पहले रूडी का छपरा, फिर ललन का मुंगेर, तब मांझी का गया; चिराग पासवान की चाल तेज है
बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का संकेत दे चुके चिराग पासवान लगातार रैलियां कर अपने सहयोगियों की बेचैनी बढ़ा रहे हैं। नीतीश के गढ़ नालंदा के बाद उनकी राजीव प्रताप रूडी के छपरा में इस रविवार को सभा है। इसके बाद वे ललन सिंह के मुंगेर और जीतनराम मांझी के गया में रैली करेंगे।

केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा (रामविलास) पार्टी के मुखिया चिराग पासवान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक चाल तेज कर दी है। अपने सहयोगी दलों के नेताओं के क्षेत्र में चिराग लगातार दौरे कर रहे हैं। इस वीकेंड यानी रविवार 6 जुलाई को उनकी छपरा में रैली है। यह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के प्रभाव वाला इलाका है। इसके बाद चिराग की जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के मुंगेर और फिर जीतनराम मांझी के गयाजी में रैली होगी।
चिराग पासवान की लगातार हो रही जनसभाओं की सियासी गलियारों में खासी चर्चा है। इसकी शुरुआत 8 जून को आरा से हुई थी। इसके बाद उन्होंने 29 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के राजगीर में दलित वर्ग को साधते हुए बहुजन भीम समागम किया था। अब 6 जुलाई को उनकी छपरा के राजेंद्र स्टेडियम में रैली है। लोजपा-आर ने इसे नव संकल्प महासभा नाम दिया है।
चिराग पासवान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि छपरा के बाद उनकी मुंगेर और गया में रैली होगी। हालांकि, इनकी तारीखें अभी घोषित नहीं की गई हैं। सूत्रों के अनुसार ये सभाएं इसी महीने होने की संभावना है। मुंगेर में दो दिन पहले चिराग पासवान के 19 जुलाई को संभावित कार्यक्रम को लेकर पार्टी के स्थानीय नेताओं की बैठक भी हुई थी। मुंगेर से जेडीयू के वरीय नेता ललन सिंह सांसद हैं।
इसके बाद चिराग की गयाजी में रैली होनी है। केंद्रीय मंत्री एवं हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के सुप्रीमो जीतनराम मांझी यहां से सांसद हैं। गया जिले की 3 विधानसभा सीटों इमामगंज, बाराचट्टी और टिकारी में हम का कब्जा है। एनडीए के बड़े नेताओं के क्षेत्र में चिराग की रैलियों से गठबंधन में बेचैनी देखी जा सकती है।
चिराग और मांझी के बीच खींचतान
चिराग पासवान की लोजपा-आर और जीतनराम मांझी की हम, दोनों ही एनडीए के घटक दल हैं। ये दोनों ही पार्टियां दलितों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीति करती हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय से मांझी और चिराग के बीच आपसी खींचतान साफ झलक रहा है। इनकी बयानबाजी से चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। हाल ही में चिराग ने इस मनमुटाव को खत्म करने की पहल करते हुए कहा कि मांझी से उनके पिता समान हैं और उनकी सभी बातें आशीर्वाद की तरह लगती हैं।




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