों के 17 लाख ऐसे बच्चे हैं, जिनका आधार कार्ड सत्यापित होने के बाद भी अपार कार्ड नहीं बन सके हैं। शिक्षा विभाग लगातार जिलों के अधिकारियों को सभी बच्चों के आधार और अपार कार्ड बनवाने की हिदायत दे रहा है।

Fri, 13 March 2026 05:30 AMSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में 64 लाख स्कूली बच्चों के पोषाक, पुस्तक, साइकिल पर संकट, क्यों नहीं बने अपार कार्ड?

Bihar Education News: शिक्षा विभाग के लगातार निर्देश के बाद भी राज्य के सभी स्कूली बच्चों का अपार कार्ड (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक एकाउंट रजिस्ट्री) नहीं बन सका है। राज्य में सभी जिलों के सरकारी और निजी स्कूलों के 2 करोड़ 6 लाख 25 हजार 297 छात्र-छात्राओं का अपार कार्ड बनाना है। 10 मार्च तक इनमें एक करोड़ 42 लाख 16 हजार 873 छात्र-छात्राओं के ही अपार आईडी बने हैं। यानी 64 लाख 8 हजार 424 बच्चों के अपार कार्ड बनाना बाकी हैं। अपार आईडी नहीं बनने से छात्र-छात्राओं को योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी होगी। स्कूलों के 17 लाख ऐसे बच्चे हैं, जिनका आधार कार्ड सत्यापित होने के बाद भी अपार कार्ड नहीं बन सके हैं। शिक्षा विभाग लगातार जिलों के अधिकारियों को सभी बच्चों के आधार और अपार कार्ड बनवाने की हिदायत दे रहा है। इसके बाद भी अपार बनाने की गति बहुत धीमी है। सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में अपार बनने की स्थिति और अधिक खराब है। सरकारी स्कूलों के 1.65 करोड़ बच्चों में 1.26 करोड़ बच्चों के ही अपार कार्ड बने हैं। यानी लगभग 24 फीसदी अपार कार्ड नहीं बने हैं।

निजी स्कूलों के 35 लाख 49 हजार छात्र-छात्र-छात्राओं में 13 लाख 58 हजार के अपार कार्ड बने हैं। यानी निजी स्कूलों में नामांकित कुल बच्चों में 68 फीसदी बच्चों के ही अपार कार्ड नहीं बने हैं।

अपार भारत सरकार द्वारा शुरू की गई छात्रों के लिए 12 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान है। इसके वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी के नाम से भी जाना जाता है। यह आधार कार्ड से जुड़ा होता है। यह डिजिटल आईडी छात्रों के प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक के एकेडमिक रिकार्ड, मार्कशीट, सर्टिफिकेट और क्रेडिट स्कोर को सुरक्षित रखता है।

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10 फिसड्डी जिले

पटना 56.50%

पूर्वी चंपारण 56.62%

भोजपुर 60.92%

नवादा 61.18%

लखीसराय 61.85%

गया 61.99%

सीवान 62.83%

बक्सर 63.80%

सारण 64.74%

गोपालगंज 65.31 %

जहानाबाद 65.39%

टॉप 10 जिले

मुजफ्फरपुर 82.18 %

शेखपुरा 82.10 %

भागलपुर 80.86%

शिवहर 78.50%

वैशाली 77.91%

पूर्णिया 76.49%

दरभंगा 76.22%

मुंगेर 74.72%

कटिहार 73.99%

सुपौल 72.70%

अपार नहीं बनने के ये हैं कारण

अपार नहीं करने का मुख्य कारण है कि सभी बच्चों का आधार नहीं बना है। आधार भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा जारी अंक है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। आधार बनने के बाद ही अपार बनता है। आधार बने होने के बाद भी इसमें किसी प्रकार की गलती है, तो भी अपार नहीं बनेगा। अपार नहीं बनने के पीछे बच्चों के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन द्वारा आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराना भी है।

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अपार आईडी का उपयोग और विशेषता

● डिजिटल रिकार्ड के रूप में छात्रों के सभी शैक्षणिक दस्तावेज (मार्कशीट, डिग्री) एक जगह रहेंगे

● एक स्कूल या कॉलेज से दूसरे स्कूल या कॉलेज में नामांकन लेने पर दस्तावेज ट्रांसफर आसान

● छात्रों के शिक्षा क्रेडिट स्कोर को ट्रैक करना आसान, छात्र-छात्राओं के दस्तावेज जांच में आसानी

● नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते समय फिजिक रूप से दस्तावेज ले जाने की जरूरत नहीं

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