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LPG Crisis: बिहार सरकार का हेल्पलाइन नंबर नहीं लग रहा, 1 करोड़ बच्चों के MDM पर भी संकट

LPG Crisis: जंग के बीच होर्मुज की खाड़ी से होते हुए गैस से भरे हुए दो टैंकर जल्द भारत आने वाले हैं। ऐसे में आपके जहन में सवाल होगा कि गैस कैसे भारत आती है और किस तरह यह आपके घर तक पहुंचती है। इसके प्रमुख तीन चरण हैं।

Sun, 15 March 2026 09:16 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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LPG Crisis: बिहार सरकार का हेल्पलाइन नंबर नहीं लग रहा, 1 करोड़ बच्चों के MDM पर भी संकट

राज्य सरकार की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबर से गैस नहीं मिलने की शिकायत राज्य मुख्यालय को भी मिलने लगी है। इसमें कई अस्पतालों में गैस किल्लत के अलावा जीविका दीदियों की रसोई को भी संकट से जूझना पड़ रहा है। कई लोगों की शिकायत है कि हेल्पलाइन नंबर काम ही नहीं कर रह है। उधर, लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने 100 शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों को निर्देश दिया है। उन्हें इन शिकायतों की विस्तृत जानकारी भेजी गयी है। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों की यह भी शिकायत थी कि राज्य सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर लग ही नहीं रहा था।

अस्पतालों में गैस संकट पर तत्काल कार्रवाई होगी

इस क्रम में राज्य सरकार की ओर से जीविका समेत कहीं भी गैस की किल्लत होने पर स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने का निर्देश दिया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि अस्पतालों में भी गैस संकट की स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लेने और तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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तय राशि से अधिक पैसे लेने की भी शिकायतें

उधर, शनिवार को भी राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतें आती रही। सबसे ज्यादा शिकायत गैस बुकिंग नहीं होने की आ रही है। इसी तरह लोगों की यह भी शिकायत थी कि मोबाइल पर गैस डिलीवरी की सूचना आ रही है पर गैस नहीं आ रही है। कई जगहों से गैस सिलेंडर के लिए निर्धारित राशि से अधिक पैसे की मांग की शिकायत आ रही है। बहुत सारे ऐसे कॉल आये, इसमें बताया जा रहा है कि छोटे सिलेंडर को कहां पर भरा जाए। अब तक 100 सूचनाओं को दर्ज कर संबंधित जिलों को आवश्यक कार्रवाई को कहा गया है। कई मामलों में कंपनियों को भी जानकारी दी गई है।

एक करोड़ बच्चों के मध्याह्न भोजन पर संकट गहराया

गैस की किल्लत से सूबे के एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन पर संकट गहरा गया है। कई स्कूलों में सिलेंडर खत्म है और अब भोजन लकड़ी-कोयले के चूल्हे पर बन रहा है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि जलावन नहीं मिलने पर यह भी बंद हो जाएगा और बच्चों का मध्याह्न भोजन ठप हो जाएगा।

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मिड डे मिल बंद हुआ तो बच्चों की उपस्थिति पर भी असर : मध्याह्न भोजन यदि बंद हुआ तो स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर भी असर पड़ सकता है। शिक्षकों ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके के अधिकतर बच्चे दोपहर के भोजन के लिए मिड डे मिल पर ही निर्भर होते हैं।

कन्या मध्य विद्यालय अदालत गंज में गुरुवार को ही गैस खत्म हो गयी। आधा खाना बनने के बाद सिलेंडर खत्म होने से आधा भोजन बनाने के लिए रसोइयों ने किसी तरह जलावन जोड़कर खाना बनाया। प्राचार्या ने बताया कि बच्चों का भोजन प्रभावित न हो इसके लिए जो भी व्यवस्था करनी होगी की जाएगी। विद्यालय में 727 बच्चे हैं।

बालक मध्य विद्यालय गोलघर पार्क में 209 बच्चे पढ़ते हैं। यहां भी सिलेंडर खत्म है। ईंट जोड़कर शनिवार को बच्चों के लिए खिचड़ी बनाई गई। रसोइयों का कहना है कि गैस पर आसानी से खाना बनता है। सोमवार तक गैस आपूर्ति नहीं हुई तो बच्चों की मध्याह्न भोजन की थाली पर संकट गहरा जाएगा।

लंबा सफर करके आपके घर तक पहुंचती है गैस

जंग के बीच होर्मुज की खाड़ी से होते हुए गैस से भरे हुए दो टैंकर जल्द भारत आने वाले हैं। ऐसे में आपके जहन में सवाल होगा कि गैस कैसे भारत आती है और किस तरह यह आपके घर तक पहुंचती है। इसके प्रमुख तीन चरण हैं...

गैस का आयात

● भारत अपनी जरूरत की लगभग 50 फीसदी गैस दूसरे देशों (जैसे कतर, यूएई, अमेरिका) से मंगाता है।

● गैस को अत्यधिक ठंडा करके तरल रूप (एलएनजी यानी लिक्विड नेचुरल गैस) में बदला जाता है ताकि उसे टैंकरों में भरा जा सके।

● होर्मुज की खाड़ी जैसे रास्तों से होते हुए ये विशाल जहाज भारत के पश्चिमी तट (दाहेज, हजीरा) या पूर्वी तट पर मौजूद एलएनजी टर्मिनल्स पर पहुंचते हैं।

री-गैसीफिकेशन

● एलएनजी टर्मिनल पर उतरने के बाद गैस को फिर से गैसीय अवस्था में बदला जाता है।

● यहां से गेल जैसी कंपनियां हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों के जरिए गैस को पूरे देश में पंप करती हैं।

● पाइपलाइन से गैस खाद कारखानों, बिजली घरों और रिफाइनरियों तक पहुंचती है।

आपके घर और गाड़ी तक

● पीएनजी पाइपों के जरिए सीधे आपकी रसोई के चूल्हे तक पहुंचती है। यह एलपीजी के मुकाबले सुरक्षित और सस्ती मानी जाती है।

● सीएजनी जैसी प्राकृतिक गैस को हाई प्रेशर पर दबाकर पंपों पर भेजा जाता है, जहां से यह वाहनों में भरी जाती है।

● एलपजी, यह प्राकृतिक गैस नहीं बल्कि कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाली गैस है। इसे बॉटलिंग प्लांट में सिलेंडरों में भरकर ट्रकों के जरिए आपके घर तक पहुंचाया जाता है।

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