Vat Savitri Vrat 2026 Date: Is the Fast on May 16 or 17? Check Correct Tithi, Puja Muhurat and Rituals Vat Savitri Vrat 2026: 16 या 17 मई, कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? जानिए सही तारीख और पूजा का समय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Vat Savitri Vrat 2026: 16 या 17 मई, कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? जानिए सही तारीख और पूजा का समय

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं का खास व्रत माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर अपने अटूट प्रेम और संकल्प का परिचय दिया था।

Sun, 10 May 2026 10:54 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Vat Savitri Vrat 2026: 16 या 17 मई, कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? जानिए सही तारीख और पूजा का समय

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं का खास व्रत माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर अपने अटूट प्रेम और संकल्प का परिचय दिया था। तभी से महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।

इस बार भी कई लोगों के मन में वट सावित्री व्रत की तारीख को लेकर सवाल बना हुआ है कि व्रत 16 मई को रखा जाएगा या 17 मई को। ऐसे में पंचांग के अनुसार सही तारीख और पूजा का समय जान लेते हैं।

वट सावित्री व्रत 2026 की सही तारीख

पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन 17 मई को रात 1 बजकर 30 मिनट पर होगा।

उदय तिथि को देखते हुए वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इसी दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करेंगी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।

पूजा का शुभ समय

16 मई को पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:07 बजे से 4:48 बजे तक

विजय मुहूर्त – दोपहर 2:04 बजे से 3:28 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 7:04 बजे से 7:25 बजे तक

इन समय में वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करना शुभ माना गया है।

वट वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं में बरगद के पेड़ को बहुत पवित्र माना गया है। कहा जाता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का खास महत्व बताया गया है।

महिलाएं इस दिन वट वृक्ष पर सूत लपेटकर परिक्रमा करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। कई जगह 7 बार तो कई जगह 108 बार परिक्रमा करने की परंपरा भी है।

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वट सावित्री व्रत की पूजा विधि

इस दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं साफ या नए कपड़े पहनती हैं और श्रृंगार करती हैं। पूजा की थाली में धूप, दीपक, रोली, अक्षत, फल, भीगे चने और कच्चा सूत रखा जाता है।

इसके बाद बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है। पूजा के बाद महिलाएं परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं।

कई जगहों पर इस दिन घर में गुलगुले और दूसरे पकवान बनाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा से किया गया वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन में सुख और स्थिरता बनाए रखने वाला माना जाता है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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