Bihar Weather: बिहार में अप्रैल से ही प्रचंड गर्मी, पारा 40 के पार; हीट आईलैंड बनने की आशंका
Bihar Weather: बिहार के ज्यादातर जिलों में लू चलने के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक होगी। इसका विशेष प्रभाव अप्रैल और मई महीने में दिखेगा। मार्च से मई तक प्रदेश के ज्यादातर शहरों का अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान से अधिक रहने की आशंका है।

Bihar Weather: बिहार में इस बार अप्रैल से ही प्रचंड गर्मी पड़ेगी। तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। अमूमन अप्रैल-मई का औसत तापमान 34 से 38 डिग्री रहता है लेकिन इस बार 40 डिग्री के पार रहेगा। मौसम विभाग ने जारी विशेष रिपोर्ट में कहा है कि इस साल पूर्वी एवं मध्य भारत में हीट वेव यानी लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। बिहार के ज्यादातर जिलों में लू चलने के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक होगी। इसका विशेष प्रभाव अप्रैल और मई महीने में दिखेगा। मार्च से मई तक प्रदेश के ज्यादातर शहरों का अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान से अधिक रहने की आशंका है।
सामान्य से अधिक तापमान का असर शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से रहेगा। यहां रात में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने से परेशानी बढ़ सकती है। शहरी क्षेत्रों में हीट आईलैंड का असर दिखने की चेतावनी जारी की गई है। तापमान का प्रभाव अधिक रहने से शहरी क्षेत्र के लोगों को अत्यधिक भीषण गर्मी झेलनी पड़ सकती है। उल्लेखनीय है कि शहरी क्षेत्र कंक्रीट व गगनचुंबी इमारतों के कारण आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी गर्म हो जाते हैं। इसे हीट आईलैंड कहते हैं।
मौसम विभाग ने इंतजाम का सुझाव दिया
मौसम विभाग की ओर से पूर्वानुमान को सरकार से साझा कर इस बाबत विशेष इंतजामों का अनुरोध किया है। हिट एक्शन प्लान को सक्रिय रूप से लागू करने, शीतल केंद्र की व्यवस्था सुनिश्चित करने, पर्याप्त पेयजल आपूर्ति एवं स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था रखने की अनुरोध किया है। अप्रैल और मई में आम लोगों से भीषण गर्मी के दौरान दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की अपील की गई है। पर्याप्त जल सेवन करने की सलाह दी गई है।
असर : बीमारियों का जोखिम बढ़ेगा
इस गर्मी से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। पेयजल आपूर्ति, विद्युत मांग और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। कृषि गतिविधियों एवं पशुधन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रशांत महासागर में कमजोर ला-नीना की स्थिति बनी हुई है। जो आगामी महीनों में तटस्थ अवस्था की ओर बढ़ सकती है। भारतीय महासागर द्विध्रुव के तटस्थ बने रहने की संभावना है। इन परिस्थितियों के कारण तापमान सामान्य से अधिक रहने की प्रबल आशंका है।




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