पवन सिंह की राज्यसभा में एंट्री फाइनल? BJP अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद क्या बोले
पवन सिंह ने मीडिय से पहले कहा, 'मैंने सिर्फ भइया से आशीर्वाद ली है। शिष्टाचार मुलाकात हुई है, बहुत अच्छा लगा है।' इसके बाद जब पवन सिंह से पूछा गया कि आपकी राज्यसभा सीट को लेकर भी कुछ चर्चा चल रही है, तब इसपर अभिनेता ने कहा, 'पार्टी का सिपाही हूं, जो मालिक चाहेंगे वहीं ना होगा।'

तो क्या भोजपुरी फिल्मों के पावर स्टार पवन सिंह की राज्यसभा में एँट्री फाइनल हो गई है? राज्यसभा चुनाव से पहले इस सवाल को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच अब पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात ने उनके राज्यसभा में जाने की चर्चा को और बल दिया है। गुरुवार को भोजपुरी फिल्मों के ऐक्टर और सिंगर पवन सिंह ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से अहम मुलाकात की है।
इस मुलाकात के बाद जब पवन सिंह ने मीडिय से पहले कहा, 'मैंने सिर्फ भइया से आशीर्वाद ली है। शिष्टाचार मुलाकात हुई है, बहुत अच्छा लगा है।' इसके बाद जब पवन सिंह से पूछा गया कि आपकी राज्यसभा सीट को लेकर भी कुछ चर्चा चल रही है, तब इसपर अभिनेता ने कहा, ‘पार्टी का सिपाही हूं, जो मालिक चाहेंगे वहीं ना होगा।’
दरअसल बिहार से राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव होने हैं। पवन सिंह को लेकर काफी पहले से कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी उन्हें इस चुनावी दंगल में उतारकर राज्यसभा सांसद बना सकती है। यहां आपको बता दें कि अभिनेता ने साल 2024 में लोकसभा का चुनाव भी काराकाट से निर्दलीय लड़ा था। उस वक्त पवन सिंह ने पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से बीजेपी के टिकट को भी लौटा दिया था। हालांकि वो चुनाव हार गए थे।
लेकिन उस चुनावी रणभूमि में उतरकर उन्होंने रालोमो सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा को बड़ा झटका देते हुए तीसरे नंबर पर भी पहुंचा दिया था। इसके बाद पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह के बीच दूरियां घट गई थीं। उस वक्त बिहार बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े ने यह भी कहा था कि पवन सिंह बीजेपी में थे और बीजेपी में ही रहेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह ने अमित शाह और उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी और कहा जा रहा था कि वो आरा सीट से विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं। हालांकि पवन सिंह ने चुनाव नहीं लड़ा था लेकिन बीजेपी के लिए जमकर चुनाव प्रचार जरूर किया था।
बता दें कि बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर 26 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई है और यह 5 मार्च तक चलेगी। नौ फरवरी को अमरेंद्र धारी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर और प्रेमचंद गुप्ता का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है। माना जा रहा है कि 16 मार्च को होने वाले इस चुनाव में एनडीए चार सीटें तो आसानी से जीत सकता है जबकि पांचवीं सीट के लिए पक्ष-विपक्ष के बीच मुकाबला देखा जा सकता है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए बिहार में 41 विधायकों के वोट जरूरी हैं। एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं।
इस हिसाब से चार सीटों के लिए उसे 164 वोट चाहिए, शेष 38 वोट बचते हैं, जो पांचवीं सीट के लिए जरूरी 41 से तीन कम हैं। यही कारण है कि एनडीए की राह यहां मुश्किल हो सकती है।




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