शनि मेष गोचर से 2027 मेंबदलेगी शनि साढ़ेसाती, रावण और राजा हरिशचंद्र पर भी आई थी साढ़ेसाती की दशा, पढ़ें उपाय
शनि की साढ़ेसाती से कौन नहीं बच पाया है। राजा हरिशचंद्र से लेकर रावण तक को साढ़ेसाती की दशा झेलनी पड़ी था। आइए जानें उन्हें क्या झेलना पड़ा।

हर राशि पर शनि की साढ़ेसाती 7.5 साल के लिए आती है। शनि कीसाढ़ेसाती में तीन चरण होता हैं। इन तीन चरणों में लोगों को अलग-अलग तरह की परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है। इस साल कुंभ, मीन और मेष राशि में शनि की साढ़ेसाती है। अब शनि की साढ़ेसाती नए साल में बदल जाएगी। साल2027 में शनि जून में मेष राशि में गोचर करेंगे और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी और वृषभ पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। इसके साथ मेष और मीन में साढ़ेसाती रहेगी। आपको बता दें कि शनि स्लो ग्रह हैं और आपको आपके कर्मों के द्वारा जज करते हैं। अगर आप अच्छे कर्म करते हैं तो शनि आपको अच्छे फल देते हैं। आपको परिणाम थोड़े लेट मिलते हैं, लेकिन आपको अच्छे फल मिलेंगे। शनि आप पर नजर रखते हैं।
आपको बताते हैं किन-किन को साढ़ेसाती की दशा झेलनी पड़ी थी।
रावण की दुर्दशा
आपको बता दें कि रावण को छ: शास्त्र और अठारह पुराणों का ज्ञान था। लेकिन उस पर भी शनिसाढ़ेसाती का ही असर था, जो उसका सर्वनाश हुआ। रावण ने साढ़ेसाती से बचने के लिए शनि को दिक्कत दी, लेकिन हनुमान जी ने रक्षा की और वचन मांगा कि जो हनुमान जी की पूजा करेगा वो उनके भक्तों को मैं कष्ट नहीं दूंगा। इसके बाद शनिदेव ने रावण को परिवार सहित नष्ट करने में अपनी कुदृष्टि का भरपूर प्रयोग किया। परिणामस्वरूप श्रीराम की विजय हुई।
विक्रमादित्य की दुर्दशा
पूर्वकाल में हरिश्चन्द्र नामक एक विख्यात चक्रवर्ती राजा हो गये हैं, जो समस्त भूमण्डल के स्वामी और सत्यप्रतिज्ञ थे। एक समय किसी कर्मका फलभोग प्राप्त होने पर उन्हें रज्य से भ्रष्ट होना पड़ा । जिसने युगों का परिवर्तन कर दिया। कथा के अनुसार सूर्यवंश में राजा हरिशचंद्र अयोध्या में हुए थे। उनके द्वार पर एक श्याम पट लगा था, जिसमें मणियों से लिखा हुआ यह लेख था -इस द्वार में मुंह मांगा दान दिया जाएगा। अपने इस वचन के कारण राजा ने अपनी पत्नी और पुत्र को बेचा । फिर अपने को भी बेच दिया। पुण्यात्मा होते हुए भी उन्हें चाण्डालकी दासता करनी पड़ी। वे मुर्दों का कफन लिया करते थे। इतने पर भी नृपश्रेष्ठ हरिश्न्द्र सत्यसे विचलित नहीं हुए। इस प्रकार चाण्डाल की दासता करते उनके अनेक साल व्यतीत हो गए। राजा पर जब शनि की साढ़ेसाती आईतो मयूरका चित्र ही हार को निगल गया। राजा हरिश्चन्द्र को शनि की दशा में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं।
शनि की साढ़ेसाती से बचना चाहते हैं तो क्या करें
हनुमदुपासना, सूर्य-उपासना, शनिचालीसाका पाठ, पीपल के वृक्षको पूजा
ज्योतिषी से परामर्शकर नीलम या जमुनियाका धारण, काले घोड़ेकी नालसे बनी अंगूठीका धारण
शनि-अष्टकका पाठ करें।




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