शनि, मंगल समेत तीन बड़े ग्रहों की तिगड़ी मीन राशि में, पढ़ें किन राशियों के लिए लाभ
Shani mangal surya tigadi:सूर्य, शनि, मंगल युति बहुत खास मानी जाती है,आमतौर पर ऐसा नहीं होता है, जब इन ग्रहों को एक साथ एक राशि में देखा जाए। इन तीन ग्रहों की तिगड़ी से किन राशियों पर क्या असर होगा, यहां देखें

सूर्य, शनि, मंगल युति बहुत खास मानी जाती है,आमतौर पर ऐसा नहीं होता है, जब इन ग्रहों को एक साथ एक राशि में देखा जाए। मंगल और सूर्य दोनों ही एनर्जी के कारक माने जाते हैं। सूर्य आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है और मंगल एनर्जी और हिम्मत का अगर ये दोनों एक साथ हो औरइनके साथ शनि जो मेहनत और अनुशासन से जुड़ा है, तो इन तीनों ग्रहों का कॉन्बिनेशन बहुत खास हो जाता है। आपको बता दें कि 2 अप्रैल को मंगल का गोचर हो गया था, शनि पहले से ही इस राशि में थे और सूर्य 14 मार्च को मीन राशि में थे। इस प्रकार इन तीनों ग्रह को तिकड़ी मीन राशि में बनी रहेगी। ये तीनों बड़े ग्रह हैं और ऐसे में तीनों ग्रहों की तिगड़ी का असर राशियों पर क्या होगा। ये तीन ग्रह 14 अप्रैल एक साथ ऐसे ही रहने वाले हैं। तो यहां पढ़ें इनका किन राशियों पर होगा अच्छा असर
किन राशियों के लिए लाभ के योग
इस योग से मेष राशि के लोगों के लिए अच्छा समय रहेगा, आपको मेहनत के कारण करियर में अच्छे मौके मिल सकते हैं। आपके लिए ऑफिस में अच्छा स्कोप रहेगा। आर्थिक लाइफ में भी लाभ के योग बन रहे हैं। पुराने काम आपके बनेंगे।
धनु राशि वालों के लिए बैलेंस का दिन रहेगा। आपको प्रोफेशनल लाइफ में अच्छा मौका मिल सकता है। नए कनेक्शन आपकी इनकम बढ़ाएंगे। आपको इस समय किसी भी तरह के स्ट्रेस से बचना है।
मीन राशि वालों के लिए समय आपके अंदर गजब का कॉन्फिडेंस लाएगा। आपको प्रोफेशनल लाइफ से लेकर बिजनेस तक में इससे लाभ होगा। नए कनेक्शन आपकी आमदनी बढ़ाएंगे और कॉन्फिडेंस से आप इन्हें आगे तक लेकर जाएंगे।
मंगल ग्रह को जानें
मंगल को लाइफ में बल, धैर्य और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। यह पुरुष ग्रह है और लाल रंग, ब्लड, दक्षिण दिशा का स्वामी, अग्नि तत्व वाला, तथा पित्त प्रकृति का है। यह तमोगुणी, युवावस्था वाला, साहसी, अति चपल, उग्र स्वभाव पापग्रह माना जाता है। मंगल मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामी है। मकर राशि में मंगल उच्च होता है तथा कर्क राशि में नीच का होता है। मंगल पराक्रम, भूमि, सेना, शत्रु आदि का विशेष कारक माना जाता है। इसके अतिरिक्त साहस, धैर्य, सेनापति, भाई बहन, धातु विद्या, रक्त पात, सामर्थ्य, क्रोध, पित्त विकार, ऑपरेशन, पुत्र, संतान, ताम्र आदि का विचार भी मंगल से किया जाता है। अशुभ होने पर पित्त कारक, अग्निभय, ज्वर, रक्त विकार, चोट, व्रण दुर्घटनादि रोगों का भय होता है। यह एक राशि में अधिकतर 45 दिन तक रहताहै। मंगल को भूमिपुत्र, भौम, अंगारक, रुधिर आदि भी कहते हैं।




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