shaniwar vrat niyam How and how many Saturday fast should be observed Know importance and benefits कैसे और कितने शनिवार के व्रत करना चाहिए? जानिए नियम और लाभ, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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कैसे और कितने शनिवार के व्रत करना चाहिए? जानिए नियम और लाभ

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायाधीश कहा गया है। ये पुण्य और पाप के आधार पर फल देते हैं। मान्यता है कि जिस किसी जातक पर शनि देव प्रसन्न रहते हैं, उसके कोई भी दुख और कष्ट छू तक नहीं पाता है। इसलिए लोग शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं।

Sat, 20 Dec 2025 12:11 PMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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कैसे और कितने शनिवार के व्रत करना चाहिए? जानिए नियम और लाभ

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हर दिन किसी ना किसी ग्रह और देवी-देवता को समर्पित होता है। इसी तरह शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायाधीश कहा गया है। ये पुण्य और पाप के आधार पर फल देते हैं। मान्यता है कि जिस किसी जातक पर शनि देव प्रसन्न रहते हैं, उसके कोई भी दुख और कष्ट छू तक नहीं पाता है। इसलिए लोग शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं। इन्हीं उपायों में से एक है शनिवार के दिन व्रत रहना। लेकिन अक्सर लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि कैसे और कितने शनिवार व्रत रखने से लाभ प्राप्त होता है? चलिए आज हम आपको शनिवार व्रत रखने के नियम व महत्व के बारे में बताएंगे।

कब से शुरू करें व्रत
ज्योतिषियों के मुताबिक शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए और दुःख और निर्धनता दूर करने के लिए शनिवार के दिन व्रत रखने का विधान है। शनि से पीड़ित व्यक्ति को अपने कल्याण के लिए शनिवार का व्रत जरूर रखना चाहिए। वैसे तो शनिवार का व्रत कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन निर्दोष शनिवार से शनि का व्रत प्रारम्भ करना सर्वोत्तम माना गया है। मान्यतानुसार, वैसे तो किसी भी वार का व्रत, शुक्ल पक्ष में प्रथम बार जब वह वार आए तभी से आरंभ करना शास्त्र सम्मत है। ऐसे शनिवार का व्रत भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से प्रारम्भ किया जा सकता है। इसके अलावा श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करने का विशेष महत्व माना गया है। इसके अलावा शनिवार का व्रत शनि प्रदोष से भी आरंभ किया जा सकता है।

कितने शनिवार व्रत रखें?

वहीं, धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कम से कम 4 और अधिक से अधिक 33 शनिवार का व्रत करना उत्तम माना जाता है। कहा जाता है कि इतने दिन व्रत रखने से दु:ख, रोग आदि दूर होते हैं।

शनिवार व्रत की विधि और नियम
जो साधक शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं या रखते हैं, उन्हें संयम के साथ पूरे पूरे श्रद्धा भाव से नियमों का पालन करना होगा। शनिवार व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले स्नान करें और फिर स्वच्छ कपड़े पहनकर करनी चाहिए। इस दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। व्रति को शनि देव की पूजा करनी चाहिए, जिसमें काले तिल, काले कपड़े, काली उरद दाल, तिल तेल आदि अर्पित किए जाते हैं। साथ ही, शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करना चाहिए।

इसके अलावा इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा भी विधान है। ऐसे में इस दिन पीपल के नीचे दीपक जलाकर और उसके तने में धागा बांधकर पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताए गए 10 शनि नामों का ध्यान करते हुए पीपल के वृक्ष पर सूत लपेटते हुए वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें।

शनि के 10 नाम
पूजन के दौरान शनि के इन 10 नामों का उच्चारण करें- कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर।

व्रती को दिनभर उपवासी रहना चाहिए और केवल एक बार, सूर्यास्त के बाद, हल्का शाकाहारी भोजन करना चाहिए। इस भोजन में तिल, उड़द दाल या अन्य काले रंग की वस्तुएं शामिल होनी चाहिए। नमक का सेवन इस दिन वर्जित है।

शनिवार व्रत के लाभ
शनिवार व्रत के कई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ माने जाते हैं। इस दिन व्रत रखने से शनि के दुष्प्रभाव कम किया जा सकता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करता है। इस दिन व्रत रखकर व्रति आत्म-नियंत्रण, संयम और भक्ति की भावना को बढ़ाता है। इसके अलावा धन और समृद्धि में लाभ होता है। शनिवार के व्रत से शनि की ढैय्या अथवा साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव से और गोचरीय अशुभ परिणामो से मुक्ति मिलती है, रक्षा होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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