बिहार में पूर्व डीएसपी के बाद अब SHO ईओयू की रडार पर, किशनगंज में रेड से हड़कंप
आर्थिक अपराध इकाई की टीम 7 बजे सुबह के बाद सदर थाना परिसर स्थित सरकारी आवास पहुंची थी। आर्थिक अपराध इकाई की टीम पिछले दो घंटे से छापेमारी कर रही है।सदर थानाध्यक्ष अभिषेक रंजन 2009 बैच के दारोगा के रूप में पुलिस विभाग में नियुक्त हुए थे।

अभी कुछ दिनों पहले ईओयू ने किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार पर शिकंजा कसा था। आय से अधिक दौलत अर्जित करने के मामले में एसडीपीओ पर बड़ी कार्रवाई के बाद अब किशनगंज सदर थाना अध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन के पांच ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा छापेमारी की गई है। आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया है कि अभिषेक कुमार रंजन के विरूद्ध ज्ञात आय से अधिक सम्पति अर्जन के आलोक में आर्थिक अपराध इकाई थाना कांड संख्या 05/26, 13.04.2026 अन्तर्गत धारा 13 (2) सहपठित धारा 13 (1) (बी) अंकित विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी अधिपत्र प्राप्त करते हुए उनके 5 अलग-अलग ठिकानों पर डीएसपी स्तर के पदाधिकारियों के नेतृत्व में तलाशी की कार्यवाई की जा रही है।
पुलिस निरीक्षक-सह-थानाध्यक्ष सदर थाना के किशनगंज अभिषेक कुमार रंजन के विरूद्ध सत्यापन के क्रम में कुल एक करोड़ सत्तर लाख बाइस हजार रूपये आय से अधिक सम्पति अर्जन करने का प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाया गया है, जो उनके ज्ञात आय से लगभग 115.66 प्रतिशत अधिक है। इस क्रम में मंगलवार को किशनगंज सदर थाना के थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन के पटना, छपरा एवं किशनगंज, अवस्थित कुल 5 ठिकानों पर अलग-अलग टीम द्वारा तलाशी अभियान चलाया जा रहा हैं।
पूर्व डीएसपी के ठिकानों पर पड़ी थी रेड
आपको बता दें कि कुछ ही दिनों पहले किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के ठिकानों पर ईओयू ने रेड मारी थी। जांच में यह खुलासा हुआ है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से करीब 60.27 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। इस मामले में उनकी पत्नी रूबी कश्यप, सास पूनम देवी और कथित सहयोगी शगुफ्ता शमीम को भी सह-अभियुक्त बनाया गया है। छापेमारी के दौरान किशनगंज स्थित सरकारी आवास से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद, छह मोबाइल फोन और करोड़ों के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जब्त मोबाइल फोन में फर्जी सिम कार्ड पाए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर माफिया से संपर्क और अवैध लेनदेन के लिए किया जाता था।बं
गाल सीमा पर एक होटल में माफिया से होती थी डीलिंग जांच एजेंसी को एसडीपीओ के कई माफिया गिरोहों से संबंध के भी सबूत मिले हैं। इनमें कोयला, शराब, बालू, लॉटरी और सुपारी तस्करी से जुड़े नेटवर्क शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, बंगाल सीमा के पास स्थित एक होटल में उनकी बैठकी होती थी। जहां विभिन्न माफिया के साथ लेनदेन और सांठगांठ की जाती थी। ताकि किशनगंज की सड़कों से लेकर गलियों में चल रहे गैरकानूनी धंधे चलती रहे और उनकी जेब भरती रहे। सूत्रों की मानें तो लॉटरी से लेकर बालू, कोयला, पशु, शराब, सुपारी तस्करो से हर महीने लाखों रुपये तक हिस्सा पुलिस को मैनेज करने के लिए माफिया द्वारा खर्च की जाती थी।




साइन इन