रिश्तेदार के मौत का बहाना बनाकर छुट्टी लेना सही या गलत, प्रेमानंद जी महाराज से जानें
आज के समय में नौकरीपेशा लोगों की एक आम समस्या है, ऑफिस से छुट्टी लेना। कई बार सच बोलकर छुट्टी मांगने पर नहीं मिलती, लेकिन अगर रिश्तेदार की मौत या किसी गंभीर बीमारी का बहाना बनाने से तुरंत मंजूरी मिल जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह झूठ बोलना सही है या गलत?

आज के समय में नौकरीपेशा लोगों की एक आम समस्या है, ऑफिस से छुट्टी लेना। प्राइवेट जॉब में तो यह और भी मुश्किल हो जाता है। कई बार सच बोलकर छुट्टी मांगने पर नहीं मिलती, लेकिन अगर रिश्तेदार की मौत या किसी गंभीर बीमारी का बहाना बनाने से तुरंत मंजूरी मिल जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह झूठ बोलना सही है या गलत? क्या यह पाप है? वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग में इस सवाल का जवाब दिया है।
भक्त का सवाल और महाराज जी की हंसी भरी प्रतिक्रिया
प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में एक भक्त ने कहा – 'महाराज जी, मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं। जरूरी काम के लिए सच बोलकर छुट्टी मांगता हूं तो नहीं मिलती, लेकिन अगर दादी, नानी, फूफा या किसी रिश्तेदार की मौत का बहाना बनाता हूं, तो तुरंत छुट्टी मिल जाती है। कई बार तो एक ही रिश्तेदार को 3-4 बार मार चुका हूं। क्या यह झूठ बोलकर छुट्टी लेना पाप है?'
यह सुनते ही प्रेमानंद जी महाराज जोर से हंस पड़े। सभी भक्त भी हंसने लगे। फिर महाराज जी ने गंभीर होकर कहा – 'ये कलियुग का प्रभाव है। झूठइ लेना, झूठइ देना, झूठइ भोजन, झूठ चबेना।' यानी आज का समय ऐसा है, जहां झूठ हर जगह घुस गया है – बातों में, कामों में, रिश्तों में भी। महाराज जी ने हंसते हुए लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि झूठ बोलना पाप है। सांसारिक जीवन में झूठ बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि यह आत्मा पर दाग लगाता है।
झूठ बोलना क्यों है पाप?
महाराज जी कहते हैं कि झूठ की कोई छोटी-बड़ी कैटेगरी नहीं होती है। चाहे छुट्टी लेने के लिए बोलें, चाहे किसी और काम के लिए, झूठ झूठ ही है। और मौत का झूठ बोलना तो और भी भयानक है। मौत का नाम लेकर झूठ बोलने से उस आत्मा को भी कष्ट पहुंचता है, जिसका नाम लिया जा रहा है। गरुड़ पुराण में लिखा है कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति नरक की यातनाएं भोगता है। छोटा सा फायदा लेने के लिए इतना बड़ा पाप नहीं करना चाहिए। झूठ से थोड़ी देर की सुविधा मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में यह दुख और पछतावा लाता है।
कब झूठ बोलना पाप नहीं माना जाता?
प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट किया कि सांसारिक कामों के लिए झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में झूठ माफ किया जा सकता है। किसी की जान बचाने के लिए झूठ बोलने से पाप नहीं लगता है। भगवान की भक्ति, पूजा, दर्शन या भागवत कार्यों के लिए झूठ बोला जा सकता है।
महाराज जी कहते हैं 'भागवत कार्यों में झूठ बोलने से कोई पाप नहीं, लेकिन व्यक्तिगत या सांसारिक लाभ के लिए झूठ से दूर रहना चाहिए।' यानी अगर छुट्टी लेकर सत्संग या भजन करने जा रहे हैं, तो वह झूठ पाप नहीं, बल्कि भक्ति का हिस्सा बन जाता है। लेकिन सिर्फ आराम या व्यक्तिगत काम के लिए मौत का बहाना बनाना गलत है।
सही तरीका क्या है?
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जीवन की हर परिस्थिति का डटकर सामना करें। सत्य का साथ कभी मत छोड़ें। अगर ऑफिस में छुट्टी नहीं मिल रही है, तो नाम जप करें, राधा-राधा का स्मरण करें, भगवान खुद रास्ता बना देंगे। महाराज जी कहते हैं कि राधा नाम की शरण में आने से झूठ की जरूरत ही नहीं पड़ती है। रोजाना हनुमान चालीसा, राधा नाम जप और सत्संग से मन शुद्ध होता है और जीवन में सत्य की शक्ति आती है।
झूठ की एक छोटी सी आदत जीवन भर का दुख देती है। छोटे-छोटे झूठ भी आत्मा को दूषित करते हैं। ऐसे में झूठ से बचना चाहिए और सत्य को अपनाना चाहिए। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि भक्ति मार्ग पर चलने से हम कलियुग के प्रभाव से बच जाएंगे।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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