Shani Jayanti: जब रावण की लंका में कैद शनि देव को बजरंगबली ने दिलाई मुक्ति, यहां पढ़े पूरी कथा
रावण की लंका में कैद शनि देव को हनुमान जी द्वारा मुक्ति दिलाने की पूरी कथा पढ़ें। शनि जयंती 2026 पर जानिए क्यों हनुमान भक्तों पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है और क्या हैं शुभ उपाय।

16 मई 2026 को ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाएगी। इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है, जो बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा भी राशि परिवर्तन कर रहे हैं, जिससे शनि जयंती का प्रभाव और बढ़ गया है। बजरंगबली की पूजा करने से शनि देव काफी प्रसन्न होते हैं।
शनि देव को एक प्रभावशाली ग्रह माना गया है। मान्यता है कि शनि की दृष्टि से कोई नहीं बच सकता है। यहां तक कि देवता भी नहीं। इस वजह से हर कोई शनि की दृष्टि से हर कोई बचना चाहता है। एक बार रावण ने शनि देव को लंका में कैद कर लिया था। आइए जानते हैं पूरी कथा।
रावण ने क्यों कैद किया शनि देव को?
त्रेता युग की बात है। रावण के पुत्र मेघनाथ के जन्म के समय शनि देव की दृष्टि पड़ने से मेघनाथ अमर नहीं हो पाया। इस बात पर क्रोधित होकर रावण ने शनि देव को अपनी लंका में कैद कर लिया। रावण का मानना था कि शनि देव की कुदृष्टि ही उसके पुत्र के अमरत्व में बाधक बनी। इस प्रकार शनि देव लंका की जेल में बंद हो गए।
हनुमान जी की लंका यात्रा और शनि देव से मुलाकात
जब हनुमान जी सीता माता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने अशोक वाटिका में सीता जी को देखा। वहां से लौटते समय उन्हें एक जेल में बंद एक देवता दिखाई दिए। हनुमान जी ने पूछा, 'आप कौन हैं और यहां कैसे बंद हैं?'
उस देवता ने जवाब दिया, 'मैं शनि देव हूं। रावण ने अपने योगबल से मुझे कैद कर रखा है।' शनि देव ने हनुमान जी से उन्हें छुड़ाने का अनुरोध किया।
हनुमान जी ने कैसे दिलाई शनि देव को मुक्ति
हनुमान जी ने अपनी विशालकाय रूप धारण किया और रावण की जेल तोड़कर शनि देव को मुक्त कर दिया। मुक्ति पाते ही शनि देव ने हनुमान जी का आभार व्यक्त किया और कहा, 'आपने मुझे आजाद किया, इसलिए मैं आपके भक्तों पर कभी कड़ी दृष्टि नहीं डालूंगा।'
हनुमान जी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'कलियुग में मेरी आराधना करने वाले भक्तों को आप अशुभ फल नहीं देंगे।' शनि देव ने यह वचन स्वीकार कर लिया। तभी से शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई, क्योंकि शनि देव हनुमान भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
इस कथा से मिलने वाला संदेश
यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान हनुमान जी ना सिर्फ भक्तों के संकट हरते हैं, बल्कि ग्रहों के दोषों को भी शांत कर सकते हैं। जो लोग साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हैं, उन्हें शनिवार को हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
16 मई 2026 को शनि जयंती पर विशेष उपाय
- सुबह स्नान के बाद हनुमान मंदिर में तेल का दीपक जलाएं।
- शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, काला कपड़ा और लोहे की वस्तु दान करें।
- 'ॐ हं हनुमते नमः' और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्रों का जाप करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
हनुमान जी और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का यह दुर्लभ अवसर है। 16 मई 2026 को शनिवार को पड़ रही शनि जयंती पर सच्चे मन से पूजा करने से जीवन के कई संकटों से मुक्ति मिल सकती है।
16 मई 2026 को ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाएगी। इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है, जो बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग माना जा रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा भी राशि परिवर्तन कर रहे हैं, जिससे शनि जयंती का प्रभाव और बढ़ गया है। बजरंगबली की पूजा करने से शनि देव काफी प्रसन्न होते हैं।




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