BRABU में VC ने नियम को ताक पर रखा? रिश्तेदार को सलाहकार बनाने पर सीनेट में हंगामा,पत्र की मांग
BRABU के पूर्व प्रॉक्टर प्रो. विनय शंकर राय को नैक का सलाहकार बनाने का एमएलसी संजय सिंह और मनोज वत्स ने विरोध जताया। कहा कि वीसी बताएं कि किस नियम के तहत उन्हें सलाहकार बनाया गया है और सीनेट में बैठाया गया है।

BRABU News: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी(BRABU) में सीनेट की बैठक हंगामेदार रही। कालेजों की संबद्धता में मानकों को ताक पर रखना, सदन की कार्यवाही में मीडिया के प्रवेश पर रोक और रिटायर प्रोफेसर को विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण कमेटी में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने जैसे मुद्दों पर सीनेटरों ने करीब 30 मिनट तक हंगामा किया। पूर्व प्रॉक्टर वीएस राय को नैक सलाहकार बनाए जाने पर सवाल उठाया गया। कुलपति डॉ दिनेश चंद्र राय से जवाब से सीनेटर संतुष्ट नहीं हुए। आरोप लगाया जा रहा है कि कुलपति ने रिश्तेदारी निभाने के लिए नियम-परिनियम को ताक पर रख दिया।
शनिवार को सेंट्रल लाइब्रेरी स्थित सीनेट हॉल में बीआरएबीयू सीनेट की मीटिंग हुई। बैठक काफी हंगामेदार रही। यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रॉक्टर प्रो. विनय शंकर राय को नैक का सलाहकार बनाने का एमएलसी संजय सिंह और मनोज वत्स ने विरोध जताया। कहा कि वीसी बताएं कि किस नियम के तहत उन्हें सलाहकार बनाया गया है और सीनेट में बैठाया गया है। इसपर कुलपति ने कहा कि राजभवन से बात कर ऐसा हुआ है। इसपर मनोज वत्स ने कहा कि कुलपति राजभवन का लिखित आदेश दिखाएं। सीनेटर मनोज वत्स ने कहा कि जब आदेश संबंधि पत्र दिखाने को कहा गया तो कोई जवाब नहीं दिया गया। सदन में उपस्थित कोई भी सदस्य विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय के साथ नहीं दिखा। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रॉक्टर वीएस राय कुलपति डॉ डीसी राय के रिश्तेदार हैं। रिश्तेदारी निभाने के लिए कुलपति ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया।
सीनेट की बैठक से मीडिया को दूर रखे जाने का मामला भी जोर शोर से उठा। बैठक की शुरुआत में ही जदयू विधायक पंकज मिश्रा, सीनेट सदस्य मनोज वत्स, केशरी नंदन शर्मा, विधान पार्षद प्रो. संजय सिंह, डॉ. भारत भूषण ने मीडिया के प्रवेश पर रोक और गुपचुप सीनेट की बैठक कराने पर आपत्ति जताई। इस मुद्दे पर भी काफी देर तक हंगामा होता रहा। मनोज वत्स ने कहा कि लोकतंत्र की जन्मभूमि और माता सीता की प्रकाट्य स्थली पर लोकतंत्र की हत्या कुलपति के आदेश पर कर दी गई। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार सीनेट की बैठक से मीडिया को दूर रखा गया।
बैठक में चार अधूरे कॉलेजों को संबद्धन देने पर जबर्दस्त हंगामा हुआ। विधान पार्षद प्रो. संजय कुमार सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने पूछा कि जब कॉलेज मानक को पूरा नहीं कर रहे हैं तो उन्हें संबद्धन कमेटी की बैठक में कैसे पास किया गया? सीनेट में पास कराने के लिए क्यों लाया गया? बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि जब कॉलेज मानक पूरे कर लेंगे तब उन्हें संबद्धता दी जायेगी। इसपर भी विधान पार्षद नहीं माने और कहा कि यह गलत है। इन कॉलेजों को संबद्धन से बाहर रखा जाये। दूसरे सदस्यों ने भी इसका विरोध किया। जिन अधूरे कॉलेजों को संबद्धन देने का प्रस्ताव रखा गया था, उनमें रंजीत कुमार प्रकाश डिग्री कॉलेज, अबुल कलाम डिग्री कॉलेज, एबीएम डिग्री कॉलेज और सिकराहना डिग्री कॉलेज शामिल हैं। विधान पार्षद ने बजट बढ़ाकर 19 करोड़ करने पर भी विरोध जताया।




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