शनि जयंती पर इन 3 राशियों के लोग जरूर करें शनि देव की पूजा, खत्म होगी जीवन की बाधाएं
हिंदू धर्म में शनि जयंती का खास महत्व होता है। शनि जयंती हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था। शनि देव, भगवान सूर्य और छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं।

हिंदू धर्म में शनि जयंती का खास महत्व होता है। शनि जयंती हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन ही शनि देव का जन्म हुआ था। शनि देव, भगवान सूर्य और छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनि शुरू से ही विपरीत स्वभाव के थे। ये क्रूर ग्रह माने जाते हैं। इनकी दृष्टि में जो क्रूरता है, वह इनकी पत्नी के शाप के कारण है। इस साल शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। खास बात यह है कि शनि जयंती इस बार शनिवार को पड़ रही है, जिसे ज्योतिष में बेहद खास संयोग माना जा रहा है। इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। इसके अलावा, इस दिन चंद्रमा का गोचर भी हो रहा है। ऐसे में इसका प्रभाव ग्रहों पर पड़ेगा। शाम के समय चंद्रमा राशि परिवर्तन करेंगे और रात तक वृषभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इसके अलावा यह दिन शनि देव को प्रसन्न करने, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत पाने और शनि दोष को शांत करने के लिए बेहद अहम माना जाता है। साथ ही इनकी पूजा भी कुछ खास राशि के लोगों को जरूर करनी चाहिए। चलिए जानते हैं इस दिन किन राशि के लोगों को शनि देव की पूजा करनी चाहिए।
किन राशि वालों को करनी चाहिए शनि देव की पूजा
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए शनिदेव की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, मेष राशि में शनि नीच स्थिति में होते हैं, जिससे इसके प्रभाव चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए मेष राशि वालों को नियमित रूप से और खासकर शनि जयंती के दिन पूरे विधि-विधान से शनिदेव की आराधना करनी चाहिए, ताकि नकारात्मक प्रभाव कम हों और जीवन में संतुलन बना रहे।
कुंभ और मकर राशि
कुंभ और मकर राशियों के स्वामी ग्रह शनि देव माने जाते हैं, इसलिए इन राशियों पर उनका विशेष प्रभाव रहता है। माना जाता है कि शनि की कृपा इन जातकों पर बनी रहती है। ऐसे में शनि जयंती के दिन कुंभ और मकर राशि के लोगों को विधि-विधान से शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे जीवन में स्थिरता आती है और आने वाली परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
शनि जयंती पर कैसे करें पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और नवग्रहों को नमस्कार करें।
इसके बाद शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और सरसों या तिल के तेल से अभिषेक करें।
शनि मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करना भी लाभकारी माना जाता है।पूजा में तिल, उड़द, काली मिर्च, मूंगफली का तेल, लौंग, तेजपत्ता और काला नमक जैसी वस्तुओं का उपयोग करें।
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करते हुए शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान करें।
दान में काले वस्त्र, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा और तेल आदि चीजें अर्पित की जा सकती हैं।
पूजा के बाद पूरे दिन व्रत रखें और अधिक से अधिक मंत्र जाप करते रहें।
मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
उपाय
साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान शनिदेव व्यक्ति के धैर्य और उसके कर्मों की परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में जीवन में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। हालांकि शनि जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शनि के प्रभाव में कुछ कमी आ सकती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है, उनके लिए भी यह पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। साथ ही शनि चालीसा का पाठ करें और पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान अवश्य दें। इससे शनिदेव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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