Vat Savitri Vrat 2026 Date Time Shubh Muhurat Puja Vidhi Upay Vat Savitri Vrat 2026: कब रखा जाएगा व्रत सावित्री व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Vat Savitri Vrat 2026: कब रखा जाएगा व्रत सावित्री व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

सनातन परंपरा में ज्येष्ठ महीने को खास माना जाता है और इसी महीने की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस व्रत का सालभर इंतजार करती हैं। मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए रखा जाता है।

Fri, 17 April 2026 10:45 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Vat Savitri Vrat 2026: कब रखा जाएगा व्रत सावित्री व्रत? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Vat Savitri Vrat 2026: सनातन परंपरा में ज्येष्ठ महीने को खास माना जाता है और इसी महीने की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है। सुहागिन महिलाएं इस व्रत का सालभर इंतजार करती हैं। मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन व्रती महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए बरगद की पूजा करती हैं। वट सावित्री का पर्व सुहागिनों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सती सावित्री की तरह पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं व्रत रखती हैं और वटवृक्ष की पूजा महादेव मानकर करती हैं। मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे। ज्येष्ठ माह के अमावस्या तिथि को यह पर्व हर वर्ष सुहागिनों द्वारा मनाया जाता है। इस व्रत को वरगदाई के नाम से भी जाना जाता है। देवी सावित्री ने अपने दृढ़ निश्चय और भक्ति के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान को पुनः जीवित किया था। तभी से यह पर्व स्त्रियों के सतीत्व, श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक बन गया है।

कब है वट सावित्री व्रत 2026-

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी और 17 मई को रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त-

व्रत और पूजा के लिए दिनभर समय शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं-

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:07 से 4:48 तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:04 से 3:28 तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:04 से 7:25 तक

निशिता मुहूर्त: रात 11:57 से 12:38 (17 मई)

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व्रत का महत्व- धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, वट सावित्री व्रत का सीधा संबंध अखंड सौभाग्य से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने पर पति के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं। साथ ही दांपत्य जीवन में स्थिरता और प्रेम बना रहता है।

बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व- बरगद के पेड़ की पूजा इस दिन खास मानी जाती है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश- तीनों का वास माना जाता है। इसी वजह से इसे ‘वट वृक्ष’ की पूजा कहा जाता है।

पूजा विधि- सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। बांस की दो टोकरी लें। उसमें सप्तधान्य भर लें। उनमें से एक पर ब्रह्मा और सावित्री व दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा स्थापित करें। सावित्री के पूजन में सौभाग्य वस्तुएं (काजल, मेहंदी, सिन्दूर, चूड़ी, बिन्दी, वस्त्र, आभूषण, दर्पण इत्यादि) चढ़ाएं। इसके पश्चात माता सावित्री को मंत्र से अर्घ्य दें। इसके पश्चात वटवृक्ष का पूजन करें। वटवृक्ष का पूजन करने के पश्चात उसकी जड़ों में प्रार्थना करते हुए जल चढाएं। साथ ही परिक्रमा करते हुए वटवृक्ष के तने पर कच्चा सूत लपेटें। 108, 28 या फिर न्यूनतम सात बार परिक्रमा का विधान है। इसके बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनना या पढ़ना जरूरी माना गया है। पूजा के अंत में अपने पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

करें ये उपाय- अगर दांपत्य जीवन में तनाव चल रहा है, तो पूजा के समय बरगद की जड़ में सिंदूर चढ़ाएं। उसी सिंदूर से अपनी मांग भरें। मान्यता है कि इससे रिश्ते में मिठास बढ़ती है और आपसी समझ मजबूत होती है।

इन बातों का रखें ध्यान-

  • तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • बिना वजह विवाद से बचें।
  • काले रंग के कपड़े न पहनें।
  • व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।
  • अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य करें।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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