तनाव से लेकर सिर दर्द से छुटकारा, जानिए किस बीमारी में कौन सा रुद्राक्ष पहनें?
शिवपुराण में इसकी उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान शिव के आंसुओं से बनी हुई है। शास्त्रों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, मन शांत रहता है और आत्मिक उन्नति होती है। साथ ही इसे चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए भी धारण किया जाता है।

हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का खास महत्व होता है। पहले ज्यादातर इसे आप साधु, महात्मा या संतों के गले पहने हुए देखते थे, लेकिन अब आपको कई लोग रुद्राक्ष की माला पहनने हुए दिखाई दे जाएंगे। इसमें बच्चे, नौजवान, महिलाएं आदि शामिल हैं। यह एक पवित्र बीज है। शिवपुराण में इसकी उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान शिव के आंसुओं से बनी हुई है। इसलिए इसे भगवान शिव का स्वरूप भी मानते हैं। शास्त्रों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, मन शांत रहता है और आत्मिक उन्नति होती है। साथ ही इसे चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए भी धारण किया जाता है।
मान्यता है कि रुद्राक्ष को धारण करने से कई तरह के रोग दूर हो जाते हैं। इसलिए इसे रुद्राक्ष चिकित्सा भी कहते हैं। मान्यता है कि इसमें विद्युत-चुबंकीय गुण पाए जाते हैं। इसके बीजों में प्राकृतिक इलेक्ट्रोमैग्रनिट तरंगे होती हैं, जो हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम और ब्लड सर्कलेशन पर असर डालती है। रुद्राक्ष 21 प्रकार के होते हैं। ये अलग-अलग मुखी में पाए जाते हैं। हर मुखी रुद्राक्ष का अपना अलग महत्व और गुण है, जिसे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए धारण किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कौन से मुखी रुद्राक्ष को पहनने से किन रोगों का नाश होता है?
किस रोग में कौन-सा रुद्राक्ष पहनें?
एक मुखी रुद्राक्ष
एक मुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। यह बहुत दुर्लभ और शक्तिशाली माना जाता है। यह ध्यान और साधना में एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है। इसके अलावा यह मन को शांत करता है और नकारात्मक विचारों को कम करता है। यह सिर दर्द, माइग्रेन और मानसिक थकान में राहत देने वाला माना जाता है। साथ ही यह नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में सहायक होगा। साथ ही यह रक्त संचार के लिए लाभकारी होता है।
दो मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष तनाव, चिंता और मानसिक दबाव में राहत देने वाला माना जाता है। साथ ही यह पेट की समस्याएं भी दूर करता है।
तीन मुखी रुद्राक्ष
तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्नि देव का प्रतीक माना जाता है। यह रुद्राक्ष पाचन संबंधी रोग जैसे कि लिवर और गॉल ब्लैडर की समस्याओं में सहायक है। साथ ही यह शारीरिक कमजोरी भी दूर करता है। साथ ही यह शरीर की ऊर्जा और सक्रियता बढ़ाने में सहायक है।
चार मुखी रुद्राक्ष
चार मुखी रुद्राक्ष को भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। यह ज्ञान, बुद्धि, वाणी और रचनात्मकता बढ़ाने से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह स्मरण शक्ति की कमी, मानसिक थकान, किडनी, थायराइड और हकलाहट में फायदा पहुंचाता है।
पांच मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष भी स्वास्थ्य के लिहाज से काफी लाभदायी माना जाता है। यह उच्च रक्तचाप और हृदय रोग को बेहतर करता है और नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाता है।
छह मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष त्वचा संबंधी रोगों को दूर करने में सहायक होता है। थकान संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है। यह एकाग्रता बढ़ाता है और गले, आंख, किडनी और पाचन संबंधी परेशानियों में भी सहायक होता है।
सात मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष तनाव, चिंता और मानसिक दबाव कम करने में सहायक होता है। नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मददगार है। यह धैर्य को बढ़ाता है।
आठ मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष नींद न आने की समस्या को दूर करता है। साथ ही नसों और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। यह शरीर की ऊर्जा और सक्रियता बढ़ाने में सहायक होता है।
नौ मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष लंबे समय की कमजोरी और थकान में लाभकारी होता है। साथ ही जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
दस मुखी रुद्राक्ष
दस मुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इसे सुरक्षा, स्थिरता और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करने वाला रुद्राक्ष कहा जाता है। यह सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में कारगर माना जाता है क्योंकि इसमें गर्म प्रकृति होती है।
मान्यता है कि रुद्राक्ष मालाधारी मनुष्यों पर शिव, भगवान विष्णु, देवी दुर्गा, गणेश, सूर्य और अन्य देवता की कृपा बरसती है। परंतु ज्योतिष के मुताबिक, रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक होना चाहिए, तामसिक वस्तुओं के प्रयोग से रुद्राक्ष का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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