बिहार का यह इलाका ब्राउन शुगर-हेरोइन का नया सेफ जोन, झारखंड के नशेबाज भी खरीद रहे
ब्राउन शुगर व हीरोइन का कारोबार तस्कर रेल और सड़क मार्ग दोनों से करते हैं। निजी वाहनों से कम ट्रेन व बसों से मादक पदार्थों के खेप को अधिक मंगाया जाता है। क्योंकि तस्करों का मानना है कि वह मादक पदार्थ को आसानी से ट्रेन में रख देते हैं।

बिहार में शराबबंदी के बाद सूखे नशे का उपयोग तेजी से बढ़ने लगा है। कल तक गांजा- भांग समेत अन्य मादक पदार्थों की बिक्री होती थी। किंतु अब डेहरी व सासाराम का शहरी क्षेत्र ब्राउन शुगर व हेरोइन कारोबार का सेफ जोन बनता जा रहा है। यहां पर बिहार ही नहीं झारखंड से हेरोइन व ब्राउन शुगर का सेवन करने वाले व तस्करी करने वाले मादक पदार्थों की खरीदारी करते हैं। समय-समय पर पुलिस को अलग-अलग माध्यमों से इसकी जानकारी भी मिलती है, किंतु अब तक कोई बड़ा तस्कर पुलिस के हाथ नहीं लग सका है।
बताया जाता है कि चार माह पूर्व रेल पुलिस के हत्थे चढ़े ब्राउन शुगर व हेरोइन तस्करों ने पुलिस को कई जानकारियां दी थी। किंतु जिला पुलिस की टीम ने रेल पुलिस से कोई अहम जानकारी नहीं ली।यही कारण है कि बड़े तस्करों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। यदि गिरफ्तार ब्राउन शुगर तस्कर के बयान की जानकारी जिला पुलिस की टीम आरपीएफ से लेती और उस पर कार्रवाई करती तो शायद नेटवर्क का पर्दाफाश होता और बड़े तस्कर की गिरफ्तारी होती। ऐसा रेल पुलिस का मानना है। पुलिस लगातार इन लोगों के विरूद्ध अभियान चला रही है।
छद्म नाम से जाने जाते हैं तस्कर
पिछले वर्ष रेल पुलिस द्वारा गिरफ्तार झारखंड के रांची निवासी रजनीश कुमार व आकाश सिंह ने पुलिस को चौंकाने वाले बयान दिये थे। बताया था कि सासाराम के छद्म नाम वाले इलियास मियां, फातिमा बीबी, शाहिद, पिंटू कुमार जैसे कई लोग हैं, जो मादक पदार्थ कारोबार का संगठित गिरोह चलाते हैं। शहर के बारह पत्थर, अंबेडकर चौक, मौनिया बिगहा, न्यू एरिया, स्टेशन रोड, डालमियानगर आदि स्थानों पर हेरोइन की गिरफ्त में आने वाले युवा पीढ़ी की संख्या बढ़ती जा रही है।
तस्कर रेल और सड़क मार्ग दोनों का करते हैं कारोबार के लिए इस्तेमाल
ब्राउन शुगर व हीरोइन का कारोबार तस्कर रेल और सड़क मार्ग दोनों से करते हैं। निजी वाहनों से कम ट्रेन व बसों से मादक पदार्थों के खेप को अधिक मंगाया जाता है। क्योंकि तस्करों का मानना है कि वह मादक पदार्थ को आसानी से ट्रेन में रख देते हैं। यदि ट्रेन में जांच के दौरान पुलिस पकड़ती भी है, तो वह यह नहीं बता पाते हैं कि मादक पदार्थ उनका है। ऐसी ही स्थिति बसों से मादक पदार्थों के लाने के दौरान तस्करों द्वारा किया जाता है।
हालांकि बस और ट्रेन से आने वाले मादक पदार्थों की कई बार बरामदगी व तस्करों की गिरफ्तारी भी की गई है। बताया जाता है कि मादक पदार्थों के तस्कर रांची से आने वाले तस्करों को अपने घर ले जाने की बजाय डेहरी रेलवे स्टेशन के समीप एक होटल के कमरे में बुलाकर ब्राउन शुगर व हेरोइन का पैसा लेते हैं। ऐसे में होटल के कमरा बुक कराने के लिए फर्जी आधार कार्ड दस्तावेज के देने के रूप में बात सामने आई है। ऐसे में देखना होगा कि पुलिस मादक पदार्थ कारोबारियों के किंग पिन तक पहुंचती है या इस पर चुप्पी साध लेती है।




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