Quote of the day 16 June 2026 chanakya niti kaise mitra ka sath chhod dena chaiye aaj ka suvichar Quote of the day: ऐसे मित्र का बिना देरी तुरंत साथ छोड़ देना चाहिए, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Quote of the day: ऐसे मित्र का बिना देरी तुरंत साथ छोड़ देना चाहिए, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Quote of the day 16 June 2026: आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से बताया है कि किस मित्र का तुरंत साथ छोड़ देना चाहिए या उसका त्याग कर देना चाहिए। पढ़ें आज का सुविचार।

Tue, 16 June 2026 06:51 AMSaumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Quote of the day: ऐसे मित्र का बिना देरी तुरंत साथ छोड़ देना चाहिए, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Aaj ka suvichar, Quote of the day 16 June 2026: आचार्य चाणक्य ने अपनी रचना नीति शास्त्र में जीवन के कई पहलुओं से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब विस्तार से बताए हैं। एक श्लोक में आचार्य चाणक्य ने बताया है कि कब मित्र से उचित दूरी बना लेनी चाहिए या उसका त्याग कर देना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि जो मित्र है उससे भी व्यक्ति को सभी रहस्य को बताने से बचना चाहिए, क्योंकि विपरीत परिस्थितियों में यह आपके लिए नुकसान भरा हो सकता है। जानें चाणक्य नीति के अनुसार किस मित्र का त्याग कर देना अच्छा होता है और मित्र पर अति विश्वास क्यों नहीं करना चाहि। पढ़ें आज 16 जून 2026 का सुविचार।

श्लोक-

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।

वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥

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श्लोक का अर्थ:

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति पीठ पीछे आपके काम बिगाड़ता हो या बुराई करता हो। लेकिन आपके सामने मीठी-मीठी बातें करता हो, ऐसे मित्र को उसी पल त्याग देना चाहिए। ऐसे मित्र का त्याग उसी तरह कर देना बेहतर होता है, जैसे उस घड़े को छोड़ दिया जाता है जिसके मुंह पर दूध भरा होता है और अंदर गहरा विष होता है।

श्लोक का सार: नीति शास्त्र के अनुसार, जो व्यक्ति मुंह पर मीठी-मीठी बातें करते हैं और तारीफ करते हैं लेकिन पीठ पीछे बुराई करते हैं और नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार रहते हैं। ये कभी सच्चे मित्र नहीं हो सकते हैं। ऐसे लोगों से नुकसान या क्षति पहुंचने की संभावना हर समय बनी रहती है। इसलिए ऐसे मित्र और लोगों का त्याग करना ही बेहतर होता है।

श्लोक-

न विश्वसेदविश्वस्ते विश्वस्ते नातिविश्वसेत्।

विश्वासाद् भयमभ्येति नापरीक्ष्य च विश्वसेत्।।

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श्लोक का अर्थ:

एक अन्य श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो मित्र खोटा है उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो आपका मित्र है, उस पर आंख बंद करके विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह मित्र कभी भी नाराज होकर आपकी सारी गुप्त बातों को खोल सकता है।

श्लोक का सार:

आचार्य चाणक्य का मानना है कि जो व्यक्ति आपका मित्र नहीं है उस पर भरोसा कभी भी नहीं करना चाहिए लेकिन जिस मित्र के साथ अच्छा रिश्ता या संबंध होता है, उस पर भी अति विश्वास नुकसानदेय हो सकता है। क्योंकि अगर वह किसी कारण आपसे नाराज हो जाता है, तो वह आपके सारे भेद लोगों के सामने खोल सकता है। चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति अपने मित्र या जानने वालों से भावुकता में आकर अपनी सारी बातें खोल देता है, लेकिन जब मनमुटाव की स्थिति होती है तो वह व्यक्ति ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला सिद्ध होता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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