somvati amavasya 2026 ke din pipal ki kitni aur kyu ki jati hai parikrama tulsi pujan ka mahatav सोमवती अमावस्या पर क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की परिक्रमा? जान लें तुलसी पूजन का महत्व भी, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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सोमवती अमावस्या पर क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की परिक्रमा? जान लें तुलसी पूजन का महत्व भी

Somvati amavasya 2026 pipal ki puja: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पर पीपल और तुलसी पूजन का खास महत्व है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां पीपल के पेड़ की पूजा करने के साथ ही उसकी परिक्रमा भी करती हैं। जानें सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की परिक्रमा और तुलसी पूजन का महत्व।

Mon, 15 June 2026 09:31 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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सोमवती अमावस्या पर क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की परिक्रमा? जान लें तुलसी पूजन का महत्व भी

Somvati amavasya pipal and Tulsi puja 2026: आज 15 जून 2026, सोमवार को सोमवती अमावस्या और अधिक मास (मलमास) का आखिरी दिन है। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तब सोमवती अमावस्या का संयोग बनता है। सुहागिन स्त्रियां इस दिन पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। इसके अलावा सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करती हैं। इस दिन तुलसी पूजा का भी खास महत्व है। सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की परिक्रमा क्यों की जाती है और तुलसी पूजन का क्या फल मिलता है।

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पीपल की 108 परिक्रमा करने का महत्व:

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार,पीपल के वृक्ष की जड़ों में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी भाग में भगवान शिव का वास होता है। मान्यता है कि पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सुहागिन स्त्रियां पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए वृक्ष पर 108 बार कच्चा सूत या धागा लपेटती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पति को लंबी आयु, अच्छी सेहत के साथ सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। वैवाहिक जीवन से जुड़ी बाधाएं खत्म होती हैं।

सोमवती अमावस्या पर पीपल की क्यों की जाती है 108 परिक्रमा:

सोमवती अमावस्या पर तुलसी पूजन का महत्व: सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार, प्राचीन काल में सोना नाम की एक पतिव्रता स्त्री के पति का निधन हो गया था। पति को फिर से जीवित करने के लिए उसने श्रद्धा और भक्तिपूर्वक पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा की और प्रार्थना की। सोना की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी-देवताओं ने उसके पति को फिर से जीवनदान दे दिया। तभी से सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है।

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सोमवती अमावस्या पर तुलसी पूजन का महत्व:

सोमवती अमावस्या पर तुलसी पूजन परम कल्याणकारी माना गया है। हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी माता की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अमावस्या के दिन तुलसी के पेड़ पर सुबह और शाम घी का दीपक जलाने से दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी का घर पर स्थाई वास होता है।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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