सुबह उठने के बाद तुरंत बोलें ये मंत्र, पूरे दिन बनी रहेगी पॉजिटिविटी
सुबह आंख खुलते ही अगर मन में सकारात्मकता का संचार हो जाए तो पूरा दिन शुभ और ऊर्जावान बीतता है। धर्म शास्त्रों के मुताबिक, सुबह उठते ही कुछ विशेष मंत्र बोलना जरूर बोलना चाहिए। आइए जानते हैं

हमारा दिन कैसा बीतेगा, यह काफी हद तक सुबह के पहले कुछ पलों पर निर्भर करता है। जैसे ही आंख खुलती है, अगर मन में सकारात्मकता का संचार हो जाए तो पूरा दिन शुभ और ऊर्जावान बीतता है। धर्म शास्त्रों के मुताबिक, सुबह उठते ही कुछ विशेष मंत्र बोलना जरूर बोलना चाहिए। ये मंत्र ना केवल मन को शांत करते हैं, बल्कि पूरे दिन पॉजिटिव एनर्जी बनाए रखते हैं, नकारात्मकता दूर करते हैं और भगवान की कृपा प्राप्त कराते हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ चमत्कारी मंत्र बताने जा रहे हैं, जिन्हें बिस्तर पर बैठे-बैठे या उठते ही बोलना चाहिए।
कराग्रे वसते लक्ष्मी
सुबह सबसे पहले दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर देखें और यह मंत्र बोलें:
कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमूले सरस्वती।
करमध्ये तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ: हथेली के अग्र भाग में लक्ष्मी, मूल भाग में सरस्वती और बीच में गोविंद (श्री कृष्ण या विष्णु) विराजमान हैं। इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले हाथों का दर्शन करना चाहिए।
यह मंत्र बोलते ही दिन की शुरुआत धन, विद्या और भगवान की कृपा के साथ होती है। इससे मन में आलस्य दूर होता है और पूरे दिन कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यह मंत्र इतना शक्तिशाली है कि सदियों से हर घर में इसे बोलने की परंपरा चली आ रही है।
भूमि को प्रणाम करने का मंत्र
उठकर सबसे पहले पैर जमीन पर रखने से पहले यह मंत्र बोलें:
समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तन मण्डिते।
विष्णुपत्नी नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
अर्थ: हे समुद्र वस्त्र धारण करने वाली, पर्वत जैसे स्तनों से सुशोभित, भगवान विष्णु की पत्नी माता भूमि! मैं आपको नमस्कार करता हूं। मेरे पैरों के स्पर्श को क्षमा करें।
यह मंत्र बोलकर माता भूमि से क्षमा मांगने से अहंकार दूर होता है और विनम्रता आती है। इससे पूरा दिन सकारात्मकता बनी रहती है, क्योंकि हम प्रकृति और धरती मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इस मंत्र से पर्यावरण के प्रति भी सम्मान बढ़ता है और मन में शांति बनी रहती है।
सूर्य देव और गायत्री मंत्र
स्नान करने से पहले या सूर्योदय के समय यह सबसे शक्तिशाली गायत्री मंत्र बोलें:
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
इस मंत्र का कम से कम 11, 21 या 108 बार जाप करें। यह मंत्र बुद्धि, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। गायत्री मंत्र को वेदों की माता कहा जाता है। सुबह इसे बोलने से मन की सभी नकारात्मकता दूर हो जाती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और पूरा दिन अच्छे निर्णय लेने में मदद मिलती है। ऑफिस, बिजनेस या पढ़ाई में सफलता चाहिए, तो यह मंत्र अनिवार्य है।
राधा-कृष्ण या अपने इष्ट देव के मंत्र से दिन की शुरुआत
अगर आप भक्ति मार्ग पर हैं तो सुबह सबसे पहले अपने इष्ट देव का नाम लें। जैसे:
- श्री कृष्ण भक्त: हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
- शिव भक्त: ॐ नमः शिवाय
- हनुमान भक्त: ॐ हं हनुमते नमः
- दुर्गा भक्त: ॐ दुं दुर्गायै नमः
- राधा भक्त: राधे राधे
सुबह उठते ही 108 बार इष्ट का नाम जपें। इससे मन में दिव्य प्रेम और पॉजिटिविटी का संचार होता है। दिन भर खुशी बनी रहती है।
ये मंत्र बोलने में सिर्फ 5-10 मिनट लगते हैं, लेकिन इनका प्रभाव पूरे दिन रहता है। सुबह इन मंत्रों से शुरुआत करने से तनाव कम होता है, रिश्तों में मधुरता आती है, काम में मन लगता है और अप्रत्याशित सफलताएं मिलती हैं। अगर आप इसे नियमित करेंगे, तो कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होगा।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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