does punya reduce when small people touch your feet know by premanand ji maharaj क्या छोटे लोगों के द्वारा प्रणाम करने या पैर छूने से बड़ों का पुण्य घटता है? प्रेमानंद महाराज से जानिए
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क्या छोटे लोगों के द्वारा प्रणाम करने या पैर छूने से बड़ों का पुण्य घटता है? प्रेमानंद महाराज से जानिए

भारतीय संस्कृति और विशेष तौर पर हिंदू धर्म में बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि, कई लोगों का यह मानना भी है कि छोटे जब बड़ों के पैर छूते हैं, तो भले ही उन्हें आशीर्वाद मिलता है, लेकिन इससे बड़ों-बुजुर्गों का पुण्य कम होने लगता है।

Sun, 7 Dec 2025 12:09 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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क्या छोटे लोगों के द्वारा प्रणाम करने या पैर छूने से बड़ों का पुण्य घटता है? प्रेमानंद महाराज से जानिए

भारतीय संस्कृति और विशेष तौर पर हिंदू धर्म में बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि, कई लोगों का यह मानना भी है कि छोटे जब बड़ों के पैर छूते हैं, तो भले ही उन्हें आशीर्वाद मिलता है, लेकिन इससे बड़ों-बुजुर्गों का पुण्य कम होने लगता है। यह सवाल एक भक्त ने संत श्री प्रेमानंद जी महाराज से भी किया।

पैर छूना पुण्य का आदान-प्रदान

महाराज जी कहते हैं कि जब कोई छोटा आपके पैर छूता है तो वह आपका सम्मान करता है, आपका आशीर्वाद लेता है। बदले में उसकी श्रद्धा आपके पास आती है और आपका आशीर्वाद उसके पास जाता है। यह पुण्य का लेन-देन है, इसमें किसी का कुछ घटता नहीं, दोनों का पुण्य बढ़ता है। जैसे नदी में पानी डालो तो नदी नहीं घटती, उल्टा बढ़ती है – वैसे ही आशीर्वाद देने से पुण्य कभी नहीं घटता, बढ़ता ही है।

अहंकार ही पुण्य को खाता है, प्रणाम नहीं

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, जिस दिन आपने मन में सोचा अरे यह छोटा सा बच्चा या गरीब मेरे पैर छू रहा है, इससे मेरा पुण्य चला जाएगा, उसी दिन आपका अहंकार आपके सारे पुण्य को खा गया। पुण्य तो विनम्रता से बढ़ता है। जितना आप झुकेंगे, जितना आशीर्वाद देंगे, उतना ही ऊपर वाला आपको पुण्य भरेगा। जो पैर छूने नहीं देता, वह अपने पुण्य का दरवाजा खुद बंद कर लेता है।

प्रणाम लेने से पुण्य बढ़ता है

महाराज जी बताते हैं कि शास्त्रों में साफ लिखा है, जिसके पैर छुए जाते हैं, उसका पुण्य सौ गुना बढ़ता है। श्रीकृष्ण ने भी सुदामा के पैर धोए थे। गुरु अपने शिष्य से प्रणाम लेते हैं और उनका पुण्य बढ़ता है। माता-पिता बच्चों से आशीर्वाद लेते हैं, उनका पुण्य बढ़ता है। यह परंपरा पुण्य घटाने की नहीं, पुण्य बांटने और बढ़ाने की है।

प्रणाम लेने का सही तरीका

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जब कोई आपके पैर छूने आए तो मन में सोचें राधे-राधे, यह तो राधा-कृष्ण ने अपना रूप भेजा है। फिर हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर आशीर्वाद दें – राधा-कृष्ण तुम्हें सुखी रखें। यह आशीर्वाद आपके पास सौ गुना होकर लौटेगा। जितने लोग आपके पैर छूएंगे, उतना ही आपका पुण्य बढ़ेगा। और एक दिन ऐसा आएगा कि स्वयं राधा-कृष्ण आपके पैर छूने आएंगे।

महाराज जी कहते हैं कि पुण्य कोई बैंक का बैलेंस नहीं जो घट जाए। पुण्य तो नदी है – जितना बांटेंगे, उतना बढ़ेगा। पैर छूने वालों को कभी मत रोकें, उनका प्रणाम आपका सबसे बड़ा पुण्य है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।