विक्रमशिला सेतु का सेफ्टी ऑडिट शुरू, गैप में दिखी बड़ी चौड़ाई
फोटो : कमजोर स्लैब को वल्नरेबल घोषित करने की है तैयारी सेतु के मेंटेनेंस से

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। विक्रमशिला सेतु के सेफ्टी ऑडिट के लिए आई आईटी, पटना की टीम ने शुक्रवार को जांच शुरू की। क्रेन से आईआईटी के इंजीनियरों की तीन सदस्यीय टीम ने तमाम स्लैब की जांच की। बरारी साइड से जांच शुरू हुई है। जांच में एक्सपेंशन गैप की दरार की जांच की गई। गैप में बड़ी चौड़ाई पाई गई है। इसे चिह्नित करते हुए क्रॉस का चिह्न लगाया गया है, ताकि भविष्य में उस स्लैब को वल्नरेबल घोषित किया जा सके। सेफ्टी ऑडिट में लगे इंजीनियरों के दल ने एनएच के अभियंताओं से भी मेंटेनेंस को लेकर बात की। वर्ष 2017 में इस पुल का मेंटेनेंस कराने वाले अभियंताओं से बात भी की। सहायक अभियंता ने मेंटेनेंस के दौरान मुंबई की रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट्स द्वारा किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि जब बियरिंग को बदला जा रहा था, तब किसी तरह की अंदरूनी गड़बड़ी की बात नहीं बताई गई थी। पुल के गैप से बारिश के पानी का रिसाव बियरिंग तक आने से रोकने के लिए ही मास्टिक रोड बनाया गया, ताकि फर्श की नमी स्लैब की परत तक न आए।
जांच में ट्रैफिक लोड की जानकारी
आईआईटी की टीम ने ट्रैफिक लोड से संबंधित जानकारी भी ली। हालांकि इस संबंध में एनएच के अभियंताओं ने सिर्फ इतना कहा कि दिन क्या रातभर पुल पर ट्रक-हाईवा और बसों का आवागमन होता रहता था। सेतु पर किसी वाहन में आई खराबी या दुर्घटना आदि होने पर लंबा जाम लग जाता था। जिससे सैकड़ों गाड़ियां पुल पर काफी देर तक खड़ी रह जाती थी। आईआईटी इंजीनियरों ने पुल पर जाम में गाड़ियों के खड़ा रह जाने को मूल वजह बताया। कहा, गाड़ियां मूवमेंट में है तो अधिक दबाव सेतु पर नहीं पड़ेगा लेकिन गाड़ियां खड़ी रह जाती हैं तो पुल पर क्षमता का पांच गुना तक भार आ जाता है। यह ऑडिट अभी सप्ताह-दस दिन तक चलेगा। ताकि पूरी रिपोर्ट से पथ निर्माण विभाग और मंत्रालय को अवगत कराया जा सके।
विक्रमशिला पुल की जिम्मेदारी एनएच से छीनने की तैयारी
विक्रमशिला पुल की जिम्मेदारी एनएच डिवीजन से छीनने की तैयारी शुरू हो गई है। अब फिर से बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के पास पुल का स्वामित्व आ जाएगा। एनएच डिवीजन की लापरवाही से विक्रमशिला सेतु के स्लैब गिरने के बाद पथ निर्माण विभाग काफी चिंतित है। विभाग की चिंता यह है कि सेतु गिरने को लेकर बिहार की छवि पूरे देश में खराब हुई है। सरकार के कामकाज पर अंगुली उठने लगी है। मुख्यालय स्तर पर गुरुवार को हुई विभाग की समीक्षा में पाया गया कि पुल निगम के पास जब तक स्वामित्व था, उस वक्त बेहतर काम हुआ था। अब दोबारा पुल निगम के पास इसकी जिम्मेदारी सौंपने को लेकर जल्द ही नवनियुक्त मंत्री के पास फाइल भेजी जाएगी। मंत्री की सहमति मिलते ही एनएच डिवीजन से दायित्व छीनकर पुल निगम को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
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