Premanand Maharaj Pravachan: भगवान हमारे सामने आ जाएं तो उन्हें कैसे पहचाना जाए? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब
प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में अपने प्रवचन के दौरान एक ऐसे सवाल का जवाब दिया है जो हर किसी के मन में होगा। आखिर भगवान जब सामने आएं तो उन्हें कैसे पहचाना जाए?

Premanand Maharaj Pravachan: वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचन से लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। एकांतिक वार्तालाप के दौरान वह लोगों के जवाब देते हुए कुछ ना कुछ ऐसा कह देते हैं जिससे हर कोई रिलेट कर जाता है। अपने प्रवचन के दौरान वह लोगों को बताते हैं कि आखिर हमारी जिंदगी का उद्देश्य क्या है और इसे कैसे सही काम में लगाना है? जिंदगी से पहले और बाद की हर कहानी उन्होंने बहुत ही आसान भाषा में समझाया है। हाल ही में एक महिला ने प्रेमानंद महाराज से भगवान से जुड़ा हुआ ऐसा सवाल किया जो लगभग हर किसी के मन में होगा। आइए जानते हैं इस सवाल के बारे में और प्रेमानंद महाराज ने इसके जवाब में क्या कहा?
एकांतिक वार्तालाप का सवाल
अगर कभी भगवान हमारे सामने आ जाएं तो उन्हें किस तरह से पहचाना जाए?
प्रेमानंद महाराज का जवाब
प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वो सामने तो हैं ही। जब तक वो पहनावना ना चाहें तो नहीं पहचान सकते हैं। वो तो हर समय हैं। कहहु सो कहां जहां प्रभु नाहीं। सब रूपों में हैं लेकिन पहचानने वाली दृष्टि वो दे दें। किसी सूझ वाली आंख ने पहचान की॥ है कण कण में झांकी भगवान की। वो सूझ। वो सूक्ष्म दृष्टि वो दिव्य दृष्टि वो ज्ञान दृष्टि वो प्रेम दृष्टि जब तक गुरुदेव के द्वारा नहीं मिलती है तब तक हम सर्वत्र विराजमान हैं। भगवान को हम नहीं पहचान सकते हैं। अगर भगवान ऐसा ना चाहें कि कोई उन्हें पहचान पाएं तो कोई भी पहचान नहीं सकता है। अगर पहचान वो देना चाहें तो वही देख सकता है।
पवित्र दृष्टि से दिखेगा सब कुछ
देखो गुरु के द्वारा दृष्टि मिली नामदेव जी को तो कुत्ते से भी विट्ठल भगवान को प्रकट कर लिया। कुत्ते में देखा विट्ठल भगवान। भूत में देखा विट्ठल भगवान। अब दृष्टि है और पवित्र हो गई तो सर्वत्र भगवान दिखते हैं। हमारी दृष्टि त्रिगुणमायामयी है तो स्त्री दिखाई देती है पुरुष दिखाई देता है। पापी दिखाई देता है और पुण्य आत्मा दिखाई देता है। महात्मा दिखाई देता है। दुरात्मता दिखाई देता है। ये त्रिगुणमायादृष्टि है।
हर जगह विराजमान हैं भगवान
पहले भजन के द्वारा हम ज्ञान दृष्टि प्राप्त करें। भगवत दृष्टि प्राप्त करें। तब सिया राम मय सब जग जानी। करहुँ प्रनाम जोरि जुग पानी। सब जगह भगवान विराजमान हैं। रोज भगवान आपके सामने आते हैं आपसे मिलते हैं लेकिन आप जान ही नहीं पाते हैं क्योंकि वो दृष्टि ही नहीं है। आपको लगता है कि ये कुत्ता है। आपको लगता है कि ये मनुष्य है। ये गाय है। ये अमुख है। मगर भगवान आकर मिलें ऐसा कहां? जब सबमें भगवान का दर्शन होगा तब भगवान की कृपा का अनुभव होगा।
नाम जप करने से पवित्र होगी दृष्टि
इसलिए खूब नाम जप करो। नाम जप से बढ़कर कोई साधना नहीं है। इससे सब कुछ प्राप्त हो जाएगा। जितना ज्यादा नाम जप किया जाए, उतनी ही दृष्टि पवित्र होती चली जाएगी और ऐसे ही धीरे-धीरे भगवान की पहचान हो जाएगी।




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