राजगीर के बाद अब पटना में बिहार का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, नीदरलैंड का एस्ट्रो टर्फ लगेगा
जिस जगह इंटरनेशनल टर्फ बिछाने की तैयारी है, वहां कभी लगभग 2 मीटर तक पानी में डूबा दलदली क्षेत्र हुआ करता था। चारों ओर से लगातार पानी रिसाव, तीन मीटर तक ऊंची घास और दलदल की कई परतों के कारण यह मैदान वर्षों तक किसी भी खेल गतिविधि के योग्य नहीं था।

बिहार की राजधानी पटना में राजेंद्र नगर स्थित एनसीसी कैंपस में हॉकी टर्फ का निर्माण हो रहा है। एक माह में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। मैदान में नीदरलैंड से आयातित पॉलीटेन ब्लू एस्ट्रो टर्फ बिछाई जा रही है। यह खिलाड़ियों को उत्कृष्ट ग्रिप और तेज गति प्रदान करती है। इस परियोजना को 8.44 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है।· राजगीर के बाद राजेंद्र नगर का यह हॉकी मैदान बिहार का दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर का हॉकी स्टेडियम होगा।· इस मैदान का निर्माण कार्य लगभग 80% तक हो चुका है। बेस निर्माण, एलईडी फ्लड लाइट और जल प्रबंधन प्रणाली सहित कई महत्वपूर्ण कार्य को पूरा कर लिया गया है।·
अब केवल पाथ-वे, स्प्रिंकलर और टर्फ सिस्टम का काम ही शेष है जिसे एक महीने में पूरा कर लिया जाएगा। बुडको की ओर से राजेंद्र नगर में बन रहे हॉकी टर्फ को हॉकी इंडिया फेडरेशन से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। फेडरेशन के अधिकारियों ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर संतोष जताया है। दूसरी तरफ बुडको एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मैदान का निर्माण तेजी से और ससमय पूरा करें। बिहार में खेल की दिशा में बढ़ते युवाओं की रुचि को और बिहार में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा देने में यह सहायक होगा।
कभी पानी से भरा रहने वाला क्षेत्र बना स्टेडियम
जिस जगह इंटरनेशनल टर्फ बिछाने की तैयारी है, वहां कभी लगभग 2 मीटर तक पानी में डूबा दलदली क्षेत्र हुआ करता था। चारों ओर से लगातार पानी रिसाव, तीन मीटर तक ऊंची घास और दलदल की कई परतों के कारण यह मैदान वर्षों तक किसी भी खेल गतिविधि के योग्य नहीं था। मैदान को खेलने योग्य बनाने के लिए पटना मेट्रो से हजारों ट्रॉली विशेष मिट्टी मंगाई गई है। दलदली पॉकेट्स को हटाने के लिए मशीनों से खुदाई की गई। इसे भरकर मैदान को स्थिर किया गया। अब बड़े आयोजनों के अनुकूल इसे तैयार किया जा रहा है।
मैदान में रात के समय भी खेल की सुविधा के लिए 20 उच्च क्षमता वाली 1000 वॉट और 40 एलईडी फ्लड लाइट (500 वॉट) लगाई जा रही हैं। यह व्यवस्था पूरे मैदान में रोशनी सुनिश्चित करेगी। एमडी ने निर्देश दिया गया है कि संबंधित पदाधिकारी नियमित तौर पर जमीनी स्तर पर कार्य की वस्तुस्थिति की निरंतर भी जांच करें।




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