Water Crisis in 36 Hospitals of District Amidst Extreme Heat जिले के 36 अस्पतालों में पेयजल की परेशानी, रोगी व परिजन भटक रहे इधर-उधर, Biharsharif Hindi News - Hindustan
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जिले के 36 अस्पतालों में पेयजल की परेशानी, रोगी व परिजन भटक रहे इधर-उधर

बिहारशरीफ के 36 अस्पतालों में भीषण गर्मी के कारण पानी की भारी कमी हो रही है। मरीज और उनके परिजन पानी के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि कई अस्पतालों में आरओ की व्यवस्था नहीं है। चापाकल भी सूख चुके हैं, जिससे लोगों को पानी खरीदने या दूर से लाने की मजबूरी हो रही है। प्रशासन को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

Fri, 24 April 2026 10:51 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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जिले के 36 अस्पतालों में पेयजल की परेशानी, रोगी व परिजन भटक रहे इधर-उधर

जिले के 36 अस्पतालों में पेयजल की परेशानी, रोगी व परिजन भटक रहे इधर-उधर कुछ अस्पतालों को छोड़ अन्य में नहीं है आरओ की व्यवस्था भीषण गर्मी के कारण जलस्तर गिरने से चापाकल भी दे रहे जवाब 370 ग्रामीण समेत 439 अस्पतालों में रोजाना चार से पांच हजार लोग पहुंचते हैं इलाज के लिए फोटो : सदर पानी : सदर अस्पताल परिसर में लगा पानी का नल। बिहारशरीफ, निज सवांददाता। भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। ऐसे में अस्पतालों में इलाज कराने आए लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। जिला के 36 ग्रामीण अस्पतालों में पानी की व्यवस्था नहीं है।

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वहां लगे नल या चापाकल खराब हो चुके हैं। इस कारण वहां इलाज कराने आए या टीका लेने आए लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सदर, राजगीर, हिलसा, कल्याणबिगहा, नूरसराय जैसे कुछ अस्पतालों को छोड़ अन्य में आरओ की व्यवस्था नहीं है। इस कारण वहां आए रोगियों को बोरिंग व जलमिनार का गर्म पानी पीकर प्यास बुझाना पड़ रहा है। वहीं अस्पतालों के आसपास के लगे चापाकल भी भीषण गर्मी के कारण जलस्तर गिरने से जवाब देने लगे हैं। जिला में 370 ग्रामीण समेत लगभग 439 अस्पतालों में रोजाना चार से पांच हजार लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। अकेले सदर अस्पताल में रोजाना 12 सौ तक रोगी व परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में कई अस्पतालों में जलसंकट रोगियों व परिजनों की परेशानियों को और बढ़ा रहा है। शहरों में लोगों को बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। सदर अस्पताल परिसर में इमरजेंसी व निबंधन काउंटर के पास रोगियों के लगा पानी का नल थोड़ा राहत दे रहा है। बोतलों में पानी लेकर चलना बनी हुई मजबूरी : गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर नीचे चला गया है। इससे कई चापाकल जवाब देने लगे हैं। कई अस्पतालों या उसके आसपास लगे हैंडपंप सूख चुके हैं या बेहद कम पानी दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों को पीने के पानी के लिए या तो बाहर दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। कई रोगी अपने साथ बोतलों में पानी लेकर चल रहे हैं। लेकिन, इलाज में अधिक देर होने पर एक बोतल पानी उनके लिए पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे में पानी के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। दवा आसानी से लेकिन पानी मुश्किल से उपलब्ध : रहुई अस्पताल में इलाज कराने आए रोगी के परिजन सुकेश कुमार ने बताया कि अस्पतालों में दवा आसानी से मिल जाती है। लेकिन, पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में नल से गर्म पानी आ रहा है। उससे प्यास नहीं बुझ सकती है। कम से कम अस्पतालों को रोगियों के लिए घड़ा या स्थानीय प्रशासन को अस्पताल के पास प्याऊ की व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि, कम से कम लोगों की प्यास बुझ सके। बेटे की इलाज कराने आयी महिला उमा देवी ने कहा कि छोटे बच्चों के साथ अस्पताल आना और बिना साफ पानी के रहना काफी मुश्किल हो रहा है। एक बोतल पानी खरीदकर लायी। एक बार में ही दोनों बच्चे पी गए। स्वास्थ्य व्यवस्था की इस कमी पर लोगों में नाराजगी भी दिखी। उनका कहना है कि अस्पतालों में दवा और डॉक्टर के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं भी होनी चाहिए। कम से कम हर बड़े अस्पताल में एक आरओ होना चाहिए। ताकि, रोगियों व परिजनों को पीने के लिए साफ पानी मिल सके। पेयजल स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकता में होनी चाहिए। गर्मी के इस दौर में अस्पतालों में पानी की कमी न सिर्फ असुविधा बढ़ा रही है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और जल्द से जल्द समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे। कहते हैं अधिकारी : सभी अस्पतालों से जलस्तर के साथ ही खराब चापाकलों की सूची मंगायी गयी है। रिपोर्ट आने के बाद जल्द से जल्द उसे ठीक करवाया जाएगा। सभी ग्रामीण अस्पतालों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाया जा रहा है। वहां पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था प्राथमिकता के तौर पर करायी जा रही है। अधिकतर अस्पतालों में पानी के लिए अपनी बोरिंग उपलब्ध है। (बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)

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