Bihar Voter List Revision SIR Supreme Court Hearing ECI opposition parties ADR वोटर लिस्ट रिवीजन में ‘No आधार’ पर चुनाव आयोग सही, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, Bihar Hindi News - Hindustan
More

वोटर लिस्ट रिवीजन में ‘No आधार’ पर चुनाव आयोग सही, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को बिहार में चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। विपक्ष ने एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दलीलें दी हैं। वहीं, शीर्ष अदालत ने आधार को दस्तावेज में शामिल नहीं किए जाने के चुनाव आयोग के तर्क को सही ठहराया है।

Tue, 12 Aug 2025 05:10 PMJayesh Jetawat लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
वोटर लिस्ट रिवीजन में ‘No आधार’ पर चुनाव आयोग सही, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

SIR Supreme Court Hearing Highlights: बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लंबी सुनवाई हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं पर दलीलें सुनीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और शादान फरासत ने अपने पक्ष रके। सिब्बल ने चुनाव आयोग के इस अभियान की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इस पर आयोग की ओर से कहा गया कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में थोड़ी खामियां रह जाती हैं, इसलिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावा-आपत्तियां मांगी गई हैं। वहीं, शीर्ष अदालत ने एसआईआर में आधार और राशन कार्ड को नहीं शामिल करने पर चुनाव आयोग के कदम को सही ठहराया है। इस मामले पर बुधवार को आगे सुनवाई जारी रहेगी।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एसआईआर के तहत बिहार में 65 लाख लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का आरोप लगाया। वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि एक छोटे से निर्वाचन क्षेत्र में 12 लोग ऐसे हैं जिन्हें मृत दिखाया गया है, लेकिन वे जीवित हैं। कुछ मृत लोगों के नाम लिस्ट मे हैं। BLO ने कोई काम नहीं किया है।

इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि अभी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई है। इस पर आपत्तियां और सुधार हेतु आवेदन मांगे गए हैं। इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ गलतियां होना स्वाभाविक है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:तेजस्वी के बाद बिहार के डिप्टी CM को 2 वोटर ID मामले में नोटिस, EC ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट का आयोग से सवाल

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के वकील से पूछा कि कितने लोगों की पहचान मृतक के रूप में हुई है। चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ न कुछ खामियां तो होंगी हीं।

नए वोटर के फॉर्म में आधार कार्ड मान्य, तो SIR में क्यों नहीं?

याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि नए वोटर को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरना होता है। उस फॉर्म में जन्म तारीख के लिए दस्तावेजी सबूत की सूची में आधार कार्ड को दूसरे नंबर पर रखा गया है। मगर वोटर लिस्ट रिवीजन (एसआईआर) में चुनाव आयोग आधार को स्वीकार नहीं कर रहा है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बिहार में SIR के बाद वोटर लिस्ट में कई मृतकों के नाम, बीएलओ भी घर पर नहीं आए

सिब्बल ने कहा अगर कोई व्यक्ति कहता है कि मैं भारत का नागरिक हूं तो इसे सिद्ध करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है। एक नागरिक सिर्फ जानकारी दे सकता है, जिसे किसी नागरिक के भारतीय होने पर संदेह है तो सरकार को ही यह साबित करना होगा।

'चुनाव आयोग के मांगे गए दस्तावेज सभी के पास नहीं'

लंच ब्रेक के बाद सुप्रीम कोर्ट में दोबारा शुरू हुई सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने वोटर लिस्ट रिवीजन की पूरी प्रक्रिया को कानून के विरूद्ध बताया। उन्होंने गणना फॉर्म का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। बिहार के लोगों के पास वो दस्तावेज नहीं हैं, जो आयोग ने रिवीजन के दौरान मांगे हैं।

इस पर जस्टिस कांत ने कहा कि बिहार भारत का ही हिस्सा है। अगर बिहार के लोगों के पास नहीं हैं, तो किसी दूसरे राज्य में भी नहीं होंगे। सिब्बल ने इस पर कहा कि अगर सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र की बात करें, तो सिर्फ 3.06 प्रतिशत लोगों के पास ही यह दस्तावेज है। इसी तरह सिर्फ 2.7 प्रतिशत के पास पासपोर्ट और 14.71 फीसदी के पास ही मैट्रिक का सर्टिफिकेट है। जिन लोगों के पास ये दस्तावेज नहीं हैं, उनके पास आधार और राशन कार्ड है। मगर आयोग उसे एसआईआर में ले नहीं रहा है।

आधार और राशन कार्ड पर चुनाव आयोग को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट रिवीजन में आधार और राशन कार्ड को शामिल नहीं किए जाने पर चुनाव आयोग के तर्क को सही ठहाराया। जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की दलील को सुनते हुए कहा कि आयोग का कहना सही है कि इन दस्तावेजों को निर्णायक (ठोस) सबूत के दौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

एसआईआर में पहले कभी फॉर्म और दस्तावेज नहीं मांगे गए- योगेंद्र यादव

एसआईआर मामले पर चुनावी विष्लेषक योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि साल बिहार में साल 2003 में विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं बल्कि गहन पुनरीक्षण (आईआर) हुआ था। हालांकि, इन दोनों में कोई खास फर्क नहीं है। मगर, इस देश के इतिहास में जितने भी वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (रिवीजन) हुए, उनमें कभी फॉर्म जमा करने को नहीं कहा गया। कभी भी मतदाताओं से दस्तावेज नहीं मांगे गए। 2003 में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण के दौरान चुनाव कर्मी घर-घर जाते थे और बिना किसी फॉर्म या दस्तावेज के सत्यापन करते थे। उन्होंने दलील दी कि गहन पुनरीक्षण एक अच्छी पल है। मगर विशेष गहन पुनरीक्षण में दो और चीजें जोड़ दी गईं- फॉर्म भरने की आवश्यकता और नागरिकता का अनुमान। ये अवैध है।

यादव ने वर्तमान में जारी एसआईआर पर चुनाव आयोग की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह भारत के इतिहास में पहली बार है, जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कोई नया मतदाता नहीं जोड़ा गया है। बल्कि 65 लाख मतदाताओं को हटाया गया है। जबकि पूर्व में हुए वोटर लिस्ट रिवीजन में नए वोटरों को भी जोड़ा गया था।

योगेंद्र यादव ने दावा किया कि चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया संशोधन के लिए नहीं बल्कि विलोपन के लिए थी। आयोग कह रहा है कि नए वोटर जोड़ने के लिए फॉर्म 6 भर सकते हैं। लेकिन, सवाल यह है कि जब बीएलओ या कोई चुनाव कर्मी मतदाताओं के घर एसआईआर के लिए आए तब उन्होंने विलोपन ही क्यों देखा। उस समय नए नाम क्यों नहीं जोड़े गए?

चुनाव आयोग बोला- हम शुद्धिकरण कर रहे, मदद करें

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने अदालत से कहा कि इस प्रक्रिया के तहत हम ‘शुद्धिकरण’ कर रहे हैं। इसे रोकने की कोशिश करने के बजाय हमारी मदद करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट बोला- सुधारात्मक उपाय जरूरी, कल फिर होगी सुनवाई

मंगलवार को सुनवाई के आखिर में शीर्ष अदालत ने कहा कि योगेंद्र यादव ने कई तथ्यात्मक मुद्दे उठाए हैं। आयोग ने इसका जवाब देने की बात कही है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ मुद्दों पर सुधारात्मक उपाय आवश्यक हैं। अगर चुनाव आयोग ने ये उपाय किए हैं तो अच्छी बात है। अगर नहीं हुए हैं, तो फिर हम उन्हें देखेंगे। इस मामले पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

(लाइव लॉ की रिपोर्ट के आधार पर)

लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।