triyuginarayan mandir uttarakhand shiva parvati wedding place history facts and significance Triyuginarayan Mandir: माता पार्वती-शिव ने यहां लिए थे सात फेरे, दर्शन करने के लिए नए जोड़ों की लगती हैं लाइनें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Triyuginarayan Mandir: माता पार्वती-शिव ने यहां लिए थे सात फेरे, दर्शन करने के लिए नए जोड़ों की लगती हैं लाइनें

भगवान विष्णु को समर्पित त्रियुगीनारायण मंदिर गवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय और स्थिर रहता है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में विस्तार से।

Fri, 10 April 2026 04:40 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Triyuginarayan Mandir: माता पार्वती-शिव ने यहां लिए थे सात फेरे, दर्शन करने के लिए नए जोड़ों की लगती हैं लाइनें

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ मार्ग पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन तीर्थ स्थल है। यह मंदिर केवल भगवान विष्णु को समर्पित नहीं है, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां त्रेता युग से लगातार जल रही अखंड ज्योति आज भी प्रज्वलित है। नवविवाहित जोड़े यहां आने के लिए लंबी लाइनें लगाते हैं, क्योंकि मान्यता है कि यहां दर्शन करने और हवन कुंड की राख ले जाने से वैवाहिक जीवन सुखमय और स्थिर रहता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर का पौराणिक महत्व

त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों और लोक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भगवान विष्णु ने इस विवाह को संपन्न कराया था, जबकि ब्रह्मा जी पुरोहित बने थे। विवाह के समय अग्नि देवता ने साक्षी दी थी और उसी समय से मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्वलित है। इसी कारण इस मंदिर को अखंड धूनी मंदिर भी कहा जाता है।

अखंड ज्योति और विवाह की साक्षी

मंदिर के सामने स्थित हवन कुंड में जल रही अखंड ज्योति त्रेता युग से लगातार प्रज्वलित है। इसे कभी बुझने नहीं दिया जाता है। नवविवाहित जोड़े यहां आकर इस ज्योति के सामने हवन करते हैं और कुंड की राख को सिर पर लगाते हैं। मान्यता है कि इस राख से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और स्थिरता बनी रहती है। यही वजह है कि त्रियुगीनारायण मंदिर नए जोड़ों के लिए अत्यंत लोकप्रिय तीर्थ स्थल बन गया है।

मंदिर की वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य

त्रियुगीनारायण मंदिर की प्राचीन वास्तुकला अत्यंत आकर्षक है। मंदिर पत्थरों से बना हुआ है और हिमालय की गोद में बसा होने के कारण यहां का वातावरण शांत और दिव्य है। मंदिर परिसर में भगवान विष्णु, शिव और पार्वती की मूर्तियां स्थापित हैं। आसपास बर्फ से ढके पहाड़ और घने जंगल इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

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नए जोड़ों के लिए विशेष आकर्षण

त्रियुगीनारायण मंदिर नए विवाहित जोड़ों के लिए बेहद खास है। यहां दर्शन करने के लिए अक्सर लंबी लाइनें लगती हैं। जोड़े यहां आकर शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर हवन करते हैं और अखंड ज्योति की राख को अपने साथ ले जाते हैं। मान्यता है कि इस राख से वैवाहिक जीवन में प्रेम, समझ और सुख बना रहता है।

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त्रियुगीनारायण मंदिर की मान्यता

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शिव-पार्वती के दिव्य प्रेम और विवाह की अमर गाथा का साक्षी है। यहां आने वाले भक्तों को मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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त्रियुगीनारायण मंदिर उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अपने वैवाहिक जीवन को मजबूत और सुखमय बनाना चाहते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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