Utpanna Ekadashi 2025 Date Muhurat on 15 or 16 November Time Ekadashi Vrat Pooja Vidhi 15 या 16 नवंबर कब है उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें डेट, मुहूर्त व पूजा की विधि, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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15 या 16 नवंबर कब है उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें डेट, मुहूर्त व पूजा की विधि

Utpanna Ekadashi 2025 Date and Time : उत्पन्ना एकादशी का व्रत श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान के साथ श्री हरि विष्णु जी की उपासना करने से जीवन में धन-धान्य बना रहेगा और पापों का नाश होता है।

Sat, 8 Nov 2025 02:01 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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15 या 16 नवंबर कब है उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें डेट, मुहूर्त व पूजा की विधि

Utpanna Ekadashi 2025, 15 या 16 नवंबर कब है उत्पन्ना एकादशी व्रत, जानें डेट: इस साल नवंबर के महीने में उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाएगा। उत्पन्ना एकादशी का व्रत विष्णु भगवान को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान के साथ श्री हरि विष्णु की उपासना करने से जीवन में धन-धान्य बना रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 15 नवंबर के दिन एकादशी तिथि रात में 12:49 ए एम पर प्रारम्भ हो जाएगी, जिसका समापन 16 नवंबर के दिन 02:37 ए एम पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 15 नवंबर के दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखा जाएगा। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी की डेट, मुहूर्त, व्रत पारण का समय और पूजा की विधि-

मुहूर्त

  1. ब्रह्म मुहूर्त 04:58 ए एम से 05:51 ए एम
  2. प्रातः सन्ध्या 05:24 ए एम से 06:44 ए एम
  3. अभिजित मुहूर्त 11:44 ए एम से 12:27 पी एम
  4. विजय मुहूर्त 01:53 पी एम से 02:36 पी एम
  5. गोधूलि मुहूर्त 05:27 पी एम से 05:54 पी एम
  6. सायाह्न सन्ध्या 05:27 पी एम से 06:47 पी एम
  7. अमृत काल 03:42 पी एम से 05:27 पी एम
  8. निशिता मुहूर्त 11:39 पी एम से 12:33 ए एम, नवम्बर 16

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व्रत पारण का समय

16 नवंबर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय: दोपहर में 01:10 पी एम से 03:18 पी एम तक रहेगा।

पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय: सुबह में 09:09 ए एम रहेगा।

पूजा की विधि

  1. स्नान आदि कर मंदिर की साफ सफाई करें
  2. भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
  3. प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
  4. अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
  5. मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
  6. संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें
  7. उत्पन्ना एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें
  8. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
  9. पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
  10. प्रभु को तुलसी दल सहित भोग लगाएं
  11. अंत में क्षमा प्रार्थना करें

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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