Sunderkand path rules: सुंदरकाण्ड का पाठ कब करना चाहिए और कब नहीं? जान लें नियम भी
What is the right time to chant Sunderkand: सुंदरकाण्ड का पाठ यूं तो प्रतिदिन किया जा सकता है। अगर रोज पाठ करना संभव नहीं है तो, सुंदरकाण्ड का पाठ 11, 21, 31 और 41 दिन तक करना उत्तम माना जाता है।

Sunderkand ka path kab kare aur kab nahi: हिंदू धर्म में सुंदरकाण्ड गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान माना जाता है। सुंदरकाण्ड में कुल 526 चौपाइयां, 3 श्लोक और 60 दोहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, लंका के सुंदर पर्वत पर हनुमान जी ने अशोक वाटिका में माता सीता भगवान श्रीराम की मुद्रिका दी थी, जिसके चलते इनका नाम सुंदरकाण्ड पड़ा। मान्यता है कि सुंदरकाण्ड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। कई लोग सुंदरकाण्ड का पाठ प्रतिदिन, तो कुछ मंगलवार या शनिवार को करते हैं।
जानें सुंदरकाण्ड का पाठ कब करना चाहिए और कब नहीं, जानें इस पाठ को करने के नियम और लाभ-
सुंदरकाण्ड का पाठ कब करना चाहिए: हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सुंदरकाण्ड का पाठ सप्ताह में किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार, शनिवार और पूर्णिमा तिथि का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। पाठ हमेशा ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 बजे से 5 बजे के बीच और शाम को संध्याकाल (शाम 4 बजे-7 बजे के बीच) करना चाहिए।
सुंदरकाण्ड का पाठ कब नहीं करना चाहिए: हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, सुंदरकाण्ड एक पवित्र अनुष्ठान है, लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं, जब सुंदरकाण्ड का पाठ करने से बचना चहिए। मानसिक व शारीरिक रूप से अशुद्ध महसूस होने पर पाठ नहीं करना चाहिए। अगर मन में कोई विकार या चिंता है तो पाठ करने से पहले उसे शांत करना चाहिए। सोने से ठीक पहले, देर रात या आलस की स्थिति में पाठ नहीं करना चाहिए।
सुंदरकाण्ड पाठ करने के लाभ: सुंदरकाण्ड का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। हनुमान जी की विशेष कृपा मिलती है और संकटों से मुक्ति मिलती है। पाठ करने से कष्टों और रोगों का नाश होता है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
सुंदरकाण्ड पाठ के नियम: सुंदरकाण्ड का पाठ शुरू करने से पूजा घर की साफ-सफाई करें। पाठ प्रारंभ करने से पहले भगवान श्रीगणेश का ध्यान लगाएं। पूजा स्थल पर हनुमान जी की प्रतिमा के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता की भी प्रतिमा लगाएं। पूजा के दौरान हनुमान जी के सामने घी का दीपक जलाएं और बजरंगबली को फल-फूल और मिठाई आदि जरूर अर्पित करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




साइन इन