अपील और महंगाई के कारण पेट्रोल पंपों पर कम होने लगी वाहनों की संख्या
अपील और महंगाई के कारण पेट्रोल पंपों पर कम होने लगी वाहनों की संख्या अपील और महंगाई के कारण पेट्रोल पंपों पर कम होने लगी वाहनों की संख्या

अपील और महंगाई के कारण पेट्रोल पंपों पर कम होने लगी वाहनों की संख्या जंग की तपिश: 4 दिनों में सड़कों पर 5 से 8 फीसदी कम हुई वाहनों की संख्या बढ़ी कीमतों का चालकों पर दिखने लगा असर फोटो: पेट्रोल पंप: बिहारशरीफ बाइपास स्थित पेट्रोल पंप पर शुक्रवार को डीजल भरवाने के लिए खड़े वाहन। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील व कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए कदमों से प्रेरित होकर लोग पेट्रोलियम खपत को कम करने के लिए कई तरह के कदम उठाने लगे हैं। वहीं, डीजल, पेट्रोल और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) पर प्रति लीटर तीन रुपए कीमत बढ़ने का भी असर देखा जा रहा है। पीएम की ओर से ईंधन की बचत, अनावश्यक यात्रा से बचने और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील का असर अब नालंदा जिले में भी दिखाई देने लगा है। पिछले चार दिनों में बिहारशरीफ, हिलसा, राजगीर, हरनौत, अस्थावां, गिरियक समेत कई इलाकों में सड़कों पर वाहनों की संख्या में पांच से आठ फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर पेट्रोल पंपों पर भी दिख रहा है। यहां भी पहले की तुलना में वाहनों की भीड़ कम होने लगी है।
निजी वाहनों की आवाजाही हुई कम
बिहारशरीफ बाइपास स्थित पेट्रोल पंप के संचालक संजीव कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल लेने वाले वाहनों की संख्या में हल्की कमी महसूस की जा रही है। खासकर, निजी वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में कम हुई है। कई लोग अब जरूरी काम होने पर ही वाहन निकाल रहे हैं और छोटी दूरी के लिए सार्वजनिक वाहनों या साइकिल का उपयोग बढ़ा रहे हैं। आम तौर पर दिन में 10 से 11 बजे के बीच लगभग 200 वाहन पेट्रोल व डीजल भरवाने आते थे। यह सबसे पिकआवर होता था। अब इसी समय में 175 से 185 वाहन आ रहे हैं। अन्य पंपों पर भी कमोवेश यही स्थिति है।
लोगों में बढ़ी है जागरूकता
अरौत पेट्रोल पंप के गनमैन (तेल देने वाला कर्मी) दिनेश कुमार ने बताया कि ईंधन बचत को लेकर जागरूकता बढ़ी है। पहले लोग छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहन का इस्तेमाल करते थे। अब कई लोग एक साथ काम निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। राजगीर रोड स्थित पेट्रोल पंप संचालक अमित कुमार ने कहा कि ट्रैफिक का दबाव कुछ कम हुआ है। खासकर शाम के समय पेट्रोल पंपों पर लगने वाली लंबी कतारें अब पहले जैसी नहीं दिख रहीं।
सड़कों पर बाइकों की संख्या में भी गिरावट
बिहारशरीफ निवासी राहुल कुमार ने कहा कि अब वे बेवजह बाइक लेकर बाहर नहीं निकलते। जरूरत होने पर ही वाहन का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, हिलसा के कारोबारी मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने कर्मचारियों को ई-रिक्शा या सीएनजी टेंपो से यात्रा करने की सलाह दी है, ताकि ईंधन की बचत हो सके।
हो रहा दोहरा फायदा
परिवहन व पर्यावरण से जुड़े रोहित कुमार, राहुल कुमार व अन्य युवाओं का मानना है कि यदि इसी तरह जागरूकता बनी रही तो न सिर्फ ईंधन की खपत कम होगी, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण और ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। उनका मानना है बचाने की प्रवृति बहुत ही अच्छी आदत है। हमारी छोटी सी बचत ही बड़ी बचत की आधार बनेगी। इससे जहां एक ओर पैसे बचेंगे, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण भी संवरेगा।
एक बाइक पर दो कर्मी
हरनौत से बिहारशरीफ कार्यालय आने वाले रामसुरत कुमार सूरज बताते हैं कि कुछ कर्मी पहले अलग-अलग बाइक या वाहनों से आते थे। पीएम की अपील के बाद एक बाइक से दो लोग आ रहे हैं। इस तरह से सैकड़ों लोग पेट्रोलियम पदार्थों को बचाने में सहयोग कर रहे हैं।
कीमत बढ़ने से चालकों में नाराजगी
शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल में प्रति लीटर लगभग तीन रुपये तो सीएनजी में प्रति किलोग्राम दो रुपए की बढ़त हुई है। कीमत बढ़ने से कई वाहन चालकों ने इस पर नाराजगी जतायी। बाइक चालक विकास कुमार, सागर कुमार व अन्य ने कहा कि महंगाई की चक्की में पहले ही लोग पिस रहे हैं। कभी गैस की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है, तो कभी पेट्रोल-डीजल में। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार को सबसे पहले लाव लश्कर पर होने वाले खर्च को कम करना चाहिए। सिर्फ एक आदमी के लिए वाहनों पर लाखों रुपए खर्च करना आज के समय में कहीं से भी उचित नहीं है। पेट्रोलियम की दिक्कत नहीं, बचत एक अच्छी शुरुआत: हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के एरिया मैनेजर रोहित कुमार ने बताया कि अब भी भारत अपनी जरूरतों का लगभग 86 फीसदी पेट्रोलियम आयात करता है। इसमें हो रहे खर्च के तौर पर काफी भारी-भरकम राशि विदेशों में जा रही है। अगर लोग हर माह प्रति वाहन पांच से छह लीटर भी तेल बचा लें, तो बहुत बड़ी रकम होगी। दो बाइक से दो लोगों के जाने की बजाय एक बाइक से दो लोग जा सकते हैं। इससे भी काफी बचत होगी। इस तरह के प्रयास बचत की एक अच्छी शुरुआत है।
(बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)
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