अनंत सिंह उवाच: निशांत कुमार परिवारवाद नहीं, नीतीश का नाम लेने वालों को देह में ‘पिल्लू’ होना चाहिए
Anant Singh Nitish Nishant: मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जेडीयू के नेता निशांत कुमार को सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री बनाने को परिवारवाद मानने से मना कर दिया है। अनंत सिंह ने कहा कि एक बच्चा लाना परिवारवाद नहीं है।

Anant Singh Nitish Nishant: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बाहुबली नेता और मोकामा के चर्चित विधायक अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार में पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को मंत्री बनाने को परिवारवाद मानने से मना कर दिया है। अनंत सिंह ने कहा कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में मंत्री बनाना ‘बहुत बढ़िया’ फैसला है। विधायक ने कहा कि एक बेटा को कोई आगे बढ़ाता है तो वह परिवारवाद नहीं है। बताते चलें कि अनंत सिंह ने खुद भी ऐलान कर दिया है कि वो आगे विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनकी जगह मोकामा से 2030 का चुनाव उनका कोई बेटा लड़ेगा।
अनंत सिंह से पहले उनके भाई दिलीप सिंह मोकामा से विधायक हुआ करते थे, जिनके निधन के बाद बाद वो राजनीति में आए और फिर एक बार अपनी पत्नी नीलम देवी को भी एमएलए बनाया। अनंत सिंह अब तक छह बार मोकामा से जीत चुके हैं। एक यू-ट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में अनंत सिंह ने आगे चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर कहा कि वह जनता को छोड़ने नहीं जा रहे हैं। विधायक बेटा बने या कोई और बने, वह जो (जनता की सेवा) कर रहे हैं, करते रहेंगे।
अनंत सिंह से जब निशांत कुमार को मंत्री बनाने को लेकर परिवारवाद के ऊपर सवाल किया गया तो वो उखड़ गए। उन्होंने परिवारवाद की अपनी व्याख्या सामने रखी और बताया- ‘परिवारवाद जैसे कि बेटा, बेटी, भाई, भतीजा, कुटुम्ब, नाता, उसको परिवारवाद माना जाता है। लेकिन एक बेटा को कोई खड़ा करता है तो वो परिवारवाद में नहीं आता है। परिवारवाद उसको कहा जाता है कि कुटुम्ब को बना दीजिए, बेटा को, बेटी को, जो भी है खानदान में, सबको बना दिए, उसको परिवारवाद कहा जाता है। लेकिन एक-दो कोई लड़ रहा है तो परिवारवाद नहीं हुआ।’
निशांत कुमार को मंत्री बनाने को लेकर राजनीतिक वंशवाद के आरोप से विधायक अनंत सिंह पूरी तरह उखड़ गए और कहने लगे- ‘नीतीश कुमार ना बेटा को बनाए (पहले खुद सीएम रहते, अब मंत्री हैं), ना भाई को बनाए, किसी को नहीं बनाए, कोई परिवारवाद बोलता है नीतीश में तो उसको समूचे शरीर में पिल्लू (कीड़ा) होना चाहिए। तो ब्याह-शादी करना छोड़ दें? शादी-ब्याह क्यों करता है। जब बेटा को भी कुछ नहीं बना सकते तो फिर जन्म देने का क्या हक है। परिवारवाद में नहीं जाना है, तब शादी-ब्याह नहीं करो।’





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