वाराणसी-कोलकाता छह लेन एनएच का रास्ता साफ, बिहार को यूपी, बंगाल और झारखंड से करेगा कनेक्ट
बिहार को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाली यह सड़क 61वें एनएच के रूप में अधिसूचित है। इस सड़क में पैकेज एक 27 किलोमीटर का है। यूपी के चंदौली से शुरू होने वाले इस पैकेज में बिहार में यह मात्र पांच किलोमीटर है, जो कैमूर जिले में है।

बिहार होकर वाराणसी से कोलकाता के बीच बनने वाली छह लेन सड़क (एनएच 319बी) बनने का रास्ता साफ हो गया। इस सड़क के पांच पैकेज का काम चल रहा था, लेकिन दो पैकेज का मामला अधर में था। केंद्र सरकार ने इस दो पैकेज को एक में तब्दील करते हुए वित्तीय मंजूरी दे दी है। वन क्षेत्र के कारण इस सड़क में अब टनल का निर्माण नहीं होगा। सासाराम शहर के समीप से यह सड़क गुजरेगी। इस कारण इसकी लंबाई अब 15 किलोमीटर बढ़ गई है।
बिहार को उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाली यह सड़क 61वें एनएच के रूप में अधिसूचित है। इस सड़क में पैकेज एक 27 किलोमीटर का है। यूपी के चंदौली से शुरू होने वाले इस पैकेज में बिहार में यह मात्र पांच किलोमीटर है, जो कैमूर जिले में है। दूसरा पैकेज 27 किलोमीटर का है, जो कैमूर में ही है। तीसरा पैकेज 36 किलोमीटर कैमूर और रोहतास में है। छठा पैकेज 35.2 किमी औरंगाबाद में है तथा सातवां पैकेज 33.5 किमी गया में है। इन पांचों पैकेज का काम चल रहा है। मूल समस्या रोहतास जिले में अवस्थित पैकेज चार और पांच को लेकर थी।
पैकेज चार में टनल का निर्माण होना था लेकिन वन विभाग ने इसके लिए ब्लास्ट करने की अनुमति नहीं दी। टीएनबी से टनल बनाने में दो-तीन गुना अधिक पैसा खर्च होता, जिस पर एनएचएआई ने आपत्ति जाहिर कर दी है। इस परिस्थिति में नए सिरे से सड़क का डिजाइन बनी। वन विभाग से बाहर इसे सासाराम शहर से ले जाने का निर्णय लिया गया। कोनकी गांव से लेरुआ गांव तक इसकी दूरी 41.955 किलोमीटर है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली पीपीपीएसी (लोक निजी भागीदारी अनुशंसा समिति) ने पूर्व के दो पैकेज को एक में तब्दील करते हुए इसे हैम मोड में बनाने की मंजूरी दे दी। हैम मोड में सरकार 40 फीसदी जबकि निर्माण एजेंसी को 60 फीसदी राशि खर्च करनी होती है। निर्माण एजेंसी टोल से अपनी लागत की वसूली करेगी। इस पैकेज में सोन नदी पर एक 3.5 किलोमीटर पुल भी बनेगा। 6 छोटे पुलों का निर्माण होगा। सड़क बनाने में 2897.16 करोड़ खर्च होंगे। सड़क के लिए 310.77 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इनमें 24.82 हेक्टेयर सरकारी जमीन है।
वाराणसी-कोलकाता की दूरी छह घंटे में पूरी होगी
इस सड़क के बनने से वाराणसी से कोलकाता की दूरी 14 घंटे के बदले मात्र छह-सात घंटे में पूरी की जा सकेगी। यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच बिहार से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। विशेषकर हल्दिया बंदरगाह तक मालों की आवाजाही आसान होगी।




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