आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट के सभी दोषी बरी, हाईकोर्ट ने फांसी की सजा भी रद्द की
2015 में हु्ए आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट के सभी दोषियों को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। लंबू शर्मा को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे रद्द कर दिया गया।

बिहार के बहुचर्चित आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट मामले के सभी दोषी बरी कर दिए गए हैं। पटना हाईकोर्ट ने दोषी लंबू शर्मा की फांसी की सजा को भी रद्द कर दिया। अदालत ने कुख्यात लंबू शर्मा एवं अखिलेश उपाध्याय को भी बरी किया है। हालांकि, जेल से भागने के अन्य मामले में वे दोषी करार रहेंगे। इसलिए दोनों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
वहीं, इस केस में निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए चांद मियां, नईम मियां, रिंकू यादव, प्रमोद सिंह, श्याम विनय शर्मा एवं अंशु कुमार को भी आजीवन कारावास की सजा से बरी किया गया है। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई पूरी कर 12 फरवरी, 2026 को आदेश सुरक्षित रख लिया था। इस पर गुरुवार 26 मार्च को फैसला सुनाया गया।
यह घटना 23 जनवरी 2015 की है। आरा सिविल कोर्ट परिसर में सुबह 11.35 बजे लगभग बम धमाका हुआ था। इसमें एक महिला और एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। अन्य कई लोग घायल हुए थे। बम धमाके के बाद मची अफरातफरी का फायदा उठाकर कुख्यात लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय कैद से भाग निकले थे।
स्थानीय अदालत ने इस केस की सुनवाई के बाद 20 अगस्त 2019 को फैसला सुनाया था। इसमें जेल से भागे लंबू शर्मा को मुख्य दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई। वहीं, उसके साथ जेल से भागे अपराधी अखिलेश उपाध्याय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उनके अलावा अन्य 6 दोषियों को भी उम्रकैद और जुर्माने की सजा मिली थी। निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए दोषियों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
कोर्ट में बम लेकर आई थी महिला और खुद को उड़ा दिया
जांच में सामने आया था कि उत्तर प्रदेश की रहने वाली महिला नगीना देवी उस दिन आरा कोर्ट में बम लेकर आई थी। धमाका होने के बाद नगीना देवी के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे। वहीं, कोर्ट हाजत की सुरक्षा में तैनात सिपाही अमित कुमार की भी जान चली गई थी।
यूपी के डॉन ब्रजेश सिंह, यूपी के पूर्व विधायक एवं बाहुबली मुख्तार अंसारी और पीरो के पूर्व विधायक एवं बाहुबली सुनील पांडेय तक भी जांच की आंच पहुंची थी। सुनील पांडेय को जेल जाना पड़ा था। हालांकि, सबूतों के अभाव में ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के नाम चार्जशीट में नहीं आए थे। बाद में सुनील पांडेय को भी बरी कर दिया गया था।




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