शहरी अस्पतालों में बोरिंग और आरओ प्लांट से पानी की आपूर्ति पर गांवों में दिक्कत
-शहरी अस्पतालों के मरीजों और परिजनों को नहीं खरीदना पड़ता है बोतलबंद पानी, जिले के सरकारी अस्पतालों में पहले की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुसार सुविधा देने का भी...

-शहरी अस्पतालों के मरीजों और परिजनों को नहीं खरीदना पड़ता है बोतलबंद पानी -आरा सदर अस्पताल में 24 नलों के कनेक्शन वाला वाटर प्यूरिफाई प्लांट लगाया गया आरा/कोईलवर/पीरो/बिहिया, हिटी। जिले के सरकारी अस्पतालों में पहले की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुसार सुविधा देने का भी प्रयास किया जा रहा है ताकि मरीज और उनके परिजनों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो। सदर अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए 24 नल के लिए वाटर प्यूरिफाई प्लांट लगाया गया है, जो चालू स्थिति में है। इसमें से 12 नल मातृ-शिशु अस्पताल और 12 मॉडल अस्पताल में लगाये गये हैं।
पहले सिर्फ आठ नल वाला प्लांट लगाया गया था। इससे मरीजों को परेशानी होती थी। मरीजों और उनके परिजनों की संख्या बढ़ने के बाद नलों की संख्या भी बढ़ायी गयी है। प्लांट लग जाने से मरीजों और उनके परिजनों को शुद्ध व ठंडा पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। वहीं कोईलवर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा चांदी व बिंदगांवा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पीने का पानी उपलब्ध है। अस्पताल परिसर में लगे बोरिंग से मरीजों और उनके परिजनों के लिए पेयजल की व्यवस्था कराई गई है। हालांकि कई ग्रामीण अस्पतालों में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है। गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों पर चापाकल नहीं या खराब पड़े हालांकि गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों पर चापाकल नहीं हैं या खराब पड़े हैं। लोगों की मानें तो गांवों के केंद्र कम ही खुलते हैं। इसलिए वहां मरीजों को पानी की जरूरत आम तौर पर नहीं होती है। स्थानीय लोगों की मानें तो पांच वर्ष पूर्व तक सरकारी संस्थानों व सुदूर गांवों में लगे चापाकल से ताजा और ठंडा पानी निकलता था, जो पानी की जरूरत पूरा करता था। अब जलस्तर नीचे चले जाने से बोरिंग का पानी एकमात्र सहारा है, जो टंकी में जाकर गर्म हो जाता है और क्षुधा तृप्त नहीं कर पाता। पीरो के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़ा सा वाटर कूलर है और मरीजों को पीने के पानी की दिक्कत नहीं है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रवि कुमार ने बताया कि सबमर्सिबल से पानी वाटर कूलर में जाता है और मरीजों के साथ साथ उनके परिजनों को पानी पीने की आजादी है। बिहिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पानी का संकट नहीं है। अस्पताल के मुख्य वार्डों और वेटिंग एरिया में दो बड़े आरओ प्लांट लगाये गये हैं। अस्पताल के बाहरी हिस्से और ओपीडी की ओर जाने वाले रास्तों पर तीन अलग-अलग जगहों पर नल लगाये गये हैं, ताकि भीड़ बढ़ने पर भी कहीं कतार न लगे। अस्पताल में इलाज के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का होना मरीज के आधे तनाव को कम कर देता है। गर्मी में पानी सबसे बड़ी जरूरत है, जिसे हमने प्राथमिकता पर रखा है। अस्पताल में रोजाना 200 मरीजों का लोड होने के बावजूद पानी की किल्लत नहीं होना बेहतर प्रबंधन का प्रमाण है।
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