इबोला : जिले के अस्पतालों में 34 वेंटिलेटरयुक्त बेड तैयार
इबोला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के संभावित खतरे को देखते हुए बिहार के अस्पतालों में 34 वेंटिलेटरयुक्त बेड तैयार किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की विशेष टीमों की तैनाती की है और आइसोलेशन व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। विदेशों से लौटने वालों पर निगरानी रखी जा रही है।

इबोला : जिले के अस्पतालों में 34 वेंटिलेटरयुक्त बेड तैयार पावापुरी में 30 और व राजगीर में 1 चालू, तो सदर में 2 और कल्याणबिगहा में 1 जल्द बेड होगा सुरक्षित डॉक्टरों की विशेष टीमों की हो रही तैनाती, निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर फोटो : सदर वेंटिलेटर : सदर अस्पताल में लगा वेंटिलेटर। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। इबोला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी से संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। मरीजों के इलाज और आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला के विभिन्न अस्पतालों में 34 वेंटिलेटरयुक्त बेड तैयार किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में विशेष निगरानी और संसाधनों की व्यवस्था तेज कर दी है। पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 30 वेंटिलेटरयुक्त बेड पहले से चल रहे हैं। वहीं राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में एक बेड चालू है। इसके अलावा सदर अस्पताल में दो तथा कल्याणबिगहा अस्पताल में एक वेंटिलेटरयुक्त बेड को एक जून तक शुरू किया जाएगा। अस्पतालों में ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं और अन्य उपकरणों की उपलब्धता की जा रही है। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम श्याम कुमार निर्मल ने बताया कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनों को भी दुरुस्त करने को कहा गया है। ताकि, आपात स्थिति में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करायी जा सके।
डॉक्टरों की विशेष टीमों की तैनाती
सदर अस्पताल के डीएस डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि इबोला जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव और इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी गंभीरता से तैयारी कर रहा है। इसके लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेष टीमों की तैनाती की जा रही है। मेडिकल स्टाफ को संक्रमण नियंत्रण, मरीजों की पहचान और आपातकालीन उपचार संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। एक जून से टीम विशेष वार्ड में काम करने लगेगी।
आइसोलेशन व्यवस्था को भी किया जा रहा मजबूत
राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गौरव कुमार ने कहा कि जिला के अस्पतालों में आइसोलेशन व्यवस्था मजबूत की जा रही है। संदिग्ध मरीजों की निगरानी के लिए विशेष प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भी सतर्क रहने, साफ-सफाई बनाए रखने और किसी भी तरह के गंभीर संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। वहीं सीएस डॉ. जयप्रकाश सिंह ने कहा स्वास्थ्य विभाग हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है।
पावापुरी में 24 आइसोलेटेड तो 6 रिजर्व वेंटिलेटर
बिहार में इबोला वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी एडवाइजरी के बाद सभी जिलों, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को सतर्क रहने तथा आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (बीमिम्स) पावापुरी ने भी इबोला संक्रमण से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. जकी अनवर जमां ने बताया कि इसके लिए 24 बेड का आइसोलेशन वार्ड और छह बेड का आईसीयू रिजर्व रखा गया है। कुल 30 बेड इबोला वायरस के संभावित मरीजों के लिए सुरक्षित हैं। सभी बेड वेंटिलेटर से लैस हैं।
विदेशों से लौट रहे लोगों पर रखी जा रही नजर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार को देखते हुए भारत में भी संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई है। ऐसे में खासकर इन देशों से लौटने वालों पर नजर रखी जा रही है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों को इबोला जैसे लक्षण वाले मरीजों की पहचान करने और प्रभावित देशों से लौटे लोगों की निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया है। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड, एम्बुलेंस, पीपीई किट, एन-95 मास्क और अन्य जरूरी चिकित्सी सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
क्या है इबोला
इबोला एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीना, लार, उल्टी, मूत्र या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है। संक्रमित जंगली जानवरों, विशेषकर चमगादड़ और बंदरों के संपर्क या उनके मांस के सेवन से भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। इसकी मृत्यु दर 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकती है। यह बीमारी मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों में अधिक पाई जाती है, लेकिन इसके खतरे को देखते हुए दुनिया भर में सतर्कता बरती जा रही है। इबोला के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, गले में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं। बीमारी बढ़ने पर शरीर के अंदर और बाहर रक्तस्राव भी हो सकता है। कुछ मरीजों में आंख, नाक और मसूड़ों से खून आने लगता है।
करें ये उपाय
इस बीमारी से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। मरीज के कपड़े, बिस्तर या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचना चाहिए। बार-बार साबुन से हाथ धोना, मास्क और दस्ताने का उपयोग करना तथा साफ-सफाई रखना जरूरी है। जंगली जानवरों के मांस के सेवन से भी बचें। यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज और सावधानी से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
(बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)
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