Shani Nakshatra parivartan: 9 अक्टूबर तक इन 3 राशियों पर रहेगी शनि की तिरछी नजर, रहें सतर्क
Shani Nakshatra parivartan: शनि इस समय बुध के रेवती नक्षत्र में विराजमान हैं। शनि के नक्षत्र परिवर्तन का समय कुछ राशियों के लिए कष्टकारी साबित हो सकता है। जानें शनि आने वाले 6 महीने किन राशियों पर रखेंगे तिरछी नजर।

Shani Nakshatra parivartan 2026: न्याय देवता शनि 17 मई 2026 को रेवती नक्षत्र में आए थे और 09 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जब भी अपनी राशि या नक्षत्र परिवर्तन करते हैं, तो मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ता है। जन्मकुंडली में शनि की स्थिति के आधार पर जातक को शुभ या अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शनि के रेवती नक्षत्र परिवर्तन का समय कई राशियों के लिए कष्टकारी साबित हो सकता है। शनि नक्षत्र परिवर्तन की अवधि शनि ढैय्या से पीड़ित राशियों सिंह और धनु के लिए खासतौर पर अशुभ माना जा रहा है। इसके अलावा मिथुन राशि वालों को भी इस समय सतर्क रहने की जरूरत है।
जानें शनि नक्षत्र परिवर्तन से इन 3 राशियों को किस तरह के फल मिलेंगे।
1. मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक चुनौतियां ला सकता है। इसके साथ ही कामकाज में अड़चनें आ सकती हैं। लव लाइफ में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। काम का बोझ बढ़ने से शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। खर्च की अधिकता के कारण धन की कमी का अनुभव कर सकते हैं।
2. सिंह राशि- सिंह राशि वालों को इस समय धन से जुड़े मामलों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खर्चों बढ़ने के कारण आपकी आर्थिक स्थिति हिल सकती है और बजट प्रभावित हो सकता है। पारिवारिक रिश्तों पर भी नजर रखें, वरना मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।
3. धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए शनि नक्षत्र परिवर्तन का समय कष्टकारी हो सकता है। शनि ढैय्या के प्रभाव के कारण इस समय धन संबंधी मामलों में निराशा हाथ लग सकती है। मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। जीवनसाथी के साथ रिश्ता खराब हो सकता है। घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है। किसी भी काम को जल्दबाजी में करने से बचें।
शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय-
- शनि के मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का नियमित रूप से जाप करें।
2. शनिवार को शनि मंदिर जाकर दर्शन करें।
3. काले वस्त्र, सरसों का तेल, काली उड़द आदि का दान करें।
4. पीपल के वृक्ष पर शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 बार उसकी परिक्रमा करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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