LPG संकट में चमकने लगा कोयला, दाम उछलकर 850 रुपये पहुंचे; बिहार में झारखंड से तस्करी
एलपीजी संकट के बीच कोयले की मांग और तस्करी बढ़ गई है। झारखंड में बड़ी मात्रा में अवैध कोयला बिहार लाया जाने लगा है। खुले बाजार में भी कोयले की कीमत में 35 प्रतिशत तक का उछाल आ गया है। होटल और रेस्टोरेंट में कोयले की भट्टी पर खाना बनने लगा है।

ईरान-इजरायल एवं अमेरिका के बीच युद्ध और खाड़ी संकट के चलते भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासकर कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से होटल और रेस्टोरेंट में कोयला और लकड़ी की भट्टियां चलने लगी हैं। एलपीजी संकट में कोयले की मांग तेज हो गई है, जिससे इसकी कीमत में भी एक दम से उछाल आ गया है। साथ ही बिहार में झारखंड से कोयला की तस्करी भी होने लग गई है।
झारखंड से बिहार में बड़े पैमाने पर बिना वैध कागजात के कोयला मंगाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, गयाजी जिले में अवैध रूप से इन दिनों बड़ी मात्रा में कोयला लाया जा रहा है। तस्कर रात के अंधेरे में अलग-अलग मार्गों का उपयोग कर पुलिस जांच से बचने की कोशिश करते हैं और झारखंड से बिहार की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं।
35 प्रतिशत महंगा हो गया कोयला
कुछ दिन पहले तक साधारण कोयला 600 रुपये प्रति मन (40 किलोग्राम) मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 800 से 850 रुपये प्रति मन तक पहुंच गई है। खुले बाजार में पांच किलो कोयला 110 रुपये तक बिक रहा है। मांग बढ़ने के साथ ही अवैध कारोबारियों ने इसका फायदा उठाते हुए तस्करी तेज कर दी है।
गयाजी जिले की पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए बीते चार दिनों में अवैध कोयला लदे 10 ट्रकों को जब्त किया है। 26 मार्च को बाराचट्टी और बोधगया क्षेत्र से करीब 2.84 लाख किलो कोयला बरामद किया गया। एसएसपी सुशील कुमार ने बताया कि अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस धंधे में शामिल गिरोह की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महंगे दाम पर कोयला और लकड़ी खरीदने पर मजबूर लोग
गयाजी जिले के गुरुआ प्रखंड क्षेत्र में गैस सिलेंडर की कमी के कारण इन दिनों कोयला और लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ गई है। मजबूरी में लोग पारंपरिक ईंधनों की ओर लौट रहे हैं, जिसका फायदा अवैध सप्लायर उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, गुरुआ बाजार और आसपास के गांवों में चोरी का कोयला एवं लकड़ी ऊंचे दामों पर बेची जा रही है।
जरूरत के चलते लोग महंगे दाम पर भी इसे खरीदने को मजबूर हैं। यह ईंधन घरों के साथ-साथ दुकानों और छोटे होटलों में भी धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों ने इस पर कार्रवाई की मांग की है।




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