som pradosh vrat date today 16 march 2026 puja shubh muhurat shivji 108 naam jaap Som Pradosh Vrat 2026: बन रहे हैं ये 3 शुभ योग, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, करें भगवान शिव के 108 नामों का जाप, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Som Pradosh Vrat 2026: बन रहे हैं ये 3 शुभ योग, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, करें भगवान शिव के 108 नामों का जाप

आज 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत है। इस खास दिन पर भगवान शिव की आराधना की जाती है। नीचे विस्तार से जानें कि आज का ये व्रत और भी खास क्यों हो गया है? साथ ही नोट करें आज की पूजा के शुभ मुहूर्त के साथ-साथ पूजा की आसान सी विधि…

Mon, 16 March 2026 07:33 AMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Som Pradosh Vrat 2026: बन रहे हैं ये 3 शुभ योग, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, करें भगवान शिव के 108 नामों का जाप

Som Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत हैं जोकि भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इनमें से एक है प्रदोष व्रत। सनातन धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाए और व्रत रखा जाए तो जिंदगी से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत की खास बात ये है कि ये जिस दिन पड़ता है, उसका नाम उसी हिसाब से होता है। आज सोमवार है और तो आज इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव के नाम होता है। ऐसे में सोम प्रदोष का महत्व और भी बढ़ जाता है। बता दें कि ये व्रत हर महीने में दो बार आता है। महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। नीचे विस्तार से जानेंगे कि आज के लिए प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? साथ ही जानेंगे इस व्रत की पूजा की आसान सी विधि को।

प्रदोष व्रत पर बन रहे ये योग

आज का दिन बहुत ही अच्छा माना जा रहा है क्योंकि आज एक नहीं दो नहीं बल्कि कई शुभ योग बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के हिसाब से आज शिव योग है। इसी के साथ सिद्ध और शुक्रादित्य योग भी आज बन रहे हैं। माना जाता है कि इन योगों में की पूजा का लाभ जरूर मिलता है। इस

पूजा का शुभ मुहूर्त

चैत्र का महीना हर मायने में खास होता है। हालांकि खरमास शुरु हो चुके हैं लेकिन इसी महीने में कई ऐसी चीजें होती हैं जिनका महत्व है। इसी महीने में चैत्र नवरात्रि शुरू होती है। साथ ही इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसके अलावा गुड़ी पड़वा का त्योहार भी मनाया जाता है। बात की जाए आज प्रदोष व्रत की पूजा की तो इसके लिए शाम का समय सबसे सही माना जाता है। इस दौरान पूजा का शुभ मुहूर्त 6:48 बजे से लेकर 9:12 बजे तक है।

त्रयोदिशी तिथि की शुरुआत

पंचांग के हिसाब से इस बार सोम प्रदोष व्रत पर द्धादशी और त्रयोदिशी तिथि का संयोग बन रहा है। आज सुबह त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 9:40 बजे से लेकर कल यानी 17 मार्च को 9:23 बजे तक रहने वाली है।

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प्रदोष व्रत की पूजा

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।

2. शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा घर में शिवजी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रख दें।

3. धूपबत्ती और दीया जलाकर पूजा की शुरुआत करें।

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4. शिवलिंग का जलाभिषेक करें। बेलपत्र और धतूरा अर्तिप करें। इसके अलावा शिवलिंग का गंगाजल, दूध, घी, दही और शहद से अभिषेक करें।

5. भोग लगाने के बाद शिव चालीसा का पाठ करें। आज के दिन प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।

6. सबसे आखिरी में ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। भगवान शिव के 108 नामों का जाप भी फलदायी होगा। बाद में भूल-चुक के लिए भगवान शिव से माफी मांग लें।

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भगवान शिव के 108 नाम

ॐ महाकाल नमः

ॐ रुद्रनाथ नमः

ॐ भीमशंकर नमः

ॐ नटराज नमः

ॐ प्रलेयन्कार नमः

ॐ भीमेश्वर नमः

ॐ विषधारी नमः

ॐ बम भोले नमः

ॐ ओंकार स्वामी नमः

ॐ ओंकारेश्वर नमः

ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः

ॐ भोले बाबा नमः

ॐ शिवजी नमः

ॐ चंद्रमोली नमः

ॐ डमरूधारी नमः

ॐ चंद्रधारी नमः

ॐ दक्षेश्वर नमः

ॐ घ्रेनश्वर नमः

ॐ मणिमहेश नमः

ॐ अनादी नमः

ॐ अमर नमः

ॐ आशुतोष महाराज नमः

ॐ विश्वनाथ नमः

ॐ अनादिदेव नमः

ॐ उमापति नमः

ॐ गोरापति नमः

ॐ गणपिता नमः

ॐ विलवकेश्वर नमः

ॐ भोलेनाथ नमः

ॐ कैलाश पति नमः

ॐ भूतनाथ नमः

ॐ नंदराज नमः

ॐ नन्दी की सवारी नमः

ॐ ज्योतिलिंग नमः

ॐ मलिकार्जुन नमः

ॐ शम्भु नमः

ॐ नीलकंठ नमः

ॐ महाकालेश्वर नमः

ॐ त्रिपुरारी नमः

ॐ त्रिलोकनाथ नमः

ॐ त्रिनेत्रधारी नमः

ॐ बर्फानी बाबा नमः

ॐ लंकेश्वर नमः

ॐ अमरनाथ नमः

ॐ केदारनाथ नमः

ॐ मंगलेश्वर नमः

ॐ अर्धनारीश्वर नमः

ॐ नागार्जुन नमः

ॐ जटाधारी नमः

ॐ नीलेश्वर नमः

ॐ जगतपिता नमः

ॐ मृत्युन्जन नमः

ॐ नागधारी नमः

ॐ रामेश्वर नमः

ॐ गलसर्पमाला नमः

ॐ दीनानाथ नमः

ॐ सोमनाथ नमः

ॐ जोगी नमः

ॐ भंडारी बाबा नमः

ॐ बमलेहरी नमः

ॐ गोरीशंकर नमः

ॐ शिवाकांत नमः

ॐ महेश्वराए नमः

ॐ महेश नमः

ॐ संकटहारी नमः

ॐ महेश्वर नमः

ॐ रुंडमालाधारी नमः

ॐ जगपालनकर्ता नमः

ॐ पशुपति नमः

ॐ संगमेश्वर नमः

ॐ अचलेश्वर नमः

ॐ ओलोकानाथ नमः

ॐ आदिनाथ न

ॐ देवदेवेश्वर नमः

ॐ प्राणनाथ नमः

ॐ शिवम् नमः

ॐ महादानी नमः

ॐ शिवदानी नमः

ॐ अभयंकर नमः

ॐ पातालेश्वर नमः

ॐ धूधेश्वर नमः

ॐ सर्पधारी नमः

ॐ त्रिलोकिनरेश नमः

ॐ हठ योगी नमः

ॐ विश्लेश्वर नमः

ॐ नागाधिराज नमः

ॐ सर्वेश्वर नमः

ॐ उमाकांत नमः

ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः

ॐ त्रिकालदर्शी नमः

ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः

ॐ गिरजापति नमः

ॐ भद्रेश्वर नमः

ॐ त्रिपुनाशक नमः

ॐ निर्जेश्वर नमः

ॐ किरातेश्वर नमः

ॐ जागेश्वर नमः

ॐ अबधूतपति नमः

ॐ भीलपति नमः

ॐ जितनाथ नमः

ॐ वृषेश्वर नमः

ॐ भूतेश्वर नमः

ॐ बैजूनाथ नमः

ॐ नागेश्वर नम

ॐ महादेव नमः

ॐ गढ़शंकर नमः

ॐ मुक्तेश्वर नमः

ॐ नटेषर नमः

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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