bihar hospital drug theft racket busted medicines sold in bangladesh kingpin arrested goods worth 20 crore seized बिहार के सरकारी अस्पतालों से दवाएं चुराकर बांग्लादेश में बेचता था गैंग, सरगना गिरफ्तार; 20 करोड़ का माल जब्त, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार के सरकारी अस्पतालों से दवाएं चुराकर बांग्लादेश में बेचता था गैंग, सरगना गिरफ्तार; 20 करोड़ का माल जब्त

Bihar Crime News: पटना पुलिस ने सरकारी अस्पतालों से दवाएं चुराकर बांग्लादेश और पूर्वोत्तर राज्यों में बेचने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर 20 करोड़ की दवाएं बरामद की हैं।

Tue, 2 June 2026 12:14 PMJayendra Pandey हिन्दुस्तान, प्रधान संवाददाता, पटना
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बिहार के सरकारी अस्पतालों से दवाएं चुराकर बांग्लादेश में बेचता था गैंग, सरगना गिरफ्तार; 20 करोड़ का माल जब्त

Bihar Crime News: बिहार में सरकारी दवाओं की बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ये धंधेबाज पटना समेत कई जिलों के सरकारी अस्पतालों (PHC और CHC) से जीवनरक्षक और प्रतिबंधित दवाएं चुराकर उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा सीधे बांग्लादेश में ऊंचे दामों पर बेचते थे। इस पूरे नेटवर्क में करीब 20 से 25 लोग शामिल हैं। रविवार को वैशाली जिले के हाजीपुर से नशीली दवाओं के मुख्य सौदागर और गिरोह के सरगना नीरज कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने कई हैरान करने वाले सच आए हैं।

पहले दिल्ली से चलता था सिंडिकेट

गिरफ्तार सरगना नीरज कुमार ने पूछताछ में कबूला है कि पहले यह पूरा काला धंधा देश की राजधानी दिल्ली से चलता था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसने बिहार के हाजीपुर को ही अपना अड्डा बना लिया था। हाजीपुर से ही पटना और उसके आस-पास के कई जिलों में प्रतिबंधित कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और सांप काटने पर दी जाने वाली बेहद जरूरी एंटीवेनम दवा की अवैध तरीके से सप्लाई की जा रही थी। पटना के सिटी एसपी (पूर्वी) परिचय कुमार ने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश में सांप काटने की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं, जिसके कारण वहां एंटीवेनम और नशीले कफ सिरप की मांग सबसे अधिक है। यह गैंग पिछले चार-पांच सालों से इस धंधे में लगा था।

तीन स्तर पर काम करती थी चेन

सिटी एसपी परिचय कुमार के मुताबिक, इस नेटवर्क को चलाने के लिए धंधेबाजों ने तीन स्तर पर मजबूत चेन बना रखी थी। पहली चेन वहां सक्रिय थी जहां दवाएं बनती हैं। दूसरी चेन के तहत पटना में बैठकर यह खाका तैयार होता था कि प्रतिबंधित दवाओं को बाजार में कैसे खपाना है। वहीं तीसरी चेन के तहत दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीण इलाकों के गोदामों को चुना जाता था, जिसके लिए गोदाम मालिकों को मोटी रकम दी जाती थी। माल को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए जगदंबा, श्रीराम, अमर और जयमाता दी जैसी प्रमुख ट्रांसपोर्ट कंपनियों के साथ इनकी मिलीभगत थी। दवाओं को गोदाम से बाजार तक पहुंचाने के लिए गिरोह ने डेढ़ गुना किराया देकर कई ई-रिक्शा और ऑटो चालकों को भी अपने साथ जोड़ रखा था। पुलिस ने इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए अब तक पटना और आस-पास के इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की प्रतिबंधित दवाएं, नशीले इंजेक्शन और सरकारी एंटीवेनम बरामद किए हैं। इस मामले में नीरज से पहले सात अन्य धंधेबाज भी दबोचे जा चुके हैं।

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