सदर अस्पताल में पेयजलापूर्ति ठप, वाटर कूलर से मिल रहा गर्म पानी-प्लान की खबर
भीषण गर्मी में होती है परेशानी, विशेष पहल की मांग, सिविल सर्जन ने कहा होगी कार्रवाईसे एक नल से गर्म पानी आता है और दूसरा खराब है फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 11 कैप्शन- सिविल सर्जन कार्यालय के समीप वाटर कूलर...

भीषण गर्मी में होती है परेशानी, विशेष पहल की मांग, सिविल सर्जन ने कहा होगी कार्रवाई फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 7 कैप्शन- सदर अस्पताल के इमरजेंसी भवन के बगल में खराब पड़ा नल और वाटर कूलर फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 10 कैप्शन- सदर अस्पताल में पुरूष वार्ड के बगल में लगा वाटर कूलर जिससे एक नल से गर्म पानी आता है और दूसरा खराब है फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 11 कैप्शन- सिविल सर्जन कार्यालय के समीप वाटर कूलर से गर्मी पानी लेते मरीज और उनके परिजन औरंगाबाद, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। औरंगाबाद सदर अस्पताल में पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है।
यहां पूर्व से लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जो वाटर कूलर लगाया गया था, वह खराब हो चुका है। इंडियन ऑयल के स्तर से लाखों रुपए की लागत से इसका निर्माण किया गया था। वाटर कूलर मशीन के साथ नल लगाए गए थे जो बेकार पड़े हुए हैं। कई महीनो से यह समस्या बनी हुई है। शिकायत करने के बावजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके अलावा सदर अस्पताल में ही सिविल सर्जन कार्यालय के पास एक वाटर कूलर लगाया गया जिससे गर्म पानी आ रहा है। इसका एक नल काम कर रहा है लेकिन उससे भी लोगों को गर्म पानी मिल रहा है। भीषण गर्मी में यह पानी पीने लायक नहीं है लेकिन लोग मजबूरी में इसे पी रहे हैं। इसी तरह पुरुष वार्ड के समीप एक वाटर कूलर लगाया गया था जिसका एक नल क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस वाटर कूलर का एक नल पानी दे रहा है लेकिन वह गर्म है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि पानी के लिए लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग बाहर से पानी की बोतल खरीद रहे हैं जो सभी के लिए संभव नहीं है। कई लोग पानी के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। सदर अस्पताल में प्रत्येक दिन पांच सौ से अधिक मरीजों का इलाज होता है। इसके अलावा बच्चा वार्ड, महिला वार्ड सहित विभिन्न तरह की बीमारियों से जूझ रहे लोग सदर अस्पताल में आते हैं। इतनी संख्या में आने वाले मरीजों के लिए पेयजल की कोई सुविधा नहीं होना आश्चर्य के समान है। सदर अस्पताल के प्रबंधन के लिए अस्पताल मैनेजर की तैनाती की गई है लेकिन इन समस्याओं से अस्पताल प्रबंधक का भी कोई लेना-देना नहीं है। सदर अस्पताल में एक वाटर कूलर से पानी ले रहे मदनपुर प्रखंड के कुशवा के गुड्डू कुमार, पहड़चापी के नीरज कुमार, मदनपुर थाना क्षेत्र की शोभा कुमारी ने कहा कि वे लोग गर्मी पानी भर रहे हैं। कहा कि वह चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं। बाहर से पानी की बोतल खरीदना उनके लिए संभव नहीं है। इसमें काफी रुपए खर्च होंगे। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि इस समस्या की जानकारी ली जा रही है। इसमें सुधार किया जाएगा। समहौता प्राथमिक विद्यालय में पेयजल संकट, बच्चे घर से ला रहे पानी चापाकल का पानी दूषित, एमडीएम के लिए गांव से ढोकर लाया जा रहा पानी फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 23 कैप्शन- विद्यालय परिसर में लगा चापाकल, जिसका पानी उपयोग लायक नहीं है अंबा, संवाद सूत्र। कुटुंबा प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय समहौता में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके कारण बच्चों को प्यास बुझाने के लिए घर से बोतल में पानी लाना पड़ता है और दोबारा प्यास लगने पर उन्हें फिर घर जाना पड़ता है। विद्यालय कर्मियों की प्यास भी बोतलबंद पानी से ही बुझती है, जबकि मध्यान्ह भोजन के लिए रसोइया गांव से पानी ढोकर लाती है। यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है, जिसकी सूचना विभाग को दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। विद्यालय परिसर में एक चापाकल है पर उसका पानी इतना दूषित है कि उपयोग के लायक नहीं है और उससे दुर्गंध आती है। हाल में पाइप बदलकर उसे ठीक करने का प्रयास किया गया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। विद्यालय प्रबंधन इस पानी का उपयोग कम करता है, क्योंकि इससे बच्चों की तबीयत खराब होने की आशंका है। प्रधान शिक्षिका नुजहत बानो ने बताया कि विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है और कुल 45 बच्चे नामांकित हैं, जबकि प्रभारी सहित तीन शिक्षक पदस्थापित हैं। पेयजल की समस्या वर्षों से बनी हुई है। विद्यालय में सरकारी योजना के तहत सबमर्सिबल भी नहीं लगाया गया है। विद्यालय गांव से थोड़ा किनारे स्थित है, जिससे चापाकल खराब होने या पानी दूषित होने की स्थिति में गांव से पानी लाना पड़ता है। चापाकल के पानी से बर्तन धोने का काम हो पाता है, वह भी गर्मी में कठिन हो जाता है। प्रखंड एमडीएम प्रभारी प्रभाकर कुमार ने बताया कि विद्यालय में नियमित रूप से एमडीएम संचालित हो रहा है, लेकिन पानी की समस्या बनी हुई है और बाहर से पानी मंगाना पड़ता है। वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। कुटुंबा रेफरल अस्पताल में ठंडे पेयजल का अभाव, मरीज परेशान फोटो- 24 अप्रैल एयूआर 24 कैप्शन- अस्पताल परिसर में सांसद निधि से बना प्याउ अंबा, संवाद सूत्र। कुटुंबा रेफरल अस्पताल में मरीजों और आमजन के लिए ठंडे पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोग भीषण गर्मी में परेशानी झेल रहे हैं। अस्पताल परिसर में सांसद की ऐच्छिक निधि से बना प्याउ तो है, लेकिन तेज धूप के कारण उसकी टंकी का पानी दिन में अत्यधिक गर्म हो जाता है, जिससे लोग इसका उपयोग करने से कतराते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी के इस मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि अस्पताल आने वाले मरीजों, परिजनों और कर्मियों को ठंडा पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। परिसर में एक मोटर के जरिए पाइपलाइन से नल लगाया गया है, जिससे पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन वह भी सामान्य तापमान का ही रहता है। इसके अलावा चापाकल मौजूद है, जिसका उपयोग लोग पीने के पानी के रूप में कर रहे हैं। पूर्व में अस्पताल भवन के अंदर ठंडे पानी का प्याउ संचालित था, जिससे मरीजों और कर्मियों को काफी राहत मिलती थी, लेकिन अब वह बंद पड़ा है और उसे चालू कराने की दिशा में कोई पहल नहीं दिख रही है। ठंडे पेयजल की व्यवस्था नहीं होना स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है, जिससे मरीजों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक दीपक कुमार ने कहा कि अस्पताल परिसर में तीन चापाकल चालू हैं। इसके अलावा मोटर से पानी उपलब्ध कराया जाता है।
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