राज्यसभा चुनाव के बीच CM नीतीश की समृद्धि यात्रा का प्रोग्राम सेट, कल से चौथा चरण
राज्यसभा चुनाव के बीच नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के चौथे फेज के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। चौथा चरण 17–20 मार्च तक होगा। इस दौरान वे भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, मुंगेर, लखीसराय, गया और औरंगाबाद का दौरा करेंगे। वहीं बिहार विधानसभा में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए वोटिंग जारी है।

बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। यह यात्रा 17 मार्च से 20 मार्च तक बिहार के कई जिलों में आयोजित की जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार 17 मार्च को मुख्यमंत्री भागलपुर और बांका का दौरा करेंगे। 18 मार्च को वे जमुई और नवादा पहुंचेंगे। इसके बाद 19 मार्च को मुंगेर और लखीसराय का दौरा करेंगे। यात्रा के अंतिम दिन 20 मार्च को मुख्यमंत्री गया और औरंगाबाद में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए विधानसभा में वोटिंग जारी है।
शाह की मौजूदगी में नामांकन किया था
इस बीच राज्य की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। नामांकन के समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उनके साथ भाजपा के नेता नितिन नवीन और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। एनडीए के बीच सीटों के बंटवारे में दो-दो सीटें भाजपा और जदयू के खाते में गई हैं, जबकि एक सीट आरएलएम को दी गई है।
विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनने की इच्छा
राज्यसभा चुनाव लड़ने के फैसले पर नीतीश कुमार ने कहा कि उनके जीवन की एक इच्छा थी कि वे विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पहले की तरह कायम रहेगा और आगे बनने वाली सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
2000 में पहली बार सीएम बने थे नीतीश
राजनीतिक सफर की बात करें तो नीतीश कुमार पहली बार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, हालांकि उस समय उनका कार्यकाल केवल सात दिनों का रहा। इसके बाद 2005 में उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और राज्य में कानून-व्यवस्था व विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। पिछले दो दशकों में वे करीब 19 साल से अधिक समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अलग-अलग गठबंधनों के साथ कई बार सरकार बनाकर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है।
नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज
वहीं नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद राज्य की राजनीति में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि अगर नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से पीछे हटते हैं तो बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी। संभावित नामों में भाजपा की ओर से सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और विजय कुमार सिन्हा के नाम चर्चा में हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला खुद नीतीश कुमार ही करेंगे।




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